तृणमूल नेता अजीत महता गिरफ्तार, सरकारी नौकरी के नाम पर ₹10 लाख की ठगी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
झारग्राम जिले के गोपीबल्लभपुर से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी अजीत महता को 30 अक्टूबर 2026 को झारग्राम पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक स्थानीय निवासी को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा करके ₹10 लाख कई किश्तों में वसूले, लेकिन न नौकरी दी और न पैसे लौटाए। पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने धमकी मिलने का भी दावा किया है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
झारग्राम जिले के स्थानीय निवासी सजल दास ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि अजीत महता ने उन्हें सरकारी दफ्तर में नौकरी दिलाने का वादा किया और इसके बदले कुछ समय के दौरान कई किश्तों में लगभग ₹10 लाख लिए। दास का कहना है कि पैसे चुकाने के बाद भी उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली।
जब सजल दास ने महता से नौकरी दिलाने या रकम वापस करने की माँग की, तो उन्हें कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। इसी धमकी के बाद दास ने झारग्राम थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, झारग्राम थाने में अजीत महता के खिलाफ पहले से कई शिकायतें दर्ज थीं, लेकिन वे लंबे समय तक गिरफ्तारी से बचते रहे। ताजा शिकायत पर संज्ञान लेते हुए, झारग्राम पुलिस ने गुरुवार देर रात एक विशेष अभियान चलाया और महता को उनके घर से हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी को शुक्रवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। जाँच अधिकारियों ने आगे की पूछताछ और आरोपों की विस्तृत जाँच के लिए 14 दिन की पुलिस हिरासत की माँग करने का निर्णय लिया है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
अजीत महता को झारग्राम जिले में एक प्रभावशाली राजनीतिक चेहरा माना जाता था। उन्होंने इस वर्ष की शुरुआत में गोपीबल्लभपुर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार राजेश महता से बड़े अंतर से पराजित हो गए।
यह भी आरोप लगाया गया है कि सत्ताधारी पार्टी से जुड़े होने के कारण पूर्व में उनके खिलाफ शिकायतों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में नौकरी के नाम पर ठगी के मामले राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। गौरतलब है कि राज्य में सरकारी नियुक्तियों से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जाँच विभिन्न एजेंसियाँ पहले से कर रही हैं। इस गिरफ्तारी से स्थानीय राजनीति में हलचल मचने की आशंका है।
आगे क्या होगा
अदालत में पेशी के बाद हिरासत की अवधि तय होगी। पुलिस यह भी जाँच कर रही है कि क्या महता के खिलाफ दर्ज पुरानी शिकायतों में और पीड़ित सामने आते हैं। विपक्षी दलों ने इस गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य में सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर जवाबदेही तय करने की माँग की है।