30 अक्टूबर 2026
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नसीरुद्दीन शाह के 'दिमागी नक्सली' बयान पर सियासत गरम, BJP ने साधा निशाना, JMM ने किया बचाव

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नसीरुद्दीन शाह के 'दिमागी नक्सली' बयान पर सियासत गरम, BJP ने साधा निशाना, JMM ने किया बचाव

सारांश

नसीरुद्दीन शाह का 'दिमागी नक्सली' वाला बयान महज़ एक अभिनेता की टिप्पणी नहीं रहा — यह तत्काल राजनीतिक युद्धक्षेत्र बन गया। BJP ने व्यंग्यात्मक हमला बोला, JMM ने इसे असहमति की वैध आवाज़ बताया। यह टकराव उस गहरी दरार को उजागर करता है जो बुद्धिजीवी असहमति और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच बनी हुई है।

मुख्य बातें

नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया वीडियो में कहा, 'मैं गर्व से कहता हूँ कि मैं दिमागी नक्सली हूँ' — साथ ही केंद्र सरकार पर युवाओं और लोकतंत्र को नुकसान पहुँचाने के आरोप लगाए।
BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने देश से नक्सलवाद खत्म करने का फैसला किया है, और इस बयान को उसी दायरे में रखा।
BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने अभिनेता पर 'सिलेक्टिव' बोलने का आरोप लगाते हुए उन्हें चिकित्सीय सहायता लेने की नसीहत दी।
JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने नसीरुद्दीन शाह का खुलकर समर्थन किया और कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले हर व्यक्ति को 'नक्सली' या 'खालिस्तानी' बताना गलत है।
यह विवाद झारखंड चुनावों के करीब ऐसे समय उभरा है जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर राष्ट्रीय बहस पहले से तेज़ है।

वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में खुद को 'दिमागी नक्सली' कहने के बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अभिनेता के पक्ष में खड़े होकर उनका समर्थन किया है। यह विवाद 30 अक्टूबर को उस समय और गहरा गया जब दोनों दलों के प्रवक्ताओं ने एक-दूसरे पर तीखे हमले किए।

नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था

नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने कहा, 'मैं गर्व से कहता हूँ कि मैं दिमागी नक्सली हूँ।' इस वीडियो में उन्होंने केंद्र सरकार पर युवाओं की हिम्मत तोड़ने, शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुँचाने और लोकतंत्र को खतरे में डालने के आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने उन आलोचकों पर पलटवार किया जो उन्हें 'एंटी-नेशनल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे संबोधन देते रहे हैं।

BJP का पलटवार

BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'देखिए, भारत में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और नसीरुद्दीन शाह कोई अकेले व्यक्ति तो हैं नहीं, जो सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं। वे अपने आपको नक्सली कह रहे हैं, उस पर मैं बस यही कहना चाहूँगा कि अमित शाह ने देश में नक्सलवाद खत्म करने का फैसला किया है। अगर नक्सली खत्म होंगे, तो उसमें ये श्रीमान जी का खात्मा भी होगा।'

BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने और भी कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि उन्हें अपना इलाज करवाना चाहिए। वह सिलेक्टिव बोलते हैं — जब बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार थी और बहनों के साथ अत्याचार हो रहे थे, उस पर उन्होंने कभी कुछ नहीं बोला। मुझे लगता है कि उन्हें किसी दिमागी डॉक्टर को दिखाना चाहिए।' BJP के इस आक्रामक रुख को अभिनेता के बयान के विरुद्ध पार्टी की केंद्रीय सोच का हिस्सा माना जा रहा है।

JMM का समर्थन

JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने नसीरुद्दीन शाह के बचाव में उतरते हुए कहा, 'आज देश का हर जागरूक इंसान नक्सली है। जब आदिवासी आवाज़ उठाता है, तो वह नक्सली हो जाता है। सिख आवाज़ उठाते हैं, तो वे खालिस्तानी हो जाते हैं। कोई बुद्धिजीवी बोले तो वो भी नक्सली हो जाता है। तो ये अपनी परिभाषा अपने पास रखें। देश के लिए लड़ने वाला, जीने वाला व्यक्ति आज इनके खिलाफ खड़ा है।' पांडे की यह टिप्पणी विपक्षी दलों के उस व्यापक आख्यान से मेल खाती है जो असहमति की आवाज़ों पर 'देशद्रोही' का लेबल लगाए जाने की आलोचना करती है।

व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि नसीरुद्दीन शाह पहले भी कई बार सरकारी नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं और उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की राजनीति को लेकर बहस पहले से ही तेज़ है। झारखंड में विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र JMM का यह समर्थन राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आगे क्या

फिलहाल, नसीरुद्दीन शाह की ओर से BJP की प्रतिक्रिया पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इस विवाद के और गहराने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्षों ने अपने-अपने रुख को मज़बूती से पेश किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। 'दिमागी नक्सली' वाला कोण असहमति को अपराध बताने की उस भाषा को सीधे चुनौती देता है जो हाल के वर्षों में मुख्यधारा में आई है। मुख्यधारा की कवरेज इस बहस को 'BJP बनाम फिल्मी सितारे' तक सीमित कर देती है, जबकि असली सवाल यह है कि राजनीतिक लेबलिंग की यह संस्कृति बुद्धिजीवी विमर्श को किस हद तक संकुचित कर रही है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नसीरुद्दीन शाह ने 'दिमागी नक्सली' क्यों कहा?
नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में कहा कि वे 'गर्व से दिमागी नक्सली' हैं। यह बयान उन्होंने उन आलोचकों को जवाब देते हुए दिया जो उन्हें 'एंटी-नेशनल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे नामों से बुलाते रहे हैं। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर युवाओं की हिम्मत तोड़ने और लोकतंत्र को कमज़ोर करने का आरोप लगाया।
BJP ने नसीरुद्दीन शाह के बयान पर क्या कहा?
BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया है और इस बयान को उसी संदर्भ में रखा। BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने अभिनेता पर 'सिलेक्टिव' बोलने का आरोप लगाते हुए उन्हें चिकित्सीय सहायता लेने की नसीहत दी।
JMM ने नसीरुद्दीन शाह का समर्थन क्यों किया?
JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि सरकार के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति — चाहे आदिवासी हो, सिख हो या बुद्धिजीवी — को 'नक्सली' या 'खालिस्तानी' बताना गलत है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को एक जागरूक नागरिक की आवाज़ बताया।
इस विवाद का राजनीतिक महत्व क्या है?
यह विवाद झारखंड विधानसभा चुनावों के निकट ऐसे समय में उभरा है जब असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर राष्ट्रीय बहस गर्म है। BJP और JMM की परस्पर विरोधी प्रतिक्रियाएँ राजनीतिक ध्रुवीकरण को और गहरा कर सकती हैं।
नसीरुद्दीन शाह पहले भी विवादों में रहे हैं?
हाँ, नसीरुद्दीन शाह पहले भी सरकारी नीतियों, सामाजिक मुद्दों और राष्ट्रवाद की परिभाषा को लेकर अपने बेबाक बयानों के कारण सुर्खियों में रहे हैं। उनके बयानों पर हर बार राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ हुई हैं।
राष्ट्र प्रेस
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