बंगाल: नौकरी के नाम पर ठगी, तृणमूल की पूर्व पंचायत प्रमुख बसंती बिस्वास गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर स्थित चारघाट पंचायत की तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्व पंचायत प्रमुख बसंती बिस्वास को 5 अक्टूबर 2026 को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर आर्थिक धोखाधड़ी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। उनके पति निखिल रंजन बिस्वास इसी मामले में 12 सितंबर को गिरफ्तार होकर पहले से न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस के अनुसार बसंती को बशीरहाट सब-डिविजनल कोर्ट में पेश किया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के शासनकाल के दौरान बसंती बिस्वास और उनके पति निखिल रंजन बिस्वास ने स्वरूपनगर के मजार अली समेत कई बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का वादा कर उनसे कथित तौर पर लाखों रुपए वसूले। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्होंने 2023 में यह रकम दी थी, परंतु न कोई नौकरी मिली और न ही पैसे वापस हुए।
जब पीड़ितों ने अपनी राशि वापस माँगी, तो बिस्वास दंपत्ति ने कथित तौर पर उन्हें धमकी दी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि तत्कालीन सत्ता में TMC के होने के कारण पहले कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार बदलने के बाद न्याय की आस
राज्य में सरकार बदलने के बाद पीड़ितों ने स्थानीय पुलिस थाने में कई शिकायतें दर्ज कराईं। इसके अलावा, मजार अली समेत कई शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री की जनसुनवाई में पहुँचे और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराया।
मुख्यमंत्री ने मामला सुनने के बाद प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद यह गिरफ्तारी संभव हो सकी। यह मामला उन पीड़ितों के लिए न्याय की एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है जो वर्षों से इंतजार में थे।
शिकायतकर्ता और भाजपा की प्रतिक्रिया
गिरफ्तारी के बाद मजार अली ने बताया कि बसंती बिस्वास पहले आईसीडीएस कर्मचारी थीं और बाद में तृणमूल पंचायत प्रमुख बनीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बसंती ने करोड़ों रुपए की संपत्ति इकट्ठा की और बेरोजगार युवाओं को ठगा। अली ने यह भी कहा कि इस धोखाधड़ी गिरोह में कुछ और लोग भी शामिल हैं और उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता वृंदाबन सरकार ने कहा कि बसंती बिस्वास की गिरफ्तारी ने स्थानीय लोगों में एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अब कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
मुख्य आरोप और कानूनी स्थिति
पुलिस के अनुसार, बसंती बिस्वास पर जबरन वसूली और आर्थिक धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। उनके पति निखिल रंजन बिस्वास को 12 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था और वे अभी तक न्यायिक हिरासत में हैं। गौरतलब है कि यह मामला उत्तर बंगाल में पंचायत-स्तरीय भ्रष्टाचार की एक लंबी श्रृंखला का हिस्सा बताया जा रहा है।
आगे क्या होगा
पुलिस ने संकेत दिया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। शिकायतकर्ताओं ने माँग की है कि धोखाधड़ी में शामिल अन्य आरोपियों पर भी जल्द कार्रवाई हो। अदालती सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा कि बसंती बिस्वास को जमानत मिलती है या वे न्यायिक हिरासत में रहेंगी।