यूपी चुनाव 2027: उन्नाव की सभी 6 विधानसभा सीटों पर BJP का कब्जा, जानें राजनीतिक समीकरण
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ अभी से परवान चढ़ने लगी हैं और लखनऊ-कानपुर के बीच स्थित उन्नाव जिले की 6 विधानसभा सीटें इस बार चर्चा के केंद्र में हैं। फिलहाल इन सभी छह सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एकछत्र राज है, जो इस जिले को भगवा पार्टी का अभेद्य किला बनाता है।
उन्नाव की छह सीटें और मौजूदा विधायक
उन्नाव जिले की 6 विधानसभा सीटें हैं — बांगरमऊ, सफीपुर, मोहान, उन्नाव सदर, भगवंत नगर और पुरवा। वर्तमान में बांगरमऊ से श्रीकांत कटियार, सफीपुर से बंबा लाल दिवाकर, मोहान से बृजेश कुमार रावत, उन्नाव सदर से पंकज गुप्ता, भगवंत नगर से आशुतोष शुक्ला और पुरवा से अनिल कुमार सिंह BJP के विधायक हैं।
यह ऐसे समय में और भी अहम हो जाता है जब सूबे की हर सीट के लिए सभी दल खींचतान में जुटे हैं। उन्नाव का सामरिक भौगोलिक स्थान — लखनऊ और कानपुर के मध्य — इसे किसी भी सरकार बनाने की रणनीति में महत्त्वपूर्ण बनाता है।
जिले की प्रशासनिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर
प्रशासनिक आँकड़ों के अनुसार, उन्नाव जिले का कुल क्षेत्रफल 4,558 वर्ग किलोमीटर है। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की कुल जनसंख्या 31,08,367 है। प्रशासनिक ढाँचे में 6 तहसीलें, 16 विकास खंड, 1,044 ग्राम पंचायतें और 18 नगर पालिका व पंचायतें शामिल हैं। कानून-व्यवस्था के लिए जिले में 21 पुलिस थाने कार्यरत हैं। जिले की साक्षरता दर 66.37% और लिंगानुपात 907 है।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
उन्नाव के नामकरण की कहानी भी रोचक है। कहा जाता है कि लगभग 1,200 साल पहले यह पूरा क्षेत्र घने जंगलों से आच्छादित था। चौहान राजपूत गोडो सिंह ने इन जंगलों को साफ कर एक बस्ती बसाई, जिसे 'सवाई गोडो' नाम दिया गया — जो कालांतर में 'उन्नाव' बन गया। प्राचीन काल में यह क्षेत्र कोसल राज्य का अंग था और बाद में अवध के सूबे में समाहित हो गया।
गौरतलब है कि बांगरमऊ परगना के रामकोट गाँव सहित जिले के कई स्थानों पर प्राचीन अवशेष मिले हैं जो इसकी पुरातात्त्विक समृद्धि की गवाही देते हैं। 1857-58 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब सत्ता ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित हुई, तब उन्नाव को एक स्वतंत्र जिले का दर्जा मिला। 1869 में जिले ने अपना वर्तमान स्वरूप ग्रहण किया और उसी वर्ष उन्नाव शहर को नगर पालिका घोषित किया गया।
आर्थिक पहचान: लेदर उद्योग का दूसरा बड़ा केंद्र
उन्नाव की आर्थिक पहचान उसके लेदर उद्योग से जुड़ी है। टैनिंग यहाँ का प्रमुख उद्योग है और यह जिला कानपुर के बाद उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा लेदर हब माना जाता है। लेदर उत्पाद पूरे देश में निर्यात होते हैं, जिससे जिले की एक बड़ी आबादी की आजीविका जुड़ी है।
कनेक्टिविटी के मामले में उन्नाव सुदृढ़ है। NH-31, NH-27, SH-38 और SH-58 जैसे राजमार्ग इसे लखनऊ, कानपुर, रायबरेली और नोएडा से जोड़ते हैं। उन्नाव जंक्शन मुख्य रेलवे स्टेशन है। हवाई यात्रा के लिए कानपुर हवाई अड्डा और लखनऊ का अमौसी हवाई अड्डा निकटतम विकल्प हैं।
पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत
उन्नाव की सांस्कृतिक पहचान तकिया मेले से भी है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक माना जाता है और हर वर्ष बड़ी धूमधाम से आयोजित होता है। प्रकृति प्रेमियों के लिए शहीद चंद्रशेखर आज़ाद पक्षी अभयारण्य — जिसे पहले नवाबगंज पक्षी अभयारण्य के नाम से जाना जाता था — एक प्रमुख आकर्षण है। कानपुर-लखनऊ राजमार्ग पर स्थित यह अभयारण्य झील और आर्द्रभूमि से घिरा है, जहाँ साइबेरिया सहित CIS देशों से आने वाली 250 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी शरण लेते हैं। परिसर में हिरण पार्क, वॉच टावर और नौकायन की सुविधा भी उपलब्ध है।
आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्षी दल इस BJP के अभेद्य किले में सेंध लगाने में कामयाब हो पाते हैं या नहीं।