यूपी विधानसभा चुनाव 2027: शामली की तीनों सीटों पर 2022 में भाजपा रही थी दूसरे नंबर, सपा-रालोद गठबंधन ने किया था क्लीन स्वीप
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच शामली जिले का राजनीतिक माहौल तेज़ी से गर्म हो रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की तीनों सीटों — शामली, कैराना और थानाभवन — पर समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के गठबंधन ने एकतरफा जीत हासिल की थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का खाता नहीं खुल पाया था। अब जबकि सपा-रालोद गठबंधन टूट चुका है, सभी दलों के संभावित दावेदार जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मज़बूत करने में जुट गए हैं।
शामली जिले का भौगोलिक और आर्थिक परिचय
शामली गंगा-यमुना दोआब के उपजाऊ क्षेत्र में स्थित है और अपनी कृषि, ऐतिहासिक महत्व तथा विशिष्ट उद्योगों के लिए जाना जाता है। यहाँ बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती होती है, चीनी मिलें संचालित हैं और गुड़ उत्पादन भी प्रमुख है — जो इसे उत्तर प्रदेश के अग्रणी गन्ना-चीनी उत्पादक क्षेत्रों में शामिल करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान हस्तिनापुर से जाते हुए श्रीकृष्ण ने यहाँ के हनुमान धाम में विश्राम किया था। कुछ कथाओं के अनुसार, यह नगर कुंतीपुत्र भीमसेन द्वारा बसाया गया था।
2022 चुनाव के मुख्य परिणाम
शामली विधानसभा सीट पर रालोद के प्रसन्न कुमार चौधरी ने 1,03,070 वोट पाकर जीत दर्ज की। भाजपा के तेजेंद्र निरवाल 95,963 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बसपा के बिजेंद्र मलिक को 8,183 वोट मिले। इस सीट पर कुल 67.62 प्रतिशत मतदान हुआ था।
कैराना विधानसभा सीट से सपा के नाहिद हसन लगातार तीसरी बार विधायक बने। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी मृगांका सिंह को 25,887 वोटों के बड़े अंतर से हराया, जबकि बसपा प्रत्याशी राजेंद्र तीसरे स्थान पर रहे। इस सीट पर 75.04 प्रतिशत मतदान दर्ज की गई — जो जिले की तीनों सीटों में सर्वाधिक थी।
थानाभवन विधानसभा सीट पर रालोद उम्मीदवार अशरफ अली खान ने 1,03,751 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। भाजपा उम्मीदवार सुरेश राणा को 92,945, बसपा उम्मीदवार को 11,039 और निर्दलीय प्रत्याशी शेरपाल सिंह को 39,755 वोट मिले। इस सीट पर 66.87 प्रतिशत मतदान हुआ था।
गठबंधन टूटने का राजनीतिक असर
गौरतलब है कि 2022 में सपा-रालोद के संयुक्त मोर्चे ने शामली जिले में भाजपा को पूरी तरह रोक दिया था — दो सीटें रालोद और एक सपा ने जीती थीं। अब यह गठबंधन समाप्त हो चुका है, जिससे 2027 में मतों के विभाजन की आशंका दोनों दलों के लिए नई चुनौती बन गई है। विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन के बिना लड़ने पर सपा और रालोद दोनों की वोट हिस्सेदारी में कमी आ सकती है, जो भाजपा के लिए अवसर साबित हो सकता है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ अभी से जोर पकड़ रही हैं। शामली की तीनों सीटों पर सभी दलों के संभावित उम्मीदवार मतदाताओं के बीच पहुँच बना रहे हैं। सपा-रालोद के अलग-अलग लड़ने से समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं और भाजपा उन सीटों पर वापसी की कोशिश करेगी जहाँ वह 2022 में दूसरे स्थान पर रही थी।