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रूसी नौसेना प्रतिनिधिमंडल ने केरल में दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा किया

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रूसी नौसेना प्रतिनिधिमंडल ने केरल में दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा किया

सारांश

रूसी नौसेना का छह सदस्यीय दल 27 सितंबर से 1 अक्टूबर तक केरल में रहा — यह यात्रा सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी। सेना प्रमुख की आठ साल में पहली रूस यात्रा, जयशंकर-लावरोव बैठक और अब नौसैनिक प्रशिक्षण-साझेदारी — भारत-रूस रक्षा संबंधों की यह तिहरी कड़ी एक ठोस रणनीतिक संदेश देती है।

मुख्य बातें

रूसी नौसेना के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक केरल में दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा किया।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कैप्टन फर्स्ट रैंक सर्गेई वी.
सैतोव ने किया; भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण तंत्र और बुनियादी ढाँचे का अवलोकन किया गया।
दोनों पक्षों ने समुद्री सहयोग, अंतर-संचालनीयता और संस्थागत संबंध मज़बूत करने पर चर्चा की।
जयशंकर और सर्गेई लावरोव ने पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में मुलाकात की और 'विशेष व विशेषाधिकार प्राप्त' साझेदारी की प्रतिबद्धता दोहराई।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पिछले महीने आठ वर्षों में किसी भारतीय थलसेना प्रमुख की पहली रूस यात्रा पूरी की।

रूसी नौसेना के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 27 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 के बीच केरल में दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा किया, जो भारत-रूस नौसैनिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कैप्टन फर्स्ट रैंक सर्गेई वी. सैतोव ने किया।

दौरे का उद्देश्य और गतिविधियाँ

भारतीय नौसेना के अनुसार, यात्रा के दौरान रूसी प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण प्रणाली, बुनियादी ढाँचे और विभिन्न सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली। दोनों पक्षों के बीच समुद्री सहयोग को और गहरा करने, अंतर-संचालनीयता बेहतर बनाने तथा संस्थागत एवं व्यावसायिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के उपायों पर चर्चा हुई।

भारतीय नौसेना ने एक्स पर अपनी आधिकारिक पोस्ट में कहा, 'बातचीत के दौरान समुद्री सहयोग को और बढ़ाने, दोनों नौसेनाओं के साथ मिलकर काम करने की क्षमता बेहतर करने और संस्थागत तथा प्रोफेशनल रिश्तों को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। यह भारत और रूस के बीच लंबे समय से चली आ रही नौसैनिक साझेदारी को दिखाता है।'

व्यापक द्विपक्षीय संदर्भ

यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब भारत और रूस अपनी रक्षा एवं रणनीतिक साझेदारी को कई मोर्चों पर मज़बूत करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई थी।

रूसी विदेश मंत्रालय ने उस बैठक के बाद जानकारी देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने 'रूस-भारत की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी' को मज़बूत करने तथा संयुक्त राष्ट्र, G20 और BRICS में करीबी तालमेल बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्री जयशंकर ने भी बैठक के बाद कहा कि दोनों नेताओं ने कई मौजूदा मुद्दों पर विचार साझा किए और द्विपक्षीय संबंधों व BRICS सहयोग की समीक्षा की।

सेना प्रमुख की रूस यात्रा — आठ साल में पहली

पिछले महीने भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पूरी की — आठ वर्षों में किसी भारतीय थलसेना प्रमुख की यह पहली रूस यात्रा थी। इस दौरान उन्होंने रूस के उप रक्षा मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव और रूसी थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रे मोर्दविचेव से मुलाकात की।

भारतीय सेना के एडिशनल डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ पब्लिक इंफॉर्मेशन (ADGPI) के अनुसार, उन बैठकों में दोनों देशों की सेनाओं की क्षमताओं को मिलकर विकसित करने, प्रशिक्षण आदान-प्रदान, परिचालन अनुभव साझा करने और सहयोग का दायरा विस्तारित करने पर विचार-विमर्श हुआ।

रणनीतिक महत्व

यह ऐसे समय में आया है जब भारत की बहु-ध्रुवीय विदेश नीति के तहत वह पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारते हुए रूस के साथ अपनी पारंपरिक रक्षा साझेदारी भी बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। नौसैनिक प्रशिक्षण, बुनियादी ढाँचे के अवलोकन और उच्च स्तरीय राजनयिक संपर्क का यह संयोजन दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं, बल्कि संस्थागत और परिचालनात्मक स्तर पर भी गहरा हो रहा है।

आने वाले महीनों में दोनों नौसेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विदेश मंत्री स्तर की बैठक और सेना प्रमुख की आठ साल में पहली रूस यात्रा — तीनों घटनाएँ एक ही महीने में घटित होना महज संयोग नहीं है। यह भारत की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसमें वह पश्चिम के साथ बढ़ते रिश्तों के बावजूद रूस के साथ अपनी रक्षा एवं राजनयिक धुरी को सुरक्षित रखना चाहता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन यात्राओं को अलग-अलग घटनाओं के रूप में पेश करती है, जबकि असली सवाल यह है कि क्या भारत इस संतुलन को यूक्रेन संघर्ष के दीर्घकालिक नतीजों के बावजूद टिकाए रख सकता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रूसी नौसेना प्रतिनिधिमंडल ने भारत में कहाँ-कहाँ दौरा किया?
रूसी नौसेना के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने केरल में स्थित दक्षिणी नौसेना कमान और भारतीय नौसेना अकादमी का दौरा किया। यह यात्रा 27 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक चली।
इस दौरे का नेतृत्व किसने किया और इसका उद्देश्य क्या था?
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कैप्टन फर्स्ट रैंक सर्गेई वी. सैतोव ने किया। दौरे का उद्देश्य भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण तंत्र और सुविधाओं को समझना तथा दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग, अंतर-संचालनीयता और संस्थागत संबंध मज़बूत करना था।
हाल ही में भारत और रूस के बीच और कौन-सी उच्च स्तरीय रक्षा गतिविधियाँ हुई हैं?
पिछले महीने भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने आठ वर्षों में किसी भारतीय थलसेना प्रमुख की पहली रूस यात्रा की, जहाँ उन्होंने वरिष्ठ रूसी सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। इसके अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर और सर्गेई लावरोव के बीच न्यूयॉर्क में द्विपक्षीय बैठक भी हुई।
जयशंकर-लावरोव बैठक में क्या तय हुआ?
रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने रूस-भारत की 'विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त' रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने तथा संयुक्त राष्ट्र, G20 और BRICS में करीबी तालमेल बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत-रूस नौसैनिक सहयोग इस समय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह सहयोग इसलिए अहम है क्योंकि भारत अपनी बहु-ध्रुवीय विदेश नीति के तहत पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारते हुए रूस के साथ पारंपरिक रक्षा साझेदारी भी बनाए रखना चाहता है। नौसैनिक प्रशिक्षण और संस्थागत आदान-प्रदान यह दर्शाते हैं कि सहयोग केवल हथियार खरीद तक सीमित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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