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फल्गु नदी कायाकल्प: गया जिला प्रशासन की पहल, 123 बोरवेल से भूजल रिचार्ज और पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार

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फल्गु नदी कायाकल्प: गया जिला प्रशासन की पहल, 123 बोरवेल से भूजल रिचार्ज और पौधरोपण की कार्ययोजना तैयार

सारांश

बिहार के गया जिले में फल्गु नदी के संरक्षण की पहल तेज़ हुई है — 123 खराब बोरवेल को रिचार्ज बोरवेल में बदला जाएगा, दोनों किनारों पर पौधरोपण होगा और पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जाएगा। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने इसे प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है।

मुख्य बातें

गया जिला प्रशासन ने फल्गु नदी के कायाकल्प के लिए बहु-विभागीय कार्ययोजना शुरू की।
जल संसाधन विभाग ने गया, बोधगया और डोभी में 123 खराब बोरवेल चिह्नित किए — इन्हें वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित किया जाएगा।
नदी के दोनों किनारों पर पाँच-पाँच किलोमीटर के दायरे में जल संरक्षण संभावनाओं का आकलन होगा।
सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और जलजमाव स्थलों पर सोख्ता निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
लघु सिंचाई विभाग को आहर, पोखर और पइन का भौतिक निरीक्षण कर पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन पर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश।
जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने फल्गु नदी संरक्षण को प्रशासन की प्राथमिकता घोषित किया।

बिहार के गया जिला प्रशासन ने फल्गु नदी के कायाकल्प और जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस पहल तेज कर दी है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा करने, जल संरक्षण को प्रोत्साहन देने और आसपास के क्षेत्रों में लगातार गिरते भूजल स्तर को सुधारने के उद्देश्य से एक बहु-आयामी कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके तहत नदी के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण, खराब बोरवेल को वाटर रिचार्ज बोरवेल में परिवर्तित करने और पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन का खाका खींचा जा रहा है।

समीक्षा बैठक और प्रशासनिक निर्देश

जिलाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में हाल ही में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें फल्गु नदी के जीर्णोद्धार और जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर संबंधित विभागों को क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने और आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन की योजना है कि गया जिले में फल्गु नदी के दोनों किनारों का विस्तृत सर्वेक्षण कराकर पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थलों को चिह्नित किया जाए। इसके लिए वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और संबंधित अंचलों के पदाधिकारी संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण करेंगे।

123 बोरवेल और भूजल रिचार्ज की योजना

भूजल स्तर में सुधार के लिए विशेष पहल की जा रही है। जल संसाधन विभाग ने गया, बोधगया और डोभी क्षेत्र में कुल 123 खराब बोरवेल चिह्नित किए हैं। इन्हें वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि वर्षा जल का उपयोग भूजल पुनर्भरण के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सके।

नदी के दोनों किनारों पर पाँच-पाँच किलोमीटर के दायरे में जल संरक्षण की संभावनाओं का भी आकलन किया जाएगा। गौरतलब है कि फल्गु नदी बेसिन में तेज़ी से घटता भूजल स्तर कृषि और पेयजल आपूर्ति दोनों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोख्ता निर्माण

जलजमाव वाले स्थानों पर सोख्ता निर्माण और बड़े सरकारी भवनों एवं प्रमुख प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ज़ोर दिया गया है। इससे वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन

लघु सिंचाई विभाग को संबंधित क्षेत्र में मौजूद आहर, पोखर और पइन का भौतिक निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन अथवा नए निर्माण की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में भूजल की अत्यधिक निकासी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।

जिलाधिकारी का आश्वासन

जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने कहा, 'फल्गु नदी का संरक्षण और कायाकल्प प्रशासन की प्राथमिकता है। नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने के साथ आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। हमारा प्रयास है कि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो और फल्गु नदी के आसपास जल संरक्षण की व्यवस्था मज़बूत बने।'

संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। अब देखना यह होगा कि पर्यावरण संरक्षण की यह महत्वाकांक्षी रूपरेखा कितनी शीघ्रता और प्रभावशीलता के साथ ज़मीन पर उतरती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बिहार में नदी पुनर्जीवन की घोषणाओं और ज़मीनी अमल के बीच की खाई एक जानी-पहचानी कहानी है। 123 बोरवेल को रिचार्ज में बदलने और आहर-पोखर के पुनर्जीवन की रूपरेखा तो बन गई है, परंतु इन योजनाओं के लिए न समय-सीमा घोषित की गई है, न बजट का स्पष्ट उल्लेख है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या विभिन्न विभागों का यह समन्वय केवल समीक्षा बैठकों तक सीमित रहेगा या नदी किनारे बसे किसानों और स्थानीय निवासियों को वास्तव में राहत मिलेगी।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फल्गु नदी कायाकल्प योजना क्या है?
गया जिला प्रशासन ने फल्गु नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बचाने और आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने के लिए एक बहु-विभागीय कार्ययोजना शुरू की है। इसमें दोनों किनारों पर पौधरोपण, 123 खराब बोरवेल को रिचार्ज बोरवेल में बदलना और पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन शामिल है।
गया, बोधगया और डोभी में कितने बोरवेल चिह्नित किए गए हैं?
जल संसाधन विभाग ने गया, बोधगया और डोभी क्षेत्र में कुल 123 खराब बोरवेल चिह्नित किए हैं। इन्हें वाटर रिचार्ज बोरवेल के रूप में विकसित किया जाएगा, ताकि वर्षा जल भूजल पुनर्भरण में उपयोग हो सके।
फल्गु नदी के किनारे पौधरोपण कैसे होगा?
वन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और संबंधित अंचलों के पदाधिकारी संयुक्त रूप से स्थल निरीक्षण करेंगे और पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थलों को चिह्नित करेंगे। इसका उद्देश्य नदी के आसपास हरित क्षेत्र का विस्तार कर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
पारंपरिक जलस्रोतों जैसे आहर, पोखर और पइन का क्या होगा?
लघु सिंचाई विभाग को इन पारंपरिक जलस्रोतों का भौतिक निरीक्षण कर उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। जहाँ आवश्यक होगा, वहाँ पुनर्जीवन या नए निर्माण की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
इस योजना से आम लोगों को क्या फायदा होगा?
भूजल स्तर सुधरने से गया और बोधगया क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों को पेयजल व सिंचाई में राहत मिलने की उम्मीद है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सोख्ता निर्माण से जलजमाव की समस्या भी कम होगी।
राष्ट्र प्रेस
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