तेलंगाना सूखा संकट: CM रेवंत रेड्डी 12 अक्टूबर को मंत्रियों के साथ करेंगे आपात समीक्षा बैठक
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी 12 अक्टूबर 2026 को राज्य में अल नीनो के प्रभाव और गंभीर होते सूखे की स्थिति पर मंत्रियों के साथ एक विशेष समीक्षा बैठक करेंगे। हैदराबाद में होने वाली इस बैठक में सूखे से जूझ रहे इलाकों के हालात, किसानों की समस्याएँ और राहत के तत्काल उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श होगा।
बैठक का एजेंडा
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, बैठक में कृषि, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, बिजली की बढ़ती माँग और अन्य तात्कालिक ज़रूरतों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके साथ ही बारिश प्रभावित क्षेत्रों में राहत उपाय, मंत्रियों की उप-समिति द्वारा तैयार की गई योजनाएँ, प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक और किसान संगठनों एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सलाह पर भी चर्चा अपेक्षित है। हाल ही में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में भी वर्षा की स्थिति पर गंभीरता से विचार किया गया था।
सूखे की गंभीरता
अल नीनो के प्रभाव से तेलंगाना में सामान्य से 17 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है और लगभग 235 मंडलों में सूखे जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गई हैं। 6 अक्टूबर को जारी प्रारंभिक आकलन के अनुसार, 18 जिलों के 320 मंडलों में सूखे के गंभीर हालात हैं। गौरतलब है कि तेलंगाना में 33 जिलों में कुल 621 मंडल हैं, यानी लगभग आधे मंडल संकट की चपेट में हैं।
केंद्र से मदद की गुहार
राज्य सरकार पहले ही विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से प्रभावित इलाकों को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने और पर्याप्त आर्थिक सहायता देने की अपील कर चुकी है। सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए केंद्र से ₹20,000 करोड़ के विशेष पैकेज की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के किसान खरीफ फसल को हुए भारी नुकसान से पहले से ही परेशान हैं।
प्रशासनिक तैयारी
तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे राज्य में सूखे की स्थिति पर तत्काल एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। मुख्य सचिव ने योजना, राजस्व, भूजल, कृषि, पंचायत राज और ग्रामीण जल आपूर्ति विभागों से पूर्ण जानकारी एकत्र करने और तय मानदंडों के अनुसार सूखाग्रस्त मंडलों की पहचान करने के आदेश दिए हैं। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि सूखे पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते समय 12 मानक पैमानों का ध्यान रखा जाए, जिसमें दक्षिण-पश्चिम मानसून सीज़न (जून से सितंबर) के दौरान हुई वर्षा भी शामिल है।
आगे की राह
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को सरकारी नियमों और निर्धारित मानकों के आधार पर सूखाग्रस्त मंडलों को घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने और अक्टूबर के अंत तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। 12 अक्टूबर की बैठक के नतीजे तय करेंगे कि राज्य सरकार केंद्र के समक्ष किस ठोस योजना के साथ जाती है और किसानों को राहत कब और कैसे मिलती है।