इंद्र 2026 नौसैनिक अभ्यास पूरा, आईएनएस सह्याद्रि व्लादिवोस्तोक से रवाना
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि 23 अक्टूबर 2026 को रूस के व्लादिवोस्तोक बंदरगाह से रवाना हो गया, जो भारत-रूस द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र 2026' के सफल समापन का प्रतीक है। दोनों देशों की नौसेनाओं ने इस अभ्यास में संयुक्त युद्धाभ्यास, हेलीकॉप्टर संचालन, संचार समन्वय और चिकित्सा निकासी जैसी महत्वपूर्ण परिचालन गतिविधियाँ संपन्न कीं।
अभ्यास की संरचना और चरण
नौसेना के अनुसार, 'इंद्र 2026' अभ्यास दो चरणों में आयोजित किया गया। पहले चरण में बंदरगाह पर गतिविधियाँ हुईं, जबकि दूसरे चरण में खुले समुद्र में ऑपरेशनल अभ्यास किया गया। यह ढाँचा दोनों नौसेनाओं को न केवल तकनीकी, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी एकीकृत करने का अवसर देता है।
बंदरगाह चरण के दौरान दोनों नौसेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच विस्तृत बातचीत हुई। कर्मियों ने एक-दूसरे के युद्धपोतों का निरीक्षण किया और रक्षा विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। इसके अतिरिक्त परिचालन समन्वय से जुड़ी गतिविधियाँ, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
समुद्री चरण: संयुक्त क्षमता की परख
समुद्री चरण में दोनों नौसेनाओं ने समन्वित युद्धाभ्यास, एकीकृत संचार व्यवस्था, हेलीकॉप्टर संचालन और चिकित्सा निकासी का संयुक्त अभ्यास किया। इन गतिविधियों के ज़रिए समुद्र में एकसाथ काम करने की क्षमता को परखा गया। आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, प्रभावी संचार और बहु-स्तरीय परिचालन समन्वय पर विशेष बल दिया गया।
भारत-रूस रक्षा सहयोग का व्यापक संदर्भ
'इंद्र' श्रृंखला के नौसैनिक अभ्यास भारत-रूस के दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी का अभिन्न हिस्सा हैं। गौरतलब है कि यह अभ्यास ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी समुद्री उपस्थिति को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लगातार विस्तार दे रहा है और बहुध्रुवीय कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की नीति पर चल रहा है। व्लादिवोस्तोक में आईएनएस सह्याद्रि की तैनाती इसी वृहत्तर रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
अभ्यास के दौरान खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों ने दोनों देशों के नौसैनिक कर्मियों के बीच आपसी भाईचारे और पेशेवर संबंधों को और प्रगाढ़ किया। इस तरह के अभ्यास सैन्य-से-सैन्य संपर्क को सुदृढ़ करते हैं, जो किसी भी द्विपक्षीय रक्षा संबंध की नींव होती है।
आईएनएस त्रिशूल का पुर्तगाल दौरा भी सम्पन्न
इसी अवधि में भारतीय नौसेना का जहाज त्रिशूल भी पुर्तगाल के लिस्बन में अपना बंदरगाह दौरा पूरा कर वहाँ से रवाना हो गया। इस यात्रा के दौरान भारतीय दल को पुर्तगाली नौसेना के साथ पेशेवर संवाद, ज्ञान-साझेदारी और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान का अवसर मिला, जिससे दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल और साझा समुद्री हितों की समझ को बल मिला।
आगे की दिशा
'इंद्र 2026' का सफल समापन भारत और रूस के बीच समुद्री सुरक्षा में साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इस अभ्यास से संयुक्त परिचालन क्षमता जो मज़बूत हुई है, वह भविष्य में दोनों नौसेनाओं के बीच और अधिक जटिल एवं व्यापक अभ्यासों की नींव रखती है।