हरजिंदर कौर: कबड्डी से वेटलिफ्टिंग तक, लगातार 2 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक जीते
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के पटियाला जिले की हरजिंदर कौर ने आर्थिक कठिनाइयों और खेल बदलने की चुनौती के बावजूद लगातार दो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक जीतकर देश की महिला वेटलिफ्टिंग में अपना विशेष स्थान बनाया है। 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य और 2026 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतने वाली हरजिंदर की यात्रा संघर्ष, साहस और समर्पण की मिसाल है।
प्रारंभिक जीवन और संघर्ष
14 अक्टूबर 1996 को पटियाला जिले के नाभा के पास मेहास गाँव में जन्मी हरजिंदर का परिवार कृषि से जुड़ा है। शुरुआती दिनों में उन्होंने कबड्डी में हाथ आज़माया और प्रशिक्षण के लिए रोज़ाना 5 किलोमीटर साइकिल चलाकर सेंटर पहुँचती थीं। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण उन्हें यह प्रशिक्षण बीच में ही छोड़ना पड़ा।
वेटलिफ्टिंग में हरजिंदर की शुरुआत अपेक्षाकृत देर से हुई। 2016 में पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने पहली बार बारबेल थामा। यह ऐसे समय में आया जब अधिकांश खिलाड़ी अपनी किशोरावस्था में ही खेल में परिपक्व हो चुके होते हैं — फिर भी हरजिंदर ने इस देरी को अपनी राह में रोड़ा नहीं बनने दिया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभरना
राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन के बाद हरजिंदर को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला। 2021 में ताशकंद में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में उन्होंने महिलाओं की 71 किग्रा कैटेगरी में रजत पदक जीता। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की पहली बड़ी सफलता थी।
इसके बाद 2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 71 किग्रा इवेंट में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया। गौरतलब है कि यह उनके करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक था।
ग्लासगो 2026 में रजत की चमक
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में ग्लासगो पहुँचीं हरजिंदर ने 69 किग्रा भारवर्ग में रजत पदक जीतकर लगातार दूसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में देश का नाम रोशन किया। इस प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग की अग्रिम पंक्ति में स्थापित कर दिया है।
एशियन गेम्स 2026 का अनुभव
एशियन गेम्स 2026 में जापान के आइची-नागोया पहुँचीं हरजिंदर 69 किग्रा भारवर्ग में नौवें स्थान पर रहीं और पदक जीतने से चूक गईं। उन्होंने पदक न जीत पाने पर अफसोस जताया। उसी स्पर्धा में भारत की मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीता।
हरजिंदर मीराबाई चानू को अपना आदर्श मानती हैं और उनके जैसी सफलता हासिल करने के लक्ष्य के साथ अपनी तैयारी जारी रखे हुए हैं। यह एशियन गेम्स का अनुभव उनके लिए एक महत्वपूर्ण सबक बनकर आया है, जो आगे की राह और मज़बूत करेगा।
प्रेरणा की जीवित मिसाल
पटियाला के एक साधारण कृषक परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक पहुँचने की हरजिंदर की कहानी उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो आर्थिक विपन्नता के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। भारतीय महिला वेटलिफ्टिंग की यह उभरती हुई आवाज़ आने वाले वर्षों में और बड़े मंचों पर देश का प्रतिनिधित्व करने की दावेदार है।