यूपी चुनाव 2027: रामपुर की पाँच सीटों का समीकरण — उपचुनाव में भाजपा ने आजम खान का गढ़ ध्वस्त किया
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच रामपुर जिले की पाँच विधानसभा सीटों — रामपुर (सदर), स्वार, चमरौआ, बिलासपुर और मिलक (सुरक्षित) — की राजनीतिक तस्वीर काफी उलझी हुई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में इस जिले में भाजपा केवल दो सीटें जीत पाई थी, लेकिन बाद के उपचुनावों में समीकरण पूरी तरह बदल गए और भाजपा व उसके एनडीए सहयोगियों ने सपा का दबदबा तोड़ा।
रामपुर (सदर): आजम खान के किले पर भाजपा का परचम
रामपुर जिले की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट रामपुर (सदर) पर समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान का 10 बार विधायक रहने का रिकॉर्ड रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सपा के टिकट पर 59.72 प्रतिशत मत हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की थी — उन्हें 1,31,225 वोट मिले, जबकि भाजपा के आकाश सक्सेना (हनी) को 76,084 और बसपा के सदाकत हुसैन को 4,940 वोट मिले। आजम खान की जीत का अंतर 55,141 वोट रहा था।
हालाँकि, कानूनी मामलों में सजा के बाद आजम खान की विधायकी रद्द हो गई और उपचुनाव हुआ। उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने सपा के मो. असिम राजा को 34,136 वोटों के अंतर से हराया। सक्सेना को 81,432 वोट मिले, जबकि असिम राजा को 47,296 वोट मिले। यह सीट मुस्लिम-बहुल क्षेत्र मानी जाती है, जहाँ 50 प्रतिशत से अधिक मतदाता मुस्लिम हैं; इसके अलावा वैश्य, पंजाबी, ब्राह्मण, दलित और ओबीसी मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
स्वार: आजम परिवार के बेटे की सदस्यता रद्द, एनडीए ने जीता उपचुनाव
स्वार सीट भी आजम खान परिवार का गढ़ रही है। आजम खान के पुत्र मोहम्मद अब्दुल्ला आजम ने 2017 और 2022 में लगातार दो बार इस सीट से जीत दर्ज की। इस सीट पर 60 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं; सैनी (ओबीसी), दलित, सिख, लोधी, जाट और क्षत्रिय मतदाता भी जीत-हार तय करने में अहम भूमिका रखते हैं।
अब्दुल्ला आजम को भी सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता रद्द हुई और 2023 में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में एनडीए के घटक दल अपना दल (सोनेलाल) के प्रत्याशी शफीक अहमद अंसारी ने सपा की अनुराधा चौहान को 8,724 वोटों के अंतर से हराया। अंसारी को 68,630 और चौहान को 59,906 वोट मिले; पीस पार्टी की नाजिया सिद्दिकी 4,688 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
चमरौआ: सपा का अभेद्य दुर्ग, भाजपा को भारी शिकस्त
चमरौआ विधानसभा सीट पर सपा का 2017 और 2022 दोनों चुनावों में एकाधिकार रहा है। 2022 में सपा के नसीर अहमद खान ने भाजपा के मोहन कुमार लोधी को 34,290 वोटों के भारी अंतर से हराया। नसीर अहमद खान को 1,00,976 वोट मिले, मोहन कुमार लोधी को 66,686 और कांग्रेस के अली यूसूफ अली को 18,213 वोट मिले। यह सीट फिलहाल सपा के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है।
बिलासपुर: केवल 307 वोटों का रोमांचक फासला, भाजपा की सांस अटकाने वाली जीत
बिलासपुर सीट पर 2022 का चुनाव बेहद कड़ा रहा। भाजपा के बलदेव सिंह औलख ने सपा के अमरजीत सिंह को केवल 307 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की। औलख को 1,01,998 और अमरजीत सिंह को 1,01,691 वोट मिले, जबकि बसपा के राम अवतार कश्यप को 18,870 वोट मिले। यहाँ किसी एक जाति का वर्चस्व नहीं है — 30-31 प्रतिशत मुस्लिम, 15-20 प्रतिशत सिख और शेष आबादी में अनुसूचित जाति, मौर्य, सैनी, कश्यप, यादव तथा सवर्ण मतदाता हैं।
मिलक (सुरक्षित): भाजपा की महिला प्रत्याशी की जीत, दलित मतदाता निर्णायक
मिलक (सुरक्षित) सीट पर भाजपा का कब्जा है। 2022 में भाजपा की महिला प्रत्याशी राजबाला सिंह ने सपा के विजय सिंह को 5,912 वोटों के अंतर से पराजित किया। राजबाला सिंह को 97,948 और विजय सिंह को 92,036 वोट मिले; बसपा के सुरेंद्र सिंह सागर को 31,492 वोट मिले। इस सीट पर जाटव दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। मुस्लिम मतदाता, सैनी (ओबीसी), क्षत्रिय और ब्राह्मण मतदाता भी चुनाव की दिशा तय करते हैं।
2027 के लिए क्या है राजनीतिक तस्वीर
रामपुर जिले में 2022 के बाद हुए उपचुनावों ने भाजपा और एनडीए की स्थिति मजबूत की है। रामपुर (सदर) और स्वार — दोनों मुस्लिम-बहुल सीटें — एनडीए के पास हैं, जो 2027 में सपा के लिए बड़ी चुनौती है। वहीं चमरौआ सपा के लिए अभेद्य किले जैसी है। बिलासपुर का 307 वोट का मामूली अंतर इसे सबसे प्रतिस्पर्धी सीट बनाता है। गौरतलब है कि आजम खान और अब्दुल्ला आजम की राजनीतिक वापसी की संभावनाएँ 2027 के समीकरणों पर निर्भर करेंगी।