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जेरेमी लालरिनुंगा: 19 साल में कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले वेटलिफ्टर की इंजरी से जंग

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जेरेमी लालरिनुंगा: 19 साल में कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले वेटलिफ्टर की इंजरी से जंग

सारांश

19 साल की उम्र में कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले जेरेमी लालरिनुंगा का करियर चोटों की मार से जूझ रहा है। रीढ़ और घुटने की इंजरी के बावजूद कई बार शानदार वापसी कर चुके इस 24 वर्षीय वेटलिफ्टर से देश को एक बार फिर बड़े मंच पर धमाके की उम्मीद है।

मुख्य बातें

जेरेमी लालरिनुंगा का जन्म 26 अक्टूबर 2002 को आइजोल, मिजोरम में हुआ।
उन्होंने 2018 ब्यूनस आयर्स यूथ ओलंपिक में गोल्ड जीतकर यह कारनामा करने वाले पहले भारतीय वेटलिफ्टर बनने का गौरव हासिल किया।
2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में 67 किग्रा भारवर्ग में 19 वर्ष की आयु में स्वर्ण पदक जीता।
फरवरी 2022 में ट्रेनिंग के दौरान रीढ़ की हड्डी में चोट के बावजूद उन्होंने कॉमनवेल्थ में भाग लेकर गोल्ड जीता।
बर्मिंघम के बाद लगातार चोटों ने उनकी प्रतिस्पर्धी उपस्थिति को सीमित कर दिया है।
26 अक्टूबर 2026 को 24 वर्ष के हो रहे जेरेमी से एक बार फिर मज़बूत वापसी की उम्मीद है।

भारतीय वेटलिफ्टिंग के सबसे चमकदार सितारों में शुमार जेरेमी लालरिनुंगा ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में मात्र 19 वर्ष की आयु में 67 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को रोमांचित कर दिया था। लेकिन उस ऐतिहासिक जीत के बाद से लगातार चोटों ने उनके करियर की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिया है। 26 अक्टूबर 2026 को 24 वर्ष के हो रहे इस युवा खिलाड़ी से देश को एक बार फिर बड़े मंच पर वापसी की उम्मीद है।

मिजोरम से मैदान तक: शुरुआती सफर

जेरेमी लालरिनुंगा का जन्म 26 अक्टूबर 2002 को आइजोल, मिजोरम में हुआ। उनके पिता एक जाने-माने बॉक्सर थे, किंतु आर्थिक तंगी के चलते वे इस खेल में आगे नहीं बढ़ पाए। जेरेमी भी शुरुआत में बॉक्सिंग की ओर आकर्षित थे, लेकिन जब उन्होंने अपने दोस्तों को वेटलिफ्टिंग का अभ्यास करते देखा, तो उनका झुकाव इस खेल की तरफ हो गया।

पिता के प्रोत्साहन से जेरेमी ने आर्मी स्पोर्ट्स के चयन ट्रायल में हिस्सा लिया और सफलतापूर्वक चुने गए। इसके बाद वे पेशेवर प्रशिक्षण के लिए पुणे शिफ्ट हो गए, जहाँ उनकी प्रतिभा को व्यवस्थित दिशा मिली।

जूनियर स्तर पर धमाकेदार शुरुआत

जेरेमी ने महज 13 साल की उम्र में जूनियर वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2016 के 56 किग्रा भारवर्ग में रजत पदक जीतकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी सिल्वर जीतकर उन्होंने राष्ट्रीय कैंप में जगह पक्की की।

अगले ही वर्ष उन्होंने कॉमनवेल्थ यूथ और जूनियर चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फिर 2018 में ब्यूनस आयर्स यूथ ओलंपिक में गोल्ड जीतकर वे यह उपलब्धि हासिल करने वाले पहले भारतीय वेटलिफ्टर बन गए — एक ऐसी उपलब्धि जिसने उन्हें रातोंरात राष्ट्रीय हीरो बना दिया।

चोट, कमबैक और 2022 का ऐतिहासिक गोल्ड

कोरोना महामारी के दौर में जेरेमी के सामने कड़ी चुनौतियाँ आईं। 2021 में उन्हें घुटने के पिछले हिस्से में एक गाँठ के कारण सर्जरी करवानी पड़ी। रिकवरी के बाद दिसंबर 2021 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में स्वर्ण जीतकर उन्होंने शानदार वापसी की।

