भारत का 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी लक्ष्य: एसोचैम ने COP31 से पहले ₹2.5 ट्रिलियन निवेश की पुकार लगाई
सारांश
मुख्य बातें
भारत को अपना 500 गीगावाट का नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने के लिए जलवायु निवेश, अनुकूलन वित्त, प्रौद्योगिकी सहयोग और औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को प्राथमिकता देनी होगी — यह बात उद्योग मंडल एसोचैम (ASSOCHAM) ने 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में तुर्किए में होने वाले COP31 क्लाइमेट समिट से पहले जारी एक बयान में कही। गौरतलब है कि भारत पहले ही कई महत्वपूर्ण जलवायु मील के पत्थर निर्धारित समय से काफी पहले पार कर चुका है।
भारत की क्लीन एनर्जी क्षमता में ऐतिहासिक उछाल
एसोचैम के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 55.29 गीगावाट की वृद्धि के साथ, जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता 300.5 गीगावाट तक पहुँच गई है। यह संख्या इसलिए विशेष है क्योंकि भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता में गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत से अधिक कर ली है — और यह उपलब्धि 2030 के निर्धारित लक्ष्य से पाँच साल पहले ही हासिल हुई है।
एसोचैम अध्यक्ष का बयान
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा, 'देश ने यह साबित कर दिया है कि एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था स्वच्छ ऊर्जा को बड़े पैमाने पर अपना सकती है। भारत ने तय समय से पाँच साल पहले ही अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का आधे से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि COP31 में ध्यान अब अमल पर केंद्रित होना चाहिए, जिसमें उद्योग जगत की प्रमुख भूमिका हो।
वित्त और भंडारण की ज़रूरत
मिंडा ने बताया कि भारत के 2030 के जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी। इसके अतिरिक्त, बैटरी स्टोरेज की माँग 2027 तक 37 गीगावाट घंटा से बढ़कर 2031-32 तक 236 गीगावाट घंटा तक पहुँचने का अनुमान है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रिड स्थिरता और बिजली की भरोसेमंद आपूर्ति देशभर में एक चुनौती बनी हुई है।
उद्योग मंडल ने स्पष्ट किया कि स्थापित क्षमता को वास्तविक और भरोसेमंद बिजली में बदलने के लिए ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना, पर्याप्त भंडारण की व्यवस्था करना और व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक स्वच्छ ऊर्जा समाधान विकसित करना अत्यंत आवश्यक है।
सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
एसोचैम ने घोषणा की है कि वह अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय, नीति आयोग और जलवायु कार्य से जुड़े अन्य संबंधित समूहों को सौंपेगा। इस रिपोर्ट में जलवायु वित्त जुटाने, औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन में तेजी लाने और भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं को निवेश तथा क्रियान्वयन में परिवर्तित करने के लिए व्यावहारिक सुझाव शामिल होंगे।
आगे की राह
यह पहल ऐसे वक्त में सामने आई है जब दुनियाभर के देश COP31 के लिए अपनी जलवायु महत्वाकांक्षाओं को परखने की तैयारी कर रहे हैं। भारत के लिए अगला बड़ा पड़ाव 500 गीगावाट का लक्ष्य पाना है, जिसके लिए वित्त, तकनीक और औद्योगिक नीति — तीनों मोर्चों पर ठोस कदम उठाने होंगे।