30 अक्टूबर 2026
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जामिया में 18 दिन की भूख हड़ताल समाप्त, छात्र संघ संविधान के लिए 15 मई 2027 की समय-सीमा तय

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जामिया में 18 दिन की भूख हड़ताल समाप्त, छात्र संघ संविधान के लिए 15 मई 2027 की समय-सीमा तय

सारांश

18 दिन का अनशन, तीन लिखित मांगें और एक सांसद की मध्यस्थता — जामिया में छात्र आंदोलन की यह जीत सिर्फ एक विश्वविद्यालय की कहानी नहीं है। 15 मई 2027 की समय-सीमा और लिंगदोह समिति की सिफारिशों पर आधारित चुनाव की माँग अब आधिकारिक प्रतिबद्धता बन चुकी है।

मुख्य बातें

जामिया मिलिया इस्लामिया में 18 दिनों से चल रही भूख हड़ताल 29 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुई।
प्रशासन ने छात्र संघ का ड्राफ्ट संविधान तैयार करने के लिए 15 मई 2027 की समय-सीमा तय की।
छात्र एबिन बेसिल और रेहान गनी छात्र संघ बहाली की मांग को लेकर अनशन पर बैठे थे।
राज्यसभा सांसद हारिस बीरन (IUML) ने मध्यस्थता की और कुलपति व छात्रों के बीच बातचीत कराई।
संविधान निर्माण समिति में प्रोफेसरों व कानूनी विशेषज्ञों के साथ प्रत्येक फैकल्टी से छात्र प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
दीपावली छुट्टियों के बाद 8 नवंबर 2026 से ऑफलाइन कक्षाएं फिर शुरू होने की योजना।

जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) विश्वविद्यालय प्रशासन और भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच 29 अक्टूबर 2026 को सहमति बन गई, जिसके बाद 18 दिनों से अनशन कर रहे छात्रों ने अपनी हड़ताल समाप्त कर दी। प्रशासन ने छात्र संघ के संविधान को तैयार करने, मंजूरी देने और लागू करने की पूरी प्रक्रिया के लिए 15 मई 2027 की समय-सीमा निर्धारित की है। इस घोषणा के बाद नई दिल्ली स्थित विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने जश्न मनाया।

भूख हड़ताल की पृष्ठभूमि

छात्र एबिन बेसिल और रेहान गनी छात्र संघ की बहाली सहित अन्य मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। अनशन के 18वें दिन प्रशासन की ओर से आधिकारिक नोटिस जारी होने के बाद मांगों पर सहमति बनी। गौरतलब है कि जामिया मिलिया इस्लामिया में लंबे समय से छात्र संघ सक्रिय नहीं रहा है, और छात्र समुदाय चुनी हुई प्रतिनिधि संस्था की बहाली की माँग करता रहा है।

मध्यस्थता की भूमिका

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के राज्यसभा सांसद हारिस बीरन ने इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की अहम भूमिका निभाई। उन्होंने पहले कुलपति से बैठक की, फिर छात्र प्रतिनिधिमंडल से बात की और पुनः कुलपति कार्यालय पहुँचे, जहाँ सहमति की आधिकारिक घोषणा की गई। रजिस्ट्रार और हारिस बीरन ने भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को नारियल पानी पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।

प्रशासन ने क्या स्वीकार किया

विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार महताब आलम ने बताया कि छात्रों की तीन प्रमुख लिखित मांगें थीं। पहली मांग 15 मई 2027 तक छात्र संघ का ड्राफ्ट संविधान तैयार करने की थी। दूसरी मांग थी कि संविधान बनने के बाद लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार छात्र संघ चुनाव कराए जाएं। प्रशासन ने ड्राफ्ट संविधान की समय-सीमा पर सहमति दे दी है।

रजिस्ट्रार ने स्पष्ट किया कि संविधान तैयार करने वाली समिति में केवल प्रोफेसर और कानूनी विशेषज्ञ ही नहीं, बल्कि प्रत्येक फैकल्टी से छात्र प्रतिनिधि भी शामिल किए जाएंगे। यह व्यवस्था संविधान-निर्माण प्रक्रिया में छात्रों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।

ऑफलाइन कक्षाओं की वापसी

छात्र संघ विवाद के दौरान विश्वविद्यालय में ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही थीं। अब प्रशासन ने दीपावली की छुट्टियों के बाद ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करने की योजना साझा की है। रजिस्ट्रार महताब आलम ने बताया कि 8 नवंबर 2026 तक छुट्टियाँ हैं और घर गए छात्रों से निर्धारित तारीख तक लौटने का अनुरोध किया गया है। छात्रों के वापस आने के तुरंत बाद ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।

छात्रों की प्रतिक्रिया

छात्रों ने प्रशासन के फैसले का स्वागत किया और रजिस्ट्रार, विश्वविद्यालय कर्मचारियों तथा प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। परिसर में जश्न का माहौल रहा। यह घटनाक्रम देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र-प्रशासन संवाद के लिए एक नज़ीर बन सकता है, जहाँ छात्र संघ के अधिकारों को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा 15 मई 2027 की समय-सीमा के पालन में होगी — भारत के कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इस तरह की 'समय-सीमाएं' पहले भी खिसकती रही हैं। लिंगदोह समिति की सिफारिशें दशकों पुरानी हैं, फिर भी देश के तमाम विश्वविद्यालय उन्हें पूरी तरह लागू नहीं कर पाए हैं — जामिया भी इसका अपवाद नहीं रहा। सांसद की मध्यस्थता से हल निकलना