28 अक्टूबर 2026
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आईएनएस सह्याद्रि बुसान पहुंचा, भारत-दक्षिण कोरिया नौसेना अभ्यास से हिंद-प्रशांत सहयोग मजबूत

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आईएनएस सह्याद्रि बुसान पहुंचा, भारत-दक्षिण कोरिया नौसेना अभ्यास से हिंद-प्रशांत सहयोग मजबूत

सारांश

भारतीय नौसेना का स्वदेशी स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि दक्षिण कोरिया के बुसान बंदरगाह पहुंचा है। बंदरगाह पर पेशेवर आदान-प्रदान के बाद समुद्र में आरओकेएस मुनमु द ग्रेट के साथ संयुक्त अभ्यास होगा — हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती रणनीतिक उपस्थिति का एक और संकेत।

मुख्य बातें

आईएनएस सह्याद्रि 28 अक्टूबर 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान नौसैनिक बंदरगाह पहुंचा।
भारत और दक्षिण कोरिया की नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाएगा।
समुद्री चरण में आईएनएस सह्याद्रि और दक्षिण कोरिया का आरओकेएस मुनमु द ग्रेट भाग लेंगे।
अभ्यास में युद्धपोतों के आपसी दौरे, पेशेवर बातचीत, संयुक्त प्रशिक्षण और खेल गतिविधियाँ शामिल हैं।
आईएनएस सह्याद्रि भारत का स्वदेश निर्मित निर्देशित मिसाइल स्टील्थ युद्धपोत है, जो देश की स्वदेशी जहाज़ निर्माण क्षमता का प्रतीक है।

भारतीय नौसेना का स्वदेशी निर्देशित मिसाइल स्टील्थ युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि 28 अक्टूबर 2026 को दक्षिण कोरिया के बुसान नौसैनिक बंदरगाह पर पहुंचा, जहाँ दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच समुद्री सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बंदरगाह पर स्वागत और प्रारंभिक गतिविधियाँ

बुसान पहुंचने पर दक्षिण कोरियाई नौसेना ने आईएनएस सह्याद्रि का गर्मजोशी से स्वागत किया। अभ्यास के पहले चरण में दोनों देशों के नौसैनिक एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा करेंगे। इसके साथ ही पेशेवर बातचीत, संयुक्त प्रशिक्षण सत्र और खेल गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएंगी।

आईएनएस सह्याद्रि के कमांडिंग ऑफिसर दक्षिण कोरियाई नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से औपचारिक मुलाकात करेंगे। नौसेना के अनुसार, इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों देशों के नौसैनिकों को परस्पर अनुभव साझा करने और एक-दूसरे की कार्यप्रणाली से परिचित होने का अवसर प्रदान करना है।

समुद्री अभ्यास का स्वरूप

बंदरगाह-चरण की गतिविधियों के बाद अभ्यास समुद्र में आगे बढ़ेगा। समुद्री चरण में भारतीय नौसेना का आईएनएस सह्याद्रि और दक्षिण कोरिया का युद्धपोत आरओकेएस मुनमु द ग्रेट भाग लेंगे। दोनों युद्धपोतों के बीच समन्वित समुद्री गतिविधियाँ आयोजित होंगी, जिनका लक्ष्य आपसी तालमेल सुधारना, संयुक्त अभियान क्षमता बढ़ाना और दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर संबंधों को प्रगाढ़ करना है।

आईएनएस सह्याद्रि — स्वदेशी शक्ति का प्रतीक

गौरतलब है कि आईएनएस सह्याद्रि भारत में डिज़ाइन और निर्मित एक अत्याधुनिक निर्देशित मिसाइल स्टील्थ युद्धपोत है, जो देश की स्वदेशी जहाज़ निर्माण क्षमता का जीवंत उदाहरण है। यह युद्धपोत भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में की गई प्रगति को रेखांकित करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को लेकर क्षेत्रीय देशों के बीच रणनीतिक सहभागिता तेज़ी से बढ़ रही है।

हिंद-प्रशांत रणनीति और भारत का व्यापक दृष्टिकोण

भारतीय नौसेना मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ नियमित परिचालन सहयोग और पेशेवर संपर्क के माध्यम से अपनी रणनीतिक उपस्थिति को लगातार विस्तार दे रही है। यह द्विपक्षीय अभ्यास समुद्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया की साझा प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट करता है।

आने वाले दिनों में इस अभ्यास के समुद्री चरण के परिणाम दोनों देशों की संयुक्त नौसैनिक क्षमता का वास्तविक मूल्यांकन प्रस्तुत करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो क्वाड और अन्य बहुपक्षीय साझेदारियों के समानांतर चलती है। आईएनएस सह्याद्रि का बुसान दौरा यह भी संकेत देता है कि भारत पूर्वी एशियाई देशों के साथ रक्षा संबंधों को उतनी ही गंभीरता से ले रहा है जितनी कि पश्चिमी भागीदारों के साथ। ध्यान देने योग्य है कि स्वदेशी युद्धपोत की तैनाती भारत की 'आत्मनिर्भर रक्षा' की कहानी को वैश्विक मंच पर रखती है। हालाँकि, इस सहयोग की दीर्घकालिक परिचालन गहराई — और यह क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन पर कितना असर डालेगी — यह समय के साथ ही स्पष्ट होगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईएनएस सह्याद्रि क्या है और यह दक्षिण कोरिया क्यों गया है?
आईएनएस सह्याद्रि भारतीय नौसेना का स्वदेश में डिज़ाइन और निर्मित निर्देशित मिसाइल स्टील्थ युद्धपोत है। यह दक्षिण कोरिया के बुसान नौसैनिक बंदरगाह पर द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास के लिए पहुंचा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और परिचालन तालमेल बढ़ाना है।
भारत-दक्षिण कोरिया नौसेना अभ्यास में क्या होगा?
अभ्यास दो चरणों में होगा — पहले बंदरगाह पर, जिसमें युद्धपोतों के आपसी दौरे, पेशेवर बातचीत और खेल गतिविधियाँ शामिल हैं; फिर समुद्री चरण में आईएनएस सह्याद्रि और आरओकेएस मुनमु द ग्रेट के बीच समन्वित समुद्री गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी।
यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अभ्यास हिंद-प्रशांत में समुद्री स्थिरता और सुरक्षा के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह भारत की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ नौसैनिक संबंध मजबूत कर रहा है।
आरओकेएस मुनमु द ग्रेट कौन सा युद्धपोत है?
आरओकेएस मुनमु द ग्रेट दक्षिण कोरियाई नौसेना का युद्धपोत है जो इस द्विपक्षीय अभ्यास के समुद्री चरण में भारतीय नौसेना के आईएनएस सह्याद्रि के साथ भाग लेगा।
भारतीय नौसेना अन्य देशों के साथ ऐसे अभ्यास क्यों करती है?
भारतीय नौसेना मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ नियमित परिचालन सहयोग के ज़रिए अपने पेशेवर संबंध मजबूत करती है। इससे अंतर-संचालनीयता (interoperability) बढ़ती है और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा ढाँचे को सुदृढ़ किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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