जॉन ब्रिटास ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र: जेएनयू भूख हड़ताल में हस्तक्षेप की माँग, 3 अक्टूबर से जारी आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई (एम) — के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने 18 अक्टूबर 2026 को भारत की राष्ट्रपति को पत्र लिखकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में जारी भूख हड़ताल में तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। जेएनयू छात्रसंघ (जेएनयूएसयू) के प्रतिनिधियों और अन्य छात्रों ने 3 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की हुई है, जो आंदोलन के 15 दिन से अधिक समय से जारी है।
राष्ट्रपति को पत्र: तीन प्रमुख माँगें
ब्रिटास ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में तीन ठोस माँगें रखी हैं। पहली — निर्वाचित छात्रसंघ प्रतिनिधियों के विरुद्ध जारी निष्कासन आदेशों को रद्द किया जाए। दूसरी — मुख्य प्रॉक्टर कार्यालय (सीपीओ) नियमावली के आपत्तिजनक प्रावधानों को वापस लिया जाए। तीसरी — छात्रों की लंबे समय से लंबित शिकायतों का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति जेएनयू की संवैधानिक विजिटर होती हैं, जिसके कारण सांसद ने इस पद को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर अंकुश लगाने की अपील की है।
शिक्षा मंत्री को अलग पत्र: स्वास्थ्य की चिंता
ब्रिटास ने शिक्षा मंत्री को एक अलग पत्र भी लिखा है। इसमें उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बिगड़ते स्वास्थ्य पर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय तक चलने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाइयाँ परिसर में लोकतांत्रिक भागीदारी को कमज़ोर कर रही हैं।
सांसद ने शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया कि वे छात्र कल्याण की रक्षा और शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ तत्काल बातचीत करें।
एक्स पर पोस्ट: लोकतंत्र पर व्यापक टिप्पणी
ब्रिटास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर राज्यसभा कार्यवाही का एक वीडियो साझा करते हुए प्रसिद्ध राजनीतिक वैज्ञानिकों स्टीवन लेविट्स्की और डैनियल जिब्लैट के विचारों का हवाला दिया। उन्होंने लिखा कि इन विद्वानों के अनुसार आज के दौर में लोकतंत्र सैन्य तख्तापलट या विदेशी आक्रमणों से नहीं गिरते, बल्कि भीतर से तब नष्ट होते हैं जब लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता सत्ता बरकरार रखने के लिए कानूनों और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करते हैं। यह विचार इन विद्वानों ने 2018 में रखे थे।
मुख्य चुनाव आयुक्त विधेयक पर निशाना
सांसद ने दिसंबर 2023 में केंद्र सरकार द्वारा पेश मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) विधेयक का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि जब यह विधेयक राज्यसभा में लाया गया था, तब उन्होंने इसका स्पष्ट विरोध किया था और इसकी गंभीर खामियों की ओर सदन का ध्यान दिलाया था।
ब्रिटास के अनुसार, विधेयक के कानून बनने के दो साल बाद उनकी तत्कालीन आशंकाएँ सच साबित हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा लोकतांत्रिक संघर्ष उसी कानून का प्रत्यक्ष परिणाम है। हालाँकि, ये उनके राजनीतिक आकलन हैं और सरकार का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
आगे क्या होगा
यह आंदोलन ऐसे समय में आया है जब जेएनयू का छात्र-प्रशासन संबंध पहले से तनावपूर्ण रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय या शिक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि शीघ्र हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो भूख हड़ताल जारी रहने से छात्रों का स्वास्थ्य संकट और गहरा हो सकता है।