नसीरुद्दीन शाह के 'दिमागी नक्सली' बयान पर सियासत गरम, BJP ने साधा निशाना, JMM ने किया बचाव
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में खुद को 'दिमागी नक्सली' कहने के बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अभिनेता के पक्ष में खड़े होकर उनका समर्थन किया है। यह विवाद 30 अक्टूबर को उस समय और गहरा गया जब दोनों दलों के प्रवक्ताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।
नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था
नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने कहा, 'मैं गर्व से कहता हूँ कि मैं दिमागी नक्सली हूँ।' इस वीडियो में उन्होंने केंद्र सरकार पर युवाओं की हिम्मत तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने और लोकतंत्र को खतरे में डालने के आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने उन आलोचकों पर पलटवार किया जो उन्हें 'एंटी-नेशनल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे संबोधन देते रहे हैं।
BJP का पलटवार
BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'देखिए, भारत में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और नसीरुद्दीन शाह कोई अकेले व्यक्ति तो हैं नहीं, जो सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं। वे अपने आपको नक्सली कह रहे हैं, उस पर मैं बस यही कहना चाहूँगा कि अमित शाह ने देश में नक्सलवाद खत्म करने का फैसला किया है। अगर नक्सली खत्म होंगे, तो उसमें ये श्रीमान जी का खात्मा भी होगा।'
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने और भी कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उन्हें अपना इलाज करवाना चाहिए। वह सिलेक्टिव बोलते हैं — जब बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार थी और बहनों के साथ अत्याचार हो रहे थे, उस पर उन्होंने कभी कुछ नहीं बोला। मुझे लगता है कि उन्हें किसी दिमागी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।' BJP के इस आक्रामक रुख को अभिनेता के बयान के विरुद्ध पार्टी की केंद्रीय सोच का हिस्सा माना जा रहा है।
JMM का समर्थन
JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने नसीरुद्दीन शाह के बचाव में उतरते हुए कहा, 'आज देश का हर जागरूक इंसान नक्सली है। जब आदिवासी आवाज़ उठाता है, तो वह नक्सली हो जाता है। सिख आवाज़ उठाते हैं, तो वे खालिस्तानी हो जाते हैं। कोई बुद्धिजीवी बोले तो वो भी नक्सली हो जाता है। तो ये अपनी परिभाषा अपने पास रखें। देश के लिए लड़ने वाला, जीने वाला व्यक्ति आज इनके खिलाफ खड़ा है।' पांडे की यह टिप्पणी विपक्षी दलों के उस व्यापक आख्यान से मेल खाती है जो असहमति की आवाज़ों पर 'देशद्रोही' का लेबल लगाए जाने की आलोचना करती है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि नसीरुद्दीन शाह पहले भी कई बार सरकारी नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं और उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की राजनीति को लेकर बहस पहले से ही तेज़ है। झारखंड में विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र JMM का यह समर्थन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या
फिलहाल, नसीरुद्दीन शाह की ओर से BJP की प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख को मज़बूती से पेश किया है।