SBI डेटा लीक का दावा: हैकर समूह 'सीरियसिम' ने 3.75 लाख एंट्री और 2,722 दस्तावेज़ हासिल करने का किया दावा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से जुड़ी गोपनीय ग्राहक जानकारी हासिल करने का दावा 'सीरियसिम' नाम के एक अज्ञात हैकर समूह ने किया है। साइबर सुरक्षा निगरानी खाते साइबरपल्स56 ने 16 अक्टूबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दावे को सार्वजनिक किया। कथित तौर पर लीक हुए डेटा में सीएसवी प्रारूप में 3.75 लाख डेटा प्रविष्टियाँ और 2,722 पीडीएफ दस्तावेज़ शामिल बताए जा रहे हैं।
क्या है कथित डेटा लीक का दावा
साइबरपल्स56 के अनुसार, सीरियसिम ने इस सामग्री को अपने 'पहले खुलासे' के रूप में प्रस्तुत किया है। कथित तौर पर लीक हुए डेटासेट में ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी, आवासीय पते, ऋण आवेदन, सहायक दस्तावेज़ और आवेदन-संबंधित अन्य रिकॉर्ड शामिल होने की बात कही गई है।
हालाँकि, रिपोर्ट की गई प्रविष्टियों की संख्या से यह स्पष्ट नहीं है कि कितने व्यक्तिगत ग्राहक वास्तव में प्रभावित हुए होंगे, क्योंकि कई रिकॉर्ड एक ही व्यक्ति से संबंधित हो सकते हैं।
प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं
अब तक इस कथित डेटा लीक की न तो प्रामाणिकता की पुष्टि हो पाई है और न ही यह सिद्ध हुआ है कि दस्तावेज़ सीधे SBI के सिस्टम से आए। कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि बैंक के आंतरिक नेटवर्क में सेंध लगाई गई थी।
20 अक्टूबर 2026 तक SBI ने टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया था, यह बात रिपोर्टों में सामने आई है। यह ऐसे समय में आया है जब केवल किसी समूह का दावा यह साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होता कि किसी संस्था के सिस्टम में वास्तव में सेंधमारी हुई।
संभावित खतरे और चेतावनी
साइबरपल्स56 ने चेतावनी दी है कि यदि यह डेटासेट प्रामाणिक साबित होते हैं, तो इनका दुरुपयोग पहचान की चोरी, वित्तीय धोखाधड़ी, लक्षित फिशिंग हमलों और फर्जी ऋण आवेदनों के लिए किया जा सकता है।
गौरतलब है कि यह आरोप भारत के वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है, जहाँ पिछले कुछ वर्षों में कई बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं को साइबर हमलों का सामना करना पड़ा है।
RBI की साइबर सुरक्षा पहल
इस वर्ष की शुरुआत में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वाणिज्यिक बैंकों के लिए साइबर सुरक्षा आवश्यकताओं को सख्त बना दिया, जो डिजिटल खतरों के विरुद्ध बैंकिंग प्रणाली को मज़बूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। यह कदम इस बात का संकेत है कि नियामक स्तर पर भी साइबर जोखिम को गंभीरता से लिया जा रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल SBI की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जब तक बैंक या स्वतंत्र साइबर विशेषज्ञ इस दावे की जाँच नहीं करते, तब तक इसे 'कथित' ही माना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में SBI की प्रतिक्रिया और सरकारी एजेंसियों की जाँच इस मामले की दिशा तय करेगी।