तेलंगाना सूखा संकट: 28 अक्टूबर को सर्वदलीय बैठक, उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क करेंगे अध्यक्षता
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना सरकार ने राज्य में कम वर्षा और अल नीनो के प्रभाव से उत्पन्न सूखे की गंभीर स्थिति पर विचार-विमर्श के लिए 28 अक्टूबर 2026 को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह बैठक हैदराबाद स्थित डॉ. बीआर अंबेडकर तेलंगाना राज्य सचिवालय की छठी मंजिल पर कमरा नंबर 33 में दोपहर 2:30 बजे आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता राज्य के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क करेंगे।
बैठक के मुख्य एजेंडा बिंदु
इस सर्वदलीय बैठक में मुख्य रूप से चार अहम मुद्दों पर चर्चा होगी — पीने के पानी की किल्लत से बचाव, जल संसाधनों का संरक्षण, कृषि के लिए पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना और वैकल्पिक फसल योजनाओं का निर्माण। सरकार विपक्षी दलों से इन बिंदुओं पर सुझाव और सिफारिशें माँगेगी।
गौरतलब है कि इस बैठक के जरिए तेलंगाना सरकार का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों को एक साझा मंच पर लाकर रचनात्मक परामर्श से एक समन्वित रणनीति तैयार करना है, जो किसानों और आम नागरिकों को राहत दे सके।
सूखे और अल नीनो की स्थिति
राज्य में इस मौसम में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे कई जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो अल नीनो के प्रभाव से आने वाले समय में स्थिति और विकट होने की आशंका है। यह ऐसे समय में आया है जब किसान रबी फसल की तैयारियों में जुटे हैं और पानी की कमी उनकी बुवाई योजनाओं पर सीधा असर डाल सकती है।
आंकड़ों के अनुसार, कम वर्षा के कारण राज्य के कई जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे बना हुआ है, जिससे न केवल खेती बल्कि नगरीय पेयजल आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ रहा है।
सरकार की रणनीति और विपक्ष से अपेक्षाएँ
तेलंगाना सरकार का स्पष्ट संदेश है कि सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए राजनीतिक मतभेदों को परे रखना होगा। सरकार चाहती है कि सभी दल मिलकर एक सर्वसम्मत कार्य योजना बनाएँ जो किसानों, पशुपालकों और शहरी उपभोक्ताओं — सभी को राहत दे।
यह तेलंगाना में किसी प्राकृतिक संकट पर बुलाई गई पहली बड़ी सर्वदलीय बैठक नहीं है, लेकिन अल नीनो के संदर्भ में इसका दायरा पहले से अधिक व्यापक बताया जा रहा है। सरकार नहीं चाहती कि स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट में तब्दील हो।
आम जनता और किसानों पर असर
सूखे की स्थिति का सबसे सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है। वैकल्पिक फसल योजनाएँ और कृषि बिजली की निर्बाध आपूर्ति किसानों की तात्कालिक जरूरत है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता है।
28 अक्टूबर की बैठक के बाद सरकार एक ठोस कार्ययोजना जारी करने की तैयारी में है, जिसमें जिलेवार राहत उपायों का खाका भी शामिल होने की संभावना है।