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संकेत महादेव सरगर: सांगली की चाय दुकान से बर्मिंघम के रजत पदक तक का प्रेरणादायक सफर

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संकेत महादेव सरगर: सांगली की चाय दुकान से बर्मिंघम के रजत पदक तक का प्रेरणादायक सफर

सारांश

चाय की दुकान पर सुबह साढ़े पाँच बजे से शुरू होने वाला दिन और शाम को दो बार वेटलिफ्टिंग ट्रेनिंग — सात साल की यही दिनचर्या सांगली के संकेत महादेव सरगर को बर्मिंघम के पोडियम तक ले गई। 248 किग्रा का रजत, और अगला निशाना ओलंपिक स्वर्ण।

मुख्य बातें

संकेत महादेव सरगर का जन्म 16 अक्टूबर 2000 को सांगली, महाराष्ट्र में हुआ।
उन्होंने पान-चाय की दुकान चलाते हुए करीब 7 साल तक दिन में दो बार वेटलिफ्टिंग ट्रेनिंग की।
2022 राष्ट्रमंडल खेलों में बर्मिंघम में 248 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक जीता।
पुरुषों के 55 किग्रा भार वर्ग में 256 किग्रा का राष्ट्रीय और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड उनके नाम है।
भविष्य में ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना उनका लक्ष्य है।

महाराष्ट्र के सांगली के एक साधारण परिवार में पले-बढ़े संकेत महादेव सरगर ने अपनी अदम्य जिजीविषा और कठोर परिश्रम के दम पर भारतीय वेटलिफ्टिंग में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराया है। 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में 248 किलोग्राम वजन उठाकर उन्होंने रजत पदक जीता और देश को गर्वित किया। पान-चाय की दुकान चलाने से लेकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक की यह यात्रा हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखता है।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

संकेत महादेव सरगर का जन्म 16 अक्टूबर 2000 को सांगली, महाराष्ट्र में एक आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार में हुआ था। परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि वेटलिफ्टिंग के प्रशिक्षण का खर्च आसानी से उठाया जा सके। परिवार की ज़िम्मेदारी भी उनके कंधों पर थी, फिर भी संकेत ने अपनी आर्थिक परिस्थितियों को अपने इरादों के सामने कभी हावी नहीं होने दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय खेलों में अक्सर यह बहस होती है कि क्या ग्रामीण और अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों को पर्याप्त संसाधन मिल पाते हैं। संकेत की कहानी इस बहस को एक नया आयाम देती है।

चाय की दुकान और ट्रेनिंग — सात साल की दिनचर्या

संकेत के पास एक छोटी-सी पान और चाय की दुकान थी, जो उनकी आजीविका का साधन थी। उनकी दिनचर्या साधारण शब्दों में असाधारण थी — वे सुबह साढ़े पाँच बजे उठकर ग्राहकों के लिए चाय तैयार करते, फिर वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग के लिए निकल पड़ते। ट्रेनिंग के बाद पढ़ाई, शाम को फिर दुकान, और उसके बाद एक बार और अभ्यास सत्र — यही उनका रोज़ का क्रम था।

गौरतलब है कि यह दिनचर्या कोई कुछ महीनों की नहीं, बल्कि करीब सात वर्षों तक लगातार चलती रही। इसी अनुशासन और संघर्ष की नींव पर संकेत ने स्वयं को राष्ट्रीय स्तर का वेटलिफ्टर बनाया।

राष्ट्रीय और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड

संकेत के नाम पुरुषों के 55 किलोग्राम भार वर्ग में 256 किलोग्राम का राष्ट्रीय और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड दर्ज है। यह आँकड़ा उनके वर्षों के समर्पण और तकनीकी उत्कृष्टता का प्रमाण है। भारतीय वेटलिफ्टिंग के इतिहास में इस भार वर्ग में इतने उच्च मानक स्थापित करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 — जीवन का बड़ा मोड़

इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित 2022 राष्ट्रमंडल खेलों ने संकेत की ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया। भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने 248 किलोग्राम वजन उठाकर रजत पदक हासिल किया। यह पदक महज़ एक धातु का टुकड़ा नहीं, बल्कि सात वर्षों की उस दिनचर्या का मूर्त रूप था जो उन्होंने चाय की भाप और वेटलिफ्टिंग की लोहे की छड़ों के बीच बिताई थी।

इस जीत के बाद संकेत को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली और उनकी जीवनशैली में भी बड़ा बदलाव आया। यह भारतीय वेटलिफ्टिंग की नई पीढ़ी के उभरने का भी संकेत था।

आगे का लक्ष्य — ओलंपिक स्वर्ण

राष्ट्रमंडल रजत पदक से संतुष्ट न होते हुए संकेत का अगला सपना ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन करना है। उनकी यह महत्वाकांक्षा उनके उस संघर्षशील स्वभाव की परिचायक है जिसने उन्हें सांगली की एक छोटी-सी दुकान से अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुँचाया। भारतीय वेटलिफ्टिंग को आने वाले वर्षों में संकेत से बड़ी उम्मीदें हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस ढाँचागत खाई की भी है जो भारतीय खेल तंत्र में आज भी मौजूद है — जहाँ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सरकारी सहायता मिलने से पहले वर्षों तक खुद अपना खर्च उठाना पड़ता है। सात साल तक चाय की दुकान और ट्रेनिंग का यह संयोजन प्रेरणादायक ज़रूर है, लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या भारत ऐसे दर्जनों संकेत खो देता है जिनके पास यह जिद नहीं होती। राष्ट्रमंडल रजत के बाद अब असली परीक्षा ओलंपिक मंच पर है, जहाँ तकनीकी और मानसिक तैयारी का स्तर कहीं ऊँचा होता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संकेत महादेव सरगर कौन हैं?
संकेत महादेव सरगर महाराष्ट्र के सांगली से आने वाले भारतीय वेटलिफ्टर हैं, जिनका जन्म 16 अक्टूबर 2000 को हुआ। उन्होंने 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर देशभर में पहचान बनाई।
संकेत सरगर ने राष्ट्रमंडल खेलों में कितना वजन उठाया?
बर्मिंघम में आयोजित 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में संकेत ने 248 किलोग्राम वजन उठाकर पुरुषों के 55 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक जीता। उनके नाम इस वर्ग में 256 किलोग्राम का राष्ट्रीय और राष्ट्रमंडल रिकॉर्ड भी दर्ज है।
संकेत सरगर ने ट्रेनिंग का खर्च कैसे उठाया?
संकेत एक पान और चाय की दुकान चलाते थे। वे सुबह साढ़े पाँच बजे उठकर दुकान खोलते, फिर ट्रेनिंग पर जाते और शाम को फिर दुकान संभालते। यह दिनचर्या करीब सात साल तक चली।
संकेत सरगर का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद संकेत सरगर का लक्ष्य ओलंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।
संकेत सरगर की संघर्ष गाथा अन्य एथलीटों के लिए क्यों प्रेरणादायक है?
सांगली के एक आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार से निकलकर, बिना किसी बड़े सरकारी संसाधन के, केवल अनुशासन और मेहनत के बल पर अंतरराष्ट्रीय पदक जीतना उन सभी खिलाड़ियों के लिए मिसाल है जो सीमित साधनों में बड़े सपने देखते हैं। उनकी कहानी बताती है कि दृढ़ संकल्प किसी भी बाधा से बड़ा होता है।
राष्ट्र प्रेस
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