मुरली श्रीशंकर का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 8.09 मीटर के साथ रजत, पिता बोले — 'इंजरी के बाद ऐसी वापसी की उम्मीद नहीं थी'
सारांश
मुख्य बातें
मुरली श्रीशंकर ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। ग्लासगो में 30 जुलाई को हुई इस प्रतियोगिता में श्रीशंकर ने गंभीर चोट और सर्जरी के बाद की वापसी को यादगार बना दिया। उनके पिता एवं कोच एस. मुरली ने कहा कि इंजरी के बाद इस स्तर के प्रदर्शन की उन्हें कतई उम्मीद नहीं थी।
मुख्य प्रदर्शन
27 वर्षीय श्रीशंकर ने दूसरे राउंड में अपनी सर्वश्रेष्ठ छलांग दर्ज की। उन्होंने 8.03 मीटर से शुरुआत की और फिर 8.09 मीटर तक पहुँचे। प्रतियोगिता में दो फाउल प्रयासों के बावजूद वे पूरे समय पदक की दौड़ में बने रहे और अंततः दूसरा स्थान हासिल किया। गौरतलब है कि श्रीशंकर ने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी 8.08 मीटर की छलांग के साथ रजत पदक जीता था — यानी यह उनका लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ रजत है।
चोट और वापसी की कहानी
केरल के पल्लकड़ निवासी श्रीशंकर को इससे पहले एक गंभीर चोट लगी थी, जिसके बाद उनकी सर्जरी करनी पड़ी। सर्जरी के बाद पुनर्वास (रिहैब) में 6 से 7 महीने का समय लगा। इस लंबे और कठिन दौर में उनकी मेहनत और समर्पण ने उन्हें एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर खड़ा किया।
पिता और कोच की प्रतिक्रिया
एस. मुरली ने कहा, "यह मेरे और मेरे परिवार के लिए बहुत ही गर्व का समय है। उसने बहुत ही खतरनाक इंजरी से रिकवर करते हुए वापसी की है। हमने नहीं सोचा था कि इंजरी से वापसी के बाद वह इतना शानदार प्रदर्शन करेगा।"
उन्होंने बताया कि श्रीशंकर ने खुद कहा था — "मैं वापसी करूंगा और फिर से जंप करूंगा, मेरे बारे में चिंता मत करिए।" एस. मुरली के अनुसार यह उनके बेटे का आत्मविश्वास था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उनकी पत्नी ने श्रीशंकर की रिकवरी के लिए खूब पूजा-पाठ किया।
एक पिता और कोच के रूप में एस. मुरली की भावना थी, "मेरी सिर्फ इतनी ही इच्छा थी कि वह एक आम इंसान की तरह चलने में सक्षम हो जाए। लेकिन उसने देश के लिए, हमारे लिए और अपने लिए करिश्मा किया है। मुझे उस पर गर्व है।"
ऐतिहासिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय लंबी कूद में निरंतरता की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। श्रीशंकर का लगातार दो कॉमनवेल्थ संस्करणों में रजत पदक जीतना इस खेल में भारत की बढ़ती साख को दर्शाता है। पल्लकड़ के एक साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स के शिखर तक का उनका सफर प्रेरणादायक है।
आगे की राह
इस प्रदर्शन के बाद श्रीशंकर की नज़रें आगामी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं पर होंगी। उनकी चोट से सफल वापसी और ग्लासगो में यह प्रदर्शन भविष्य के लिए उम्मीद जगाता है।