16 अक्टूबर 2026
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भारत-रूस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026': समुद्री चरण शुरू, INS सह्याद्रि तैनात

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भारत-रूस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026': समुद्री चरण शुरू, INS सह्याद्रि तैनात

सारांश

भारत-रूस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026' का समुद्री चरण शुरू। INS सह्याद्रि और रूसी युद्धपोत की टीमों में योजना सम्मेलन संपन्न, वाइस एडमिरल स्तर की बैठक भी हुई। 13 से 18 अक्टूबर तक चलने वाला यह अभ्यास दोनों देशों की नौसैनिक अंतःक्रियाशीलता और रणनीतिक रक्षा साझेदारी को नई मज़बूती देगा।

मुख्य बातें

भारत-रूस संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026' का समुद्री चरण 16 अक्टूबर 2026 को रूस में प्रारंभ हुआ।
आईएनएस सह्याद्रि (भारत) और अल्दार त्सिदेनझापोव (रूस) की संचालन टीमों के बीच योजना सम्मेलन संपन्न।
अभ्यास का पहला — बंदरगाह — चरण 13 अक्टूबर से शुरू होकर पूर्ण हो चुका है; समुद्री चरण 18 अक्टूबर तक जारी रहेगा।
आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने प्रिमोर्स्की फ्लोटिला कमांडर वाइस एडमिरल ए.
सिसुएव से औपचारिक बैठक की।
हाल ही में नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय रक्षा वार्ता में संयुक्त उत्पादन और सैन्य-तकनीकी सहयोग पर भी चर्चा हुई थी।

भारत और रूस के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026' का समुद्री चरण 16 अक्टूबर 2026 को रूस में आधिकारिक रूप से प्रारंभ होने जा रहा है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और रूसी नौसेना के युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव की संचालन टीमों के बीच विस्तृत योजना सम्मेलन संपन्न हो चुका है। यह अभ्यास 18 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा और दोनों देशों की नौसैनिक साझेदारी को नई दिशा देने का लक्ष्य रखता है।

अभ्यास की संरचना और दोनों चरण

'इंद्र-2026' को दो अलग-अलग चरणों में आयोजित किया जा रहा है। 13 अक्टूबर से शुरू हुए पहले चरण में बंदरगाह पर पेशेवर वार्ता, आपसी अनुभव साझाकरण और समुद्री गतिविधियों की रूपरेखा तैयार की गई। इस दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए व्यापक कार्यक्रम की योजना बनाई गई।

अब दूसरे — अर्थात् समुद्री — चरण में दोनों देशों की नौसेनाएँ खुले समुद्र में संयुक्त अभियानों का अभ्यास करेंगी। इसका मुख्य उद्देश्य एक-दूसरे के संचालन तरीकों को समझना और समुद्र में मिलकर कार्य करने की क्षमता को सुदृढ़ करना है।

योजना सम्मेलन और वरिष्ठ नौसैनिक बैठक

समुद्री चरण से पहले दोनों युद्धपोतों की संचालन टीमों के बीच एक महत्वपूर्ण योजना सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें रूसी बेड़े के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। इस सम्मेलन में समुद्री गतिविधियों के लिए विस्तृत कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई।

इसके अतिरिक्त, आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने रूसी बेड़े की मिश्रित सेनाओं के प्रिमोर्स्की फ्लोटिला के कमांडर वाइस एडमिरल ए. वाई. सिसुएव के साथ औपचारिक बैठक भी की। यह बैठक दोनों पक्षों के बीच उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद का प्रतीक है।

भारत-रूस रक्षा साझेदारी का व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि हाल ही में नई दिल्ली में भारत और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय रक्षा वार्ता हुई थी, जिसमें मौजूदा सैन्य-तकनीकी सहयोग की समीक्षा की गई और रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन एवं विकास की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई। 'इंद्र-2026' उसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में तेज़ी से बदलाव हो रहे हैं और भारत अपनी 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) नीति के तहत विभिन्न शक्तियों के साथ सैन्य सहयोग बनाए रखने पर ज़ोर दे रहा है। 'इंद्र' श्रृंखला दोनों देशों के बीच नौसैनिक अंतःक्रियाशीलता बढ़ाने की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

अभ्यास के उद्देश्य और रणनीतिक महत्व

इस संयुक्त अभ्यास का केंद्रीय उद्देश्य भारतीय और रूसी नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल को परिष्कृत करना है। बंदरगाह से लेकर खुले समुद्र तक सहयोग की यह प्रक्रिया दोनों देशों की नौसेनाओं को संयुक्त अभियानों की वास्तविक परिस्थितियों से रूबरू कराती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे अभ्यास न केवल तकनीकी अंतःक्रियाशीलता बढ़ाते हैं, बल्कि दोनों देशों की दीर्घकालिक रणनीतिक रक्षा साझेदारी को भी व्यावहारिक आधार प्रदान करते हैं। 18 अक्टूबर को अभ्यास के समापन के बाद दोनों नौसेनाओं के अनुभवों का आदान-प्रदान भविष्य की संयुक्त योजनाओं को दिशा देगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसके तहत वह पश्चिमी दबावों के बावजूद मॉस्को के साथ रणनीतिक दूरी बनाने से इनकार करता रहा है। जब यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पश्चिमी गठबंधन से अलग-थलग है, तब भारत का यह अभ्यास एक स्पष्ट संकेत है कि नई दिल्ली अपनी विदेश नीति को किसी एक धुरी के दबाव में नहीं आने देगा। हालाँकि आलोचकों का तर्क है कि रूसी रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भरता भारत की दीर्घकालिक 'आत्मनिर्भरता' के लक्ष्य को कमज़ोर करती है। असली कसौटी यह होगी कि क्या ये अभ्यास रक्षा उपकरणों के संयुक्त उत्पादन को ठोस आकार दे पाते हैं, जो अभी तक मुख्यतः घोषणाओं तक सीमित रहा है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास 'इंद्र-2026' क्या है?
'इंद्र-2026' भारत और रूस के बीच आयोजित होने वाला संयुक्त नौसैनिक अभ्यास है, जो रूस में 13 से 18 अक्टूबर 2026 के बीच चल रहा है। इसमें भारतीय युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और रूसी युद्धपोत अल्दार त्सिदेनझापोव भाग ले रहे हैं।
'इंद्र-2026' अभ्यास के कितने चरण हैं और वे क्या हैं?
अभ्यास दो चरणों में विभाजित है — पहला बंदरगाह चरण (13 अक्टूबर से) और दूसरा समुद्री चरण (16 से 18 अक्टूबर)। बंदरगाह चरण में पेशेवर बातचीत और योजना निर्माण हुआ, जबकि समुद्री चरण में दोनों नौसेनाएँ खुले समुद्र में संयुक्त अभियानों का अभ्यास करेंगी।
आईएनएस सह्याद्रि और रूसी अधिकारियों के बीच क्या बैठक हुई?
आईएनएस सह्याद्रि के प्रतिनिधिमंडल ने रूसी बेड़े की मिश्रित सेनाओं के प्रिमोर्स्की फ्लोटिला के कमांडर वाइस एडमिरल ए. वाई. सिसुएव के साथ औपचारिक बैठक की। इसके साथ ही दोनों युद्धपोतों की संचालन टीमों के बीच एक योजना सम्मेलन भी आयोजित हुआ।
इस अभ्यास का भारत-रूस रक्षा संबंधों में क्या महत्व है?
'इंद्र-2026' दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक रक्षा साझेदारी का हिस्सा है। हाल ही में नई दिल्ली में हुई रक्षा वार्ता में संयुक्त उत्पादन और सैन्य-तकनीकी सहयोग की नई संभावनाओं पर चर्चा हुई थी, और यह अभ्यास उसी दिशा में एक व्यावहारिक कदम है।
यह अभ्यास कब समाप्त होगा और इसके बाद क्या होगा?
यह नौसैनिक अभ्यास 18 अक्टूबर 2026 को समाप्त होगा। समापन के बाद दोनों नौसेनाओं के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान होगा, जो भविष्य की संयुक्त योजनाओं और रक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायक होगा।
राष्ट्र प्रेस
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