यह ऐसे समय में आया जब फरवरी 2022 के एक ट्रेनिंग सेशन में उनकी रीढ़ की हड्डी में नई चोट आ गई। इस गंभीर परिस्थिति के बावजूद उन्होंने बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के लिए क्वालीफाई किया और 67 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे देश को चौंका दिया। यह उनके अदम्य साहस और जुझारू प्रवृत्ति का प्रमाण था।

इंजरी का साया और अटकी उम्मीदें

2022 कॉमनवेल्थ गोल्ड के बाद जेरेमी को वेटलिफ्टिंग का अगला बड़ा सितारा माना जाने लगा और देश को ओलंपिक जैसे बड़े आयोजनों में उनसे पदक की उम्मीद बढ़ गई। गौरतलब है कि इसके बाद के वर्ष उनके करियर के लिए बेहद कठिन साबित हुए। चोटों ने उनके प्रतिस्पर्धी कार्यक्रम को बाधित किया और वे उस ऊँचाई को दोबारा छू नहीं पाए जो उन्होंने बर्मिंघम में हासिल की थी।

यह पहली बार नहीं है कि किसी भारतीय खेल प्रतिभा का करियर बार-बार आने वाली चोटों की भेंट चढ़ा हो। वेटलिफ्टिंग जैसे शारीरिक रूप से माँगलिक खेल में रिकवरी और पुनर्वास के लिए संस्थागत समर्थन की अहमियत और भी बढ़ जाती है।

आगे की राह

26 अक्टूबर 2026 को 24 वर्ष के हो रहे जेरेमी के पास अभी करियर के कई बेहतरीन साल बाकी हैं। वे पूर्व में भी कई गंभीर चोटों से उबरकर ज़बरदस्त वापसी कर चुके हैं, जो उनकी मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है। देश के खेल प्रेमियों और वेटलिफ्टिंग बिरादरी की नज़रें उनकी रिकवरी और अगले बड़े टूर्नामेंट में उनकी संभावित वापसी पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दीर्घकालिक शारीरिक प्रबंधन और पुनर्वास की व्यवस्था अक्सर पीछे रह जाती है। यूथ ओलंपिक से कॉमनवेल्थ गोल्ड तक का उनका सफर अभूतपूर्व था, लेकिन सीनियर स्तर पर उनकी निरंतरता सुनिश्चित करने में व्यवस्था कहाँ चूकी, यह सवाल पूछा जाना चाहिए। वेटलिफ्टिंग जैसे खेल में 24 की उम्र में ही इतनी बड़ी-बड़ी चोटों का इतिहास, खिलाड़ी की महत्वाकांक्षा के साथ-साथ प्रशिक्षण के बोझ और समय प्रबंधन पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेरेमी लालरिनुंगा कौन हैं?
जेरेमी लालरिनुंगा मिजोरम के आइजोल से ताल्लुक रखने वाले भारतीय वेटलिफ्टर हैं, जिन्होंने 2018 ब्यूनस आयर्स यूथ ओलंपिक में गोल्ड जीतकर पहले भारतीय वेटलिफ्टर के रूप में यह उपलब्धि हासिल की। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में 19 वर्ष की आयु में 67 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर वे राष्ट्रीय नायक बन गए।
जेरेमी लालरिनुंगा को किस इंजरी ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया?
फरवरी 2022 में एक ट्रेनिंग सेशन के दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई, जो उनके करियर की सबसे गंभीर चोटों में से एक रही। इससे पहले 2021 में उन्हें घुटने के पिछले हिस्से में गाँठ निकालने के लिए भी सर्जरी करवानी पड़ी थी।
जेरेमी लालरिनुंगा ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में किस भारवर्ग में गोल्ड जीता था?
जेरेमी लालरिनुंगा ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में 67 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। उस समय वे मात्र 19 वर्ष के थे।
क्या जेरेमी लालरिनुंगा ने पहले भी इंजरी से वापसी की है?
हाँ, जेरेमी लालरिनुंगा कई बार चोटों से उबरकर मज़बूत वापसी कर चुके हैं। 2021 में घुटने की सर्जरी के बाद उन्होंने दिसंबर 2021 की कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर शानदार कमबैक किया था, और फिर रीढ़ की चोट के बावजूद 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण हासिल किया।
जेरेमी लालरिनुंगा की उम्र और भविष्य की संभावनाएँ क्या हैं?
26 अक्टूबर 2026 को 24 वर्ष के हो रहे जेरेमी के पास अभी करियर के कई महत्वपूर्ण साल शेष हैं। चोटों से बार-बार वापसी का उनका इतिहास उनकी मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है, और देश को उनसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर धमाकेदार प्रदर्शन की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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