आईओएस सागर कोलंबो से कोच्चि रवाना, श्रीलंका नौसेना संग पैसेज एक्सरसाइज पूरी

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आईओएस सागर कोलंबो से कोच्चि रवाना, श्रीलंका नौसेना संग पैसेज एक्सरसाइज पूरी

सारांश

भारतीय नौसेना का बहुराष्ट्रीय युद्धपोत आईओएस सागर तीन दिन कोलंबो में रहने के बाद कोच्चि रवाना हो गया। जाते-जाते श्रीलंका नौसेना के नंदिमित्र के साथ पैसेज एक्सरसाइज हुई। 16 देशों के नौसैनिकों वाला यह मिशन हिंद महासागर में भारत के 'सागर' विजन की सबसे ठोस अभिव्यक्ति है।

मुख्य बातें

आईओएस सागर 18 मई 2025 को कोलंबो से कोच्चि के लिए रवाना हुआ।
रवानगी से पूर्व श्रीलंका नौसेना के युद्धपोत नंदिमित्र के साथ पैसेज एक्सरसाइज संपन्न हुई, जिसमें सामरिक युद्धाभ्यास और संचार ड्रिल शामिल थीं।
जहाज पर 16 देशों के नौसैनिक कर्मी तैनात हैं; यह भारत के 'महासागर' विजन के तहत हिंद महासागर में परिचालन मिशन पर है।
15 मई को कोलंबो पहुँचे इस जहाज पर स्थानीय स्कूली बच्चों, भारतीय समुदाय और श्रीलंकाई नौसेना अधिकारियों के लिए आउटरीच कार्यक्रम आयोजित हुए।
बहुराष्ट्रीय दल ने गॉल और कैंडी का सांस्कृतिक दौरा किया; दोनों नौसेनाओं के बीच मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच भी खेला गया।

भारतीय नौसेना का इंडियन ओशन शिप (आईओएस) सागर 18 मई 2025 को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो से रवाना होकर कोच्चि की ओर बढ़ चुका है। यह युद्धपोत 15 मई को कोलंबो बंदरगाह पहुँचा था और तीन दिवसीय पोर्ट कॉल के बाद प्रस्थान से पूर्व श्रीलंका नौसेना के साथ एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास में भाग लिया। यह मिशन हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के 'महासागर' विजन — यानी पारस्परिक एवं समग्र सुरक्षा और विकास की सोच — को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

पैसेज सैन्य अभ्यास का ब्यौरा

कोलंबो से प्रस्थान के तुरंत बाद आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के युद्धपोत नंदिमित्र के साथ पैसेज एक्सरसाइज संपन्न की। इस अभ्यास में सामरिक युद्धाभ्यास और संचार ड्रिल शामिल थीं, जिनका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच तालमेल, समुद्री संचालन क्षमता और इंटरऑपरेबिलिटी को मज़बूत करना था। गौरतलब है कि श्रीलंकाई जलक्षेत्र में प्रवेश के समय भी श्रीलंका नौसेना के एक युद्धपोत ने आईओएस सागर को एस्कॉर्ट करते हुए बंदरगाह तक पहुँचाया था — जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक समन्वय का प्रतीक है।

कोलंबो प्रवास: वार्ता और आउटरीच

तीन दिवसीय प्रवास के दौरान आईओएस सागर के कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। इन बैठकों में समुद्री सहयोग बढ़ाने, क्षेत्रीय सुरक्षा सुदृढ़ करने और हिंद महासागर में सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। भारतीय जहाज पर आयोजित डेक रिसेप्शन में नौसेना अधिकारियों, राजनयिकों और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया, जिससे बहुराष्ट्रीय नौसैनिक दलों के बीच पेशेवर संबंध और मज़बूत हुए।

सांस्कृतिक और सामुदायिक जुड़ाव

आउटरीच गतिविधियों के तहत आईओएस सागर पर श्रीलंका नौसेना के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय स्कूली बच्चे और भारतीय समुदाय के लोग भी पहुँचे, जिन्होंने जहाज की परिचालन क्षमताओं और नौसैनिक जीवन को करीब से अनुभव किया। श्रीलंका नौसेना और आईओएस सागर के जवानों के बीच मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच भी खेला गया। जहाज के बहुराष्ट्रीय दल ने गॉल और कैंडी शहरों का सांस्कृतिक दौरा कर श्रीलंका की समृद्ध विरासत को जाना।

बहुराष्ट्रीय मिशन का महत्व

उल्लेखनीय है कि आईओएस सागर पर केवल भारतीय नौसैनिक कर्मी नहीं, बल्कि 16 देशों के नौसैनिक कर्मी भी तैनात हैं। यह बहुराष्ट्रीय दल हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन तैनाती मिशन पर है, जो भारत की 'पड़ोसी प्रथम' और 'सागर' नीति की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। यह मिशन हिंद महासागर में साझेदार देशों के बीच समुद्री सहयोग, मित्रता और सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देने की भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। अब आईओएस सागर के कोच्चि पहुँचने के साथ इस महत्वपूर्ण तैनाती का अगला चरण शुरू होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो अब तक कागज़ों पर अधिक रहा है। श्रीलंका के साथ बढ़ता यह समन्वय कोलंबो की 'भारत-संतुलन' नीति में एक सकारात्मक झुकाव दिखाता है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब क्षेत्र में कोई वास्तविक समुद्री संकट आए। 'सागर' विजन की साख इसी पर टिकी है।
RashtraPress
18 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईओएस सागर क्या है और इसका मिशन क्या है?
आईओएस सागर भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत है जो हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन तैनाती मिशन पर है। इस पर 16 देशों के नौसैनिक कर्मी सवार हैं और यह भारत के 'महासागर' विजन — यानी क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक सहयोग — को साकार करने का माध्यम है।
आईओएस सागर और श्रीलंका नौसेना के बीच कौन-सा अभ्यास हुआ?
कोलंबो से रवानगी के बाद आईओएस सागर ने श्रीलंका नौसेना के युद्धपोत नंदिमित्र के साथ पैसेज एक्सरसाइज की। इसमें सामरिक युद्धाभ्यास और संचार ड्रिल शामिल थीं, जिनका मकसद दोनों नौसेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और समुद्री संचालन क्षमता को मज़बूत करना था।
आईओएस सागर कोलंबो कब पहुँचा और कितने दिन रहा?
आईओएस सागर 15 मई 2025 को कोलंबो बंदरगाह पहुँचा और तीन दिवसीय पोर्ट कॉल के बाद 18 मई को कोच्चि के लिए रवाना हुआ। इस दौरान श्रीलंकाई नौसेना के एक युद्धपोत ने इसे बंदरगाह तक एस्कॉर्ट किया था।
कोलंबो प्रवास के दौरान कौन-सी गतिविधियाँ हुईं?
प्रवास के दौरान कमांडिंग ऑफिसर ने श्रीलंका नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और समुद्री सहयोग पर वार्ता हुई। इसके अलावा डेक रिसेप्शन, मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मैच, स्कूली बच्चों और भारतीय समुदाय के लिए जहाज दर्शन, तथा गॉल और कैंडी का सांस्कृतिक दौरा भी आयोजित किया गया।
इस मिशन में 16 देशों की भागीदारी का क्या महत्व है?
आईओएस सागर पर 16 देशों के नौसैनिक कर्मियों की मौजूदगी इसे एक बहुराष्ट्रीय समुद्री सहयोग मंच बनाती है। यह भारत की 'पड़ोसी प्रथम' और 'सागर' नीति को व्यावहारिक रूप देता है और हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा की भावना को मज़बूत करता है।
राष्ट्र प्रेस
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