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यूपी चुनाव 2027: जालौन की तीन विधानसभा सीटों का सियासी गणित, 2022 में भाजपा ने जीती थीं दो सीटें

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यूपी चुनाव 2027: जालौन की तीन विधानसभा सीटों का सियासी गणित, 2022 में भाजपा ने जीती थीं दो सीटें

सारांश

2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच जालौन जिले की तीन सीटें — माधौगढ़, कालपी और उरई — फिर चर्चा में हैं। 2022 में भाजपा ने दो और सपा ने एक सीट जीती थी। कड़े मुकाबले वाली कालपी सीट पर जीत का अंतर महज़ 1 प्रतिशत से कम रहा था।

मुख्य बातें

जालौन जिले में माधौगढ़ (219), कालपी (220) और उरई (221) — तीन विधानसभा सीटें हैं।
2022 में भाजपा ने माधौगढ़ और उरई जीतीं; कालपी में समाजवादी पार्टी के विनोद चतुर्वेदी ने 29.48% वोट से जीत हासिल की।
माधौगढ़ में 4,45,421 और कालपी में 3,94,653 पंजीकृत मतदाता थे ( 2022 ); कालपी में मतदान प्रतिशत 60.05 रहा।
जालौन की साक्षरता दर 73.7% — राज्य औसत 67.7% से अधिक; जनसंख्या घनत्व 370 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी।
जिले में कुल 1,151 गाँव , 10 कस्बे और 2,88,338 परिवार हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच जालौन जिले की तीन विधानसभा सीटें — माधौगढ़, कालपी और उरई — एक बार फिर सियासी चर्चा के केंद्र में हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन तीन में से दो सीटें अपने नाम की थीं, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी (सपा) के खाते में गई थी। अगले चुनाव से पहले इन सीटों की जनसांख्यिकीय और राजनीतिक स्थिति समझना अहम है।

माधौगढ़ सीट: भाजपा का गढ़

माधौगढ़ जालौन जिले की एक प्रमुख विधानसभा सीट है, जो उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में 219वें नंबर पर आती है। यह सामान्य (अनारक्षित) सीट है और एक तहसील भी है। 2022 के चुनाव में यहाँ 4,45,421 पंजीकृत मतदाता थे।

यहाँ से मौजूदा विधायक भाजपा के मूलचंद्र निरंजन (जिन्हें मूलचंद सिंह भी कहा जाता है) हैं, जो 18वीं विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 2022 में उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी शीतल कुशवाहा थीं।

कालपी सीट: सपा का दबदबा

कालपी जालौन जिले की एक ऐतिहासिक तहसील और विधानसभा क्षेत्र है। यह भी सामान्य अनारक्षित सीट है और 403 में से 220वीं सीट है। 2022 के चुनाव में यहाँ 3,94,653 पंजीकृत मतदाता थे और मतदान प्रतिशत 60.05 रहा।

2022 के विधानसभा चुनाव में यहाँ से समाजवादी पार्टी के विनोद चतुर्वेदी ने करीब 29.48 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। उन्होंने निषाद पार्टी के छोटे सिंह को हराया, जिन्हें करीब 28.49 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों प्रत्याशियों के बीच यह मुकाबला काफी कड़ा रहा।

उरई सीट: प्रशासनिक केंद्र में भाजपा की जीत

उरई जालौन जिले का प्रशासनिक मुख्यालय और प्रमुख शहर है। यह कानपुर-झाँसी नेशनल हाईवे 27 पर स्थित है। इतिहास में यह शहर मराठा राज्यपाल का निवास रहा है। उरई विधानसभा सीट का क्रमांक 221 है।

यहाँ से मौजूदा विधायक भाजपा के गौरी शंकर वर्मा हैं, जिन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी के दयाशंकर वर्मा को हराकर जीत हासिल की थी।

जालौन जिले की जनसांख्यिकीय तस्वीर

2011 की जनगणना के अनुसार, जालौन जिला आबादी के लिहाज़ से उत्तर प्रदेश में 57वें स्थान पर है। जिले में शहरी आबादी का अनुपात 24.8 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत 22.3 प्रतिशत से अधिक है। जनसंख्या घनत्व 370 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जबकि राज्य का औसत 829 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

साक्षरता दर के मामले में जालौन की स्थिति उल्लेखनीय है — 73.7 प्रतिशत साक्षरता दर के साथ जिला प्रदेश में 11वें स्थान पर है, जो राज्य के औसत 67.7 प्रतिशत से अधिक है। लिंग अनुपात 865 के आँकड़े के साथ जिला प्रदेश में 63वें स्थान पर है।

जिले में कुल 1,151 गाँव हैं, जिनमें से 209 निर्जन हैं। माधौगढ़ तहसील में सर्वाधिक 223 बसे हुए गाँव हैं, जबकि उरई तहसील में सबसे कम 128 बसे हुए गाँव हैं। जिले में 10 कस्बे हैं, सभी वैधानिक शहर हैं। दशकीय वृद्धि दर 16.2 प्रतिशत रही है, जो राज्य की औसत 20.2 प्रतिशत से कम है। जिले में कुल 2,88,338 परिवार हैं और घरों का औसत आकार 5.9 व्यक्ति है।

2027 की रणनीतिक स्थिति

गौरतलब है कि जालौन जिले में भाजपा की पकड़ मजबूत है, लेकिन कालपी में सपा की जीत यह बताती है कि मैदान पूरी तरह एकतरफा नहीं है। 2027 में इन सीटों पर किसका पलड़ा भारी रहेगा, यह स्थानीय मुद्दों, जाति समीकरण और राष्ट्रीय राजनीतिक हवा पर निर्भर करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह बताता है कि बुंदेलखंड का यह इलाका पूरी तरह भाजपा के खेमे में नहीं है। 2027 में पिछड़ा और दलित वोट बैंक का ध्रुवीकरण और गठबंधन की रणनीति ही यहाँ विजेता तय करेगी। जालौन की अपेक्षाकृत अधिक साक्षरता दर और कम जनसंख्या घनत्व इसे एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र के रूप में स्थापित करते हैं जहाँ मतदाता अधिक सूचित निर्णय लेते हैं — और यही कारण है कि यहाँ भावनात्मक अपील से ज़्यादा विकास का मुद्दा काम करता है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जालौन जिले में कौन-कौन सी विधानसभा सीटें हैं?
जालौन जिले में तीन विधानसभा सीटें हैं — माधौगढ़ (क्रमांक 219), कालपी (220) और उरई (221)। ये तीनों सामान्य (अनारक्षित) सीटें हैं।
2022 में जालौन की तीनों सीटों पर किसने जीत हासिल की थी?
2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के मूलचंद्र निरंजन ने माधौगढ़ और गौरी शंकर वर्मा ने उरई से जीत हासिल की थी। कालपी सीट समाजवादी पार्टी के विनोद चतुर्वेदी ने जीती थी।
कालपी विधानसभा सीट पर 2022 का चुनावी मुकाबला कैसा रहा?
कालपी में 2022 का मुकाबला बेहद कड़ा रहा। सपा के विनोद चतुर्वेदी को करीब 29.48 प्रतिशत और निषाद पार्टी के छोटे सिंह को करीब 28.49 प्रतिशत वोट मिले थे। यहाँ मतदान प्रतिशत 60.05 रहा।
जालौन जिले की साक्षरता और जनसंख्या की स्थिति क्या है?
2011 की जनगणना के अनुसार जालौन की साक्षरता दर 73.7 प्रतिशत है, जो राज्य के औसत 67.7 प्रतिशत से अधिक है और इसे प्रदेश में 11वाँ स्थान दिलाती है। जनसंख्या घनत्व 370 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के औसत 829 से काफी कम है।
2027 के चुनाव में जालौन सीटों पर किन मुद्दों का असर होगा?
2027 के चुनाव में जाति समीकरण, गठबंधन की रणनीति और स्थानीय विकास के मुद्दे अहम भूमिका निभाएंगे। कालपी जैसी सीट पर जहाँ 2022 में नतीजा काफी करीबी रहा, वहाँ पिछड़ा और दलित वोट बैंक निर्णायक साबित हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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