16 सितंबर 2026
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जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा शुरू: मोर्दविचेव और ओस्माकोव से होगी रक्षा सहयोग पर अहम वार्ता

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जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा शुरू: मोर्दविचेव और ओस्माकोव से होगी रक्षा सहयोग पर अहम वार्ता

सारांश

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ 16 से 18 सितंबर तक रूस दौरे पर हैं। मॉस्को में रूसी आर्मी चीफ मोर्दविचेव और उप रक्षा मंत्री ओस्माकोव से रक्षा उद्योग व सैन्य प्रशिक्षण पर बातचीत होगी। सेंट पीटर्सबर्ग में आर्टिलरी एकेडमी का दौरा दोनों देशों की सैन्य कूटनीति को नई दिशा देने का प्रयास है।

मुख्य बातें

जनरल धीरज सेठ 16 सितंबर 2026 को रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए, जो 18 सितंबर तक जारी रहेगी।
रूसी थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ सैन्य सहयोग और प्रशिक्षण पर द्विपक्षीय वार्ता होगी।
रक्षा उद्योग व खरीद प्रभारी उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव से भी महत्वपूर्ण बैठक निर्धारित है।
मॉस्को में नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर का दौरा और शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
सेंट पीटर्सबर्ग में मिखाइलोव्स्काया सैन्य आर्टिलरी एकेडमी का दौरा सैन्य शिक्षा सहयोग को आगे बढ़ाएगा।

भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ 16 सितंबर 2026 को रूस की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रवाना हुए, जो 18 सितंबर तक जारी रहेगी। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंधों को नई ऊर्जा देना और सेना-से-सेना सहयोग के ठोस क्षेत्रों की पहचान करना है।

मुख्य बैठकें और एजेंडा

यात्रा के दौरान जनरल सेठ रूसी थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस बैठक में पेशेवर सैन्य सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण और आपसी हित के समसामयिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। दोनों सैन्य अधिकारी सहयोग विस्तार के संभावित क्षेत्रों को भी रेखांकित करेंगे।

मॉस्को स्थित नेशनल डिफेंस कंट्रोल सेंटर के दौरे के दौरान जनरल सेठ रूसी रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलेंगे। इनमें रक्षा उद्योग और रक्षा खरीद प्रभार संभालने वाले उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव भी शामिल हैं। रक्षा उद्योग और खरीद से संबंधित यह बैठक भारत-रूस के व्यापक रक्षा-औद्योगिक सहयोग के संदर्भ में विशेष महत्व रखती है।

यात्रा का कार्यक्रम

यात्रा की शुरुआत मॉस्को से होगी, जहाँ थल सेना प्रमुख को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इसके बाद वे शहीद सैनिकों के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे — एक परंपरागत शिष्टाचार जो दोनों देशों के सैन्य-सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।

यात्रा के दूसरे चरण में जनरल सेठ सेंट पीटर्सबर्ग जाएंगे, जहाँ वे मिखाइलोव्स्काया सैन्य आर्टिलरी एकेडमी का दौरा करेंगे। वहाँ अकादमी नेतृत्व और शिक्षकों के साथ बातचीत में सैन्य शिक्षा एवं प्रशिक्षण क्षेत्र में सहयोग के अवसरों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

भारत-रूस रक्षा संबंधों का संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) नीति के तहत रूस के साथ ऐतिहासिक रक्षा साझेदारी को जारी रखते हुए पश्चिमी देशों के साथ भी रक्षा सहयोग का दायरा बढ़ा रहा है। भारत लंबे समय से अपनी रक्षा ज़रूरतों के लिए रूसी उपकरणों पर निर्भर रहा है और दोनों सेनाओं के बीच नियमित संयुक्त अभ्यास इस साझेदारी की निरंतरता को रेखांकित करते हैं।

गौरतलब है कि भारत और रूस के बीच सेना-स्तरीय संपर्क के अंतर्गत थल सेना प्रमुख की यह यात्रा सैन्य कूटनीति की उस परंपरा को आगे बढ़ाती है जो दशकों से चली आ रही है। दोनों देशों के बीच इंद्र जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास इस सहयोग का एक व्यावहारिक आयाम हैं।

आगे क्या

तीन दिवसीय इस दौरे में मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग दोनों स्थानों पर होने वाली बैठकें भारत-रूस सैन्य संबंधों को संस्थागत गहराई देने की दिशा में एक और कदम हैं। प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग और समकालीन सैन्य घटनाक्रमों पर विचारों के आदान-प्रदान से उम्मीद है कि 18 सितंबर 2026 तक यात्रा के समापन पर दोनों पक्षों के बीच आगे के सहयोग का एक रोडमैप तैयार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फ्रांस और इज़राइल के साथ रक्षा सहयोग भी गहरा कर रहा है — जो स्पष्ट करता है कि नई दिल्ली की 'बहु-संरेखण' नीति महज़ कूटनीतिक भाषा नहीं, बल्कि क्रियाशील रणनीति है। रक्षा उद्योग प्रभारी उप मंत्री ओस्माकोव से बैठक का एजेंडे में होना संकेत देता है कि रूसी हथियार प्रणालियों की स्पेयर पार्ट्स आपूर्ति और संयुक्त उत्पादन जैसे व्यावहारिक मुद्दे इस दौरे के असली केंद्र हैं। यूक्रेन संघर्ष की छाया में रूस के साथ इस सक्रिय सैन्य संवाद को लेकर पश्चिमी देशों की निगाहें भारत पर टिकी होंगी — लेकिन भारत की यह स्थिति एक सुचिंतित रणनीतिक स्वायत्तता की अभिव्यक्ति है, न कि किसी एक खेमे का समर्थन।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनरल धीरज सेठ की रूस यात्रा का उद्देश्य क्या है?
यह यात्रा भारत-रूस के बीच सेना-से-सेना संबंधों को मजबूत करने और पेशेवर सैन्य सहयोग, प्रशिक्षण तथा रक्षा उद्योग सहयोग के क्षेत्रों पर विचार-विमर्श के लिए हो रही है। यह भारत की दीर्घकालिक सैन्य कूटनीति का हिस्सा है।
जनरल सेठ रूस में किन अधिकारियों से मिलेंगे?
वे रूसी थल सेना के कमांडर-इन-चीफ कर्नल जनरल आंद्रेई निकोलायेविच मोर्दविचेव और रक्षा उद्योग व खरीद प्रभारी उप रक्षा मंत्री वासिली सर्गेयेविच ओस्माकोव से मुलाकात करेंगे। इसके अलावा रूसी रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से भी बातचीत होगी।
यह यात्रा कितने दिनों की है और किन शहरों में कार्यक्रम हैं?
यह तीन दिवसीय यात्रा 16 से 18 सितंबर 2026 तक चलेगी। यात्रा में मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग दोनों स्थानों पर कार्यक्रम निर्धारित हैं।
सेंट पीटर्सबर्ग में किस संस्थान का दौरा होगा?
जनरल सेठ सेंट पीटर्सबर्ग में मिखाइलोव्स्काया सैन्य आर्टिलरी एकेडमी का दौरा करेंगे। वहाँ वे अकादमी के नेतृत्व और शिक्षकों से सैन्य शिक्षा व प्रशिक्षण सहयोग पर बातचीत करेंगे।
भारत-रूस के बीच सैन्य सहयोग का क्या इतिहास है?
भारत और रूस के बीच दशकों पुराने रक्षा संबंध हैं, जिनमें रूसी रक्षा उपकरणों की आपूर्ति, संयुक्त सैन्य अभ्यास 'इंद्र' और प्रशिक्षण सहयोग शामिल हैं। दोनों सेनाओं के बीच यह नियमित उच्चस्तरीय संवाद इस साझेदारी को संस्थागत आधार देता है।
राष्ट्र प्रेस
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