19 अक्टूबर 2026
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इंद्र-2026: व्लादिवोस्तोक में भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास संपन्न, आईएनएस सह्याद्रि ने निभाई अहम भूमिका

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इंद्र-2026: व्लादिवोस्तोक में भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास संपन्न, आईएनएस सह्याद्रि ने निभाई अहम भूमिका

सारांश

व्लादिवोस्तोक में 'इंद्र-2026' नौसैनिक अभ्यास का समापन भारत-रूस रक्षा साझेदारी की परिचालन गहराई को रेखांकित करता है। आईएनएस सह्याद्रि की भागीदारी और वाइस एडमिरल स्तर की बैठकें दिखाती हैं कि बदलते भू-राजनीतिक माहौल में भी यह संबंध समुद्री मोर्चे पर सक्रिय और मज़बूत बना हुआ है।

मुख्य बातें

संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026' रूस के व्लादिवोस्तोक में 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित हुआ।
आईएनएस सह्याद्रि 10 अक्टूबर को व्लादिवोस्तोक पहुँचा; उद्घाटन समारोह 15 अक्टूबर को हुआ।
अभ्यास में बंदरगाह चरण और समुद्री चरण दोनों शामिल रहे — युद्धपोतों के परस्पर दौरे और संयुक्त समुद्री गतिविधियाँ संपन्न हुईं।
आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने प्रिमोर्स्की फ्लोटिला कमांडर वाइस एडमिरल ए.
सिसुएव के साथ औपचारिक बैठक की।
अभ्यास की मेज़बानी रूसी नौसेना ने की; व्लादिवोस्तोक के उपमहापौर के साथ भी शिष्टाचार बैठक हुई।

रूस के व्लादिवोस्तोक में 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक चले संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026' का रविवार को सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसमें भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और रूसी नौसेना के युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव की संचालन टीमों ने संयुक्त समुद्री गतिविधियाँ संपन्न कीं। इस अभ्यास ने दोनों देशों के बीच नौसैनिक समन्वय, पेशेवर संवाद और आपसी तालमेल को नई ऊँचाई दी।

अभ्यास का क्रमिक घटनाक्रम

आईएनएस सह्याद्रि 10 अक्टूबर 2026 को व्लादिवोस्तोक पहुँचा था। 15 अक्टूबर को रूसी नौसेना की मेज़बानी में अभ्यास का उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद बंदरगाह चरण शुरू हुआ, जिसमें दोनों देशों के नौसैनिकों ने एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा किया और परिचालन प्रक्रियाओं को निकट से समझा।

बंदरगाह चरण: संवाद और मेलजोल

बंदरगाह चरण में पेशेवर विचार-विमर्श और परस्पर अनुभव-साझेदारी पर विशेष ज़ोर रहा। व्लादिवोस्तोक के उपमहापौर के साथ एक शिष्टाचार बैठक भी हुई, जिसने कूटनीतिक और नागरिक संपर्क को मज़बूत किया। आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने रूसी बेड़े की मिश्रित सेनाओं के प्रिमोर्स्की फ्लोटिला के कमांडर वाइस एडमिरल ए. वाई. सिसुएव के साथ औपचारिक बैठक की।

समुद्री चरण: संयुक्त अभियान क्षमता का परीक्षण

बंदरगाह चरण के बाद दोनों नौसेनाओं ने समुद्र में संयुक्त गतिविधियाँ संचालित कीं। इस दौरान भारतीय नौसेना और रूसी संघ की नौसेना (RUFN) ने पेशेवर एवं परिचालन स्तर पर समन्वय का अभ्यास किया। गौरतलब है कि 'इंद्र' श्रृंखला के अभ्यास दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग की पुरानी और स्थापित परंपरा का हिस्सा हैं, जो समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में द्विपक्षीय प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।

भारत-रूस रक्षा साझेदारी का व्यापक संदर्भ

यह अभ्यास ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत अपनी 'बहु-संरेखण' नीति के तहत विभिन्न देशों के साथ सामरिक सहयोग बनाए रखता है। रूस दशकों से भारत का प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है, और 'इंद्र-2026' जैसे अभ्यास इस साझेदारी को परिचालन स्तर पर जीवंत बनाए रखते हैं। यह ऐसी Nth कड़ी है जो दिखाती है कि दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग केवल कागज़ी समझौतों तक सीमित नहीं, बल्कि समुद्र में वास्तविक तालमेल पर भी टिका है।

आगे की राह

'इंद्र-2026' के सफल समापन के साथ, दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन अनुभव और पारस्परिक समझ का नया अध्याय जुड़ गया है। भविष्य में इस श्रृंखला के अगले संस्करण में और अधिक जटिल संयुक्त अभियानों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उसकी 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति का व्यावहारिक प्रमाण है। हालाँकि, आलोचक यह भी पूछते हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में इस तरह के उच्च-दृश्यता सैन्य सहयोग से भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर क्या असर पड़ता है। यह देखना ज़रूरी होगा कि 'इंद्र' श्रृंखला आने वाले वर्षों में और कितनी विस्तृत होती है — क्या यह केवल नौसैनिक दायरे तक सीमित रहेगी या संयुक्त थल एवं वायु अभ्यासों तक भी पहुँचेगी।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्र-2026 नौसैनिक अभ्यास क्या है?
इंद्र-2026 भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच एक द्विपक्षीय संयुक्त समुद्री अभ्यास है, जो 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक रूस के व्लादिवोस्तोक में आयोजित हुआ। इसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय, परिचालन तालमेल और पेशेवर संवाद को मज़बूत करना था।
इंद्र-2026 में भारत की तरफ से कौन-सा युद्धपोत शामिल था?
भारत की ओर से युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि ने इस अभ्यास में भाग लिया, जो 10 अक्टूबर 2026 को व्लादिवोस्तोक पहुँचा था। रूस की तरफ से युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव की संचालन टीम ने संयुक्त गतिविधियों में हिस्सा लिया।
इंद्र-2026 में कौन-कौन से चरण शामिल थे?
अभ्यास में दो प्रमुख चरण रहे — बंदरगाह चरण, जिसमें युद्धपोतों के परस्पर दौरे और पेशेवर संवाद हुए, और समुद्री चरण, जिसमें दोनों नौसेनाओं ने समुद्र में संयुक्त अभियान संचालित किए। इसके अलावा व्लादिवोस्तोक के उपमहापौर के साथ शिष्टाचार बैठक भी हुई।
इंद्र-2026 अभ्यास भारत-रूस संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
'इंद्र' श्रृंखला भारत और रूस के बीच दीर्घकालिक रक्षा सहयोग की परंपरा का हिस्सा है। यह अभ्यास दिखाता है कि दोनों देशों की नौसेनाएँ न केवल समझौतों पर, बल्कि परिचालन स्तर पर भी साथ काम करने में सक्षम हैं।
इंद्र-2026 में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने रूस में किससे मुलाकात की?
आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने रूसी बेड़े की मिश्रित सेनाओं के प्रिमोर्स्की फ्लोटिला के कमांडर वाइस एडमिरल ए. वाई. सिसुएव के साथ औपचारिक बैठक की। इसके अलावा व्लादिवोस्तोक के उपमहापौर के साथ भी शिष्टाचार भेंट हुई।
राष्ट्र प्रेस
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