भागलपुर में कायाकल्प अभियान समीक्षा: 4,857 कार्यों में तेज़ी के निर्देश, ₹2,012 लाख का बजट
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भागलपुर जिले की जिला पदाधिकारी ने शनिवार, 24 अक्टूबर को कायाकल्प अभियान के तहत चल रहे विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में 9 विभागों के कुल 4,857 कार्यों की प्रगति का जायज़ा लिया गया, जिनके लिए ₹2,012.07 लाख से अधिक का बजट निर्धारित है। लंबित स्वीकृतियों की बड़ी संख्या को देखते हुए अधिकारियों को प्रक्रिया में तत्काल तेज़ी लाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
बैठक में कौन-कौन शामिल रहे
जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित इस समीक्षा में उप विकास आयुक्त (डीडीसी), अपर समाहर्ता (एडीएम), नगर आयुक्त, डीआरडीए निदेशक, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, सिविल सर्जन और पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति, बजट उपयोग और निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यों की मौजूदा स्थिति
समीक्षा के दौरान सामने आए आँकड़ों के अनुसार, 1,604 कार्य अभी तकनीकी स्वीकृति की प्रतीक्षा में हैं, जबकि 2,746 कार्य प्रशासनिक स्वीकृति के लिए लंबित हैं। अब तक केवल 91 कार्यों को स्वीकृति प्राप्त हो सकी है। इसके अतिरिक्त, 267 कार्य फिलहाल प्रगति पर हैं और 68 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। यह आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि स्वीकृति प्रक्रिया में व्यापक अवरोध बना हुआ है।
जिला पदाधिकारी के निर्देश
जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति की प्रक्रिया में बिना विलंब तेज़ी लाई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 'स्वीकृतियों में देरी के कारण विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए।' अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी कार्य पूरे करने को कहा गया।
इसके अलावा, जीर्णोद्धार और नवनिर्माण कार्यों की नियमित निगरानी, निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने और परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को कार्यों की अद्यतन स्थिति की नियमित समीक्षा करने और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए।
कायाकल्प अभियान का महत्त्व
गौरतलब है कि कायाकल्प अभियान बिहार सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य जिला स्तर पर बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक सुविधाओं के जीर्णोद्धार एवं नवनिर्माण को गति देना है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में विकास कार्यों की गति और पारदर्शिता को लेकर प्रशासनिक दबाव बढ़ा है। 9 विभागों की एक साथ समीक्षा यह संकेत देती है कि ज़िला प्रशासन इस अभियान को प्राथमिकता के रूप में देख रहा है।
आगे की राह
जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना सभी विभागों की साझा जिम्मेदारी है। आने वाले हफ्तों में स्वीकृति प्रक्रिया में तेज़ी और प्रगति रिपोर्टों की नियमित समीक्षा से यह तय होगा कि कायाकल्प अभियान ज़मीन पर अपेक्षित बदलाव ला पाता है या नहीं।