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भारत का 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी लक्ष्य: एसोचैम ने COP31 से पहले ₹2.5 ट्रिलियन निवेश की पुकार लगाई

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भारत का 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी लक्ष्य: एसोचैम ने COP31 से पहले ₹2.5 ट्रिलियन निवेश की पुकार लगाई

सारांश

भारत ने 2030 का जलवायु लक्ष्य पाँच साल पहले पार कर लिया — गैर-जीवाश्म क्षमता 300.5 गीगावाट। लेकिन एसोचैम की चेतावनी है: 500 गीगावाट की असली जंग अभी बाकी है, और उसके लिए 2.5 ट्रिलियन डॉलर का इंतजाम तथा ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती ज़रूरी है।

मुख्य बातें

जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली क्षमता 300.5 गीगावाट तक पहुँची, जो 2030 के लक्ष्य से पाँच साल पहले है।
वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट की नई क्षमता जोड़ी गई।
कुल बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक हुई।
2030 के जलवायु लक्ष्यों के लिए लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता: एसोचैम अध्यक्ष निर्मल के.
बैटरी स्टोरेज माँग 2027 में 37 GWh से बढ़कर 2031-32 तक 236 GWh होने का अनुमान।
एसोचैम की रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग को सौंपी जाएगी।

भारत को अपना 500 गीगावाट का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने के लिए जलवायु निवेश, अनुकूलन वित्त, प्रौद्योगिकी सहयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्राथमिकता देनी होगी — यह बात उद्योग मंडल एसोचैम (ASSOCHAM) ने 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में तुर्किए में होने वाले COP31 क्लाइमेट समिट से पहले जारी एक बयान में कही। गौरतलब है कि भारत पहले ही कई महत्वपूर्ण जलवायु मील के पत्थर निर्धारित समय से काफी पहले पार कर चुका है।

भारत की क्लीन एनर्जी क्षमता में ऐतिहासिक उछाल

एसोचैम के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट की वृद्धि के साथ, जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 300.5 गीगावाट तक पहुँच गई है। यह संख्या इसलिए विशेष है क्योंकि भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक कर ली है — और यह उपलब्धि 2030 के निर्धारित लक्ष्य से पाँच साल पहले ही हासिल हुई है।

एसोचैम अध्यक्ष का बयान

एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, 'देश ने यह साबित कर दिया है कि एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था स्वच्छ ऊर्जा को बड़े पैमाने पर अपना सकती है। भारत ने तय समय से पाँच साल पहले ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि COP31 में ध्यान अब अमल पर केंद्रित होना चाहिए, जिसमें उद्योग जगत की प्रमुख भूमिका हो।

वित्त और भंडारण की ज़रूरत

मिंडा ने बताया कि भारत के 2030 के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, बैटरी स्टोरेज की माँग 2027 तक 37 गीगावाट घंटा से बढ़कर 2031-32 तक 236 गीगावाट घंटा तक पहुँचने का अनुमान है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रिड स्थिरता और बिजली की भरोसेमंद आपूर्ति देशभर में एक चुनौती बनी हुई है।

उद्योग मंडल ने स्पष्ट किया कि स्थापित क्षमता को वास्तविक और भरोसेमंद बिजली में बदलने के लिए ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था करना और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक स्वच्छ ऊर्जा समाधान विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।

सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

एसोचैम ने घोषणा की है कि वह अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग और जलवायु कार्य से जुड़े अन्य संबंधित समूहों को सौंपेगा। इस रिपोर्ट में जलवायु वित्त जुटाने, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाने और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को निवेश तथा क्रियान्वयन में परिवर्तित करने के लिए व्यावहारिक सुझाव शामिल होंगे।

आगे की राह

यह पहल ऐसे वक्त में सामने आई है जब दुनियाभर के देश COP31 के लिए अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को परखने की तैयारी कर रहे हैं। भारत के लिए अगला बड़ा पड़ाव 500 गीगावाट का लक्ष्य पाना है, जिसके लिए वित्त, तकनीक और औद्योगिक नीति — तीनों मोर्चों पर ठोस कदम उठाने होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्षमता और भरोसेमंद आपूर्ति के बीच की खाई इस कहानी का वह पहलू है जो अक्सर अनदेखा रह जाता है। स्थापित क्षमता के आँकड़े चमकते हैं, मगर ग्रिड अस्थिरता, भंडारण की कमी और अंतर-राज्यीय बिजली वितरण की पेचीदगियाँ उपभोक्ताओं तक स्वच्छ बिजली पहुँचाने में बाधा बनी हुई हैं। 2.5 ट्रिलियन डॉलर की माँग भी तब तक सार्थक नहीं होगी जब तक घरेलू जलवायु वित्त तंत्र और अंतरराष्ट्रीय सहायता के बीच एक स्पष्ट, जवाबदेह रोडमैप न बने।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी लक्ष्य क्या है?
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता स्थापित करना है, जो देश की जलवायु प्रतिबद्धताओं का हिस्सा है। जुलाई 2026 तक 300.5 गीगावाट क्षमता हासिल हो चुकी है, अर्थात अभी लगभग 200 गीगावाट और जोड़ना बाकी है।
एसोचैम ने COP31 से पहले किन बातों पर जोर दिया है?
एसोचैम ने जलवायु निवेश, अनुकूलन वित्त, प्रौद्योगिकी सहयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्राथमिकता देने की बात कही है। उद्योग मंडल का कहना है कि COP31 में अमल पर ध्यान दिया जाना चाहिए जिसमें उद्योग जगत की सक्रिय भूमिका हो।
भारत के 2030 जलवायु लक्ष्यों के लिए कितने निवेश की ज़रूरत है?
एसोचैम अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा के अनुसार, भारत के 2030 के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। यह राशि ग्रिड विस्तार, स्टोरेज और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन सहित कई क्षेत्रों में लगानी होगी।
भारत में बैटरी स्टोरेज की माँग कितनी बढ़ने का अनुमान है?
एसोचैम के अनुसार, बैटरी स्टोरेज की माँग 2027 तक 37 गीगावाट घंटा से बढ़कर 2031-32 तक 236 गीगावाट घंटा तक पहुँचने का अनुमान है। यह वृद्धि नवीकरणीय ऊर्जा की रुक-रुककर आपूर्ति की समस्या से निपटने के लिए जरूरी मानी जा रही है।
एसोचैम की रिपोर्ट सरकार को कब सौंपी जाएगी?
एसोचैम ने घोषणा की है कि वह यह रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग और जलवायु कार्य से जुड़े संबंधित समूहों को सौंपेगा, हालाँकि सटीक तारीख का उल्लेख नहीं किया गया है। रिपोर्ट में जलवायु वित्त जुटाने और औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के व्यावहारिक सुझाव होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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