28 अक्टूबर 2026
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कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी, क्षमता 10 गुना बढ़ने का लक्ष्य

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कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना को मंजूरी दी, क्षमता 10 गुना बढ़ने का लक्ष्य

सारांश

भारत अब शिपिंग कंटेनरों में आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ा — कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ की CMPS को मंजूरी दी, जो 2039-40 तक चलेगी। सालाना क्षमता 10 गुना बढ़कर 7.5 लाख TEU होने और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजन का लक्ष्य है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को मंजूरी दी।
योजना के लिए ₹10,000 करोड़ का बजटीय प्रावधान; वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी।
तीन घटक: ISA (₹859 करोड़) , OEA (₹8,891 करोड़) और परीक्षण-प्रमाणीकरण सुविधाएँ (₹150 करोड़) ।
वार्षिक कंटेनर निर्माण क्षमता 10 गुना बढ़कर 7.5 लाख TEU तक पहुँचने का अनुमान।
लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होने की उम्मीद।
यह योजना पहले केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित की गई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर 2026 को कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) को औपचारिक मंजूरी प्रदान की। ₹10,000 करोड़ के बजटीय प्रावधान वाली यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी और इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत में विश्वस्तरीय कंटेनर निर्माण इकोसिस्टम विकसित करना, आयात पर निर्भरता घटाना तथा देश की समुद्री एवं लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को सुदृढ़ बनाना है।

योजना की मुख्य संरचना

आधिकारिक बयान के अनुसार, CMPS के तहत सरकार तीन प्रमुख घटकों के माध्यम से कंटेनर निर्माताओं को वित्तीय सहायता देगी। पहला घटक इंटरेस्ट सबवेंशन असिस्टेंस (ISA) है, जिसके लिए ₹859 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके तहत नई ग्रीनफील्ड इकाइयों और मौजूदा ब्राउनफील्ड इकाइयों के विस्तार हेतु लिए गए पात्र टर्म लोन पर 3 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।

दूसरा और सबसे बड़ा घटक ऑपरेशनल एक्सपेंडिचर असिस्टेंस (OEA) है, जिसके लिए ₹8,891 करोड़ रखे गए हैं। वैश्विक शिपिंग मानकों के अनुरूप निर्मित और बेचे गए कंटेनरों पर यह सहायता मिलेगी, जिससे घरेलू निर्माताओं की उत्पादन लागत घटेगी और वे अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। तीसरे घटक के अंतर्गत परीक्षण और प्रमाणीकरण सुविधाओं के विकास के लिए ₹150 करोड़ अलग से निर्धारित किए गए हैं, ताकि डायनेमिक लॉन्गिट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग जैसी अत्याधुनिक साझा सुविधाएँ विकसित की जा सकें।

क्षमता विस्तार और रोज़गार सृजन

सरकार के अनुमान के अनुसार, CMPS के क्रियान्वयन के बाद भारत की वार्षिक कंटेनर निर्माण क्षमता में लगभग दस गुना वृद्धि होगी और यह बढ़कर 7.5 लाख TEU तक पहुँच सकती है। यह आँकड़ा न केवल घरेलू माँग को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा, बल्कि भारत को गुणवत्तापूर्ण शिपिंग कंटेनरों के वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने का मार्ग भी प्रशस्त करेगा।

रोज़गार के मोर्चे पर सरकार का अनुमान है कि इस पहल से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष रोज़गार और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार सृजित होंगे। साथ ही कॉर्नर कास्टिंग, विशेष इस्पात, लकड़ी के फ्रेम, पेंट और अन्य सहायक उद्योगों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

रणनीतिक महत्व और पृष्ठभूमि

यह योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित की गई थी और अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ इसे अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। गौरतलब है कि भारत अभी तक अपनी अधिकांश शिपिंग कंटेनर ज़रूरतें आयात के ज़रिये पूरी करता है, जिसमें चीन की हिस्सेदारी सर्वाधिक है। यह योजना ऐसे समय में आई है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि लॉजिस्टिक्स अवसंरचना में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा है।

CMPS नई कंटेनर निर्माण इकाइयों की स्थापना के साथ-साथ मौजूदा इकाइयों के क्षमता विस्तार को भी प्रोत्साहन देगी। इससे देश की समुद्री लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन को दीर्घकालिक मज़बूती मिलेगी और वैश्विक व्यापार में व्यवधान के समय भारत की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी।

आगे की राह

इस योजना के लागू होने से भारत के बंदरगाहों और शिपिंग उद्योग को दीर्घावधि में महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है। अब सभी की नज़र योजना के क्रियान्वयन दिशानिर्देशों और उद्योग की प्रतिक्रिया पर होगी, जो यह तय करेगी कि CMPS अपनी घोषित क्षमता को ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतार पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ की CMPS एक दिशा में सही कदम है, लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — खासकर तब, जब OEA के लिए आवंटित ₹8,891 करोड़ की सहायता 'बेचे गए कंटेनरों' से जुड़ी है, न कि केवल स्थापित क्षमता से। यह ढाँचा सतह पर परिणाम-आधारित लगता है, पर यह स्पष्ट नहीं है कि सत्यापन तंत्र कितना पारदर्शी होगा। चीन की शिपिंग कंटेनर बाज़ार में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी को देखते हुए, 7.5 लाख TEU का लक्ष्य महत्वाकांक्षी ज़रूर है, मगर वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता हासिल करने के लिए विनिर्माण लागत और गुणवत्ता मानकों दोनों मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) क्या है?
CMPS केंद्र सरकार की एक योजना है जिसे 28 अक्टूबर 2026 को कैबिनेट ने ₹10,000 करोड़ के बजट के साथ मंजूरी दी। इसका उद्देश्य भारत में कंटेनर निर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
CMPS के तहत कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी और किन घटकों में बंटी है?
योजना का कुल बजट ₹10,000 करोड़ है, जो तीन घटकों में विभाजित है — ISA के लिए ₹859 करोड़ (3% ब्याज सब्सिडी), OEA के लिए ₹8,891 करोड़ (उत्पादन लागत सहायता) और परीक्षण-प्रमाणीकरण सुविधाओं के लिए ₹150 करोड़।
CMPS से कितने रोज़गार सृजित होंगे?
सरकार के अनुसार इस योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोज़गार पैदा होने की संभावना है। कॉर्नर कास्टिंग, विशेष इस्पात, पेंट और लकड़ी जैसे सहायक उद्योगों को भी लाभ मिलेगा।
CMPS से भारत की कंटेनर निर्माण क्षमता कितनी बढ़ेगी?
सरकार का अनुमान है कि CMPS के लागू होने के बाद भारत की वार्षिक कंटेनर निर्माण क्षमता लगभग 10 गुना बढ़कर 7.5 लाख TEU तक पहुँच सकती है। इससे भारत घरेलू ज़रूरतें पूरी करने के साथ-साथ वैश्विक निर्यात केंद्र भी बन सकता है।
यह योजना कब तक लागू रहेगी और इसकी घोषणा कब हुई थी?
CMPS वित्त वर्ष 2039-40 तक लागू रहेगी। इसकी पहली घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी और 28 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे औपचारिक मंजूरी प्रदान की।
राष्ट्र प्रेस
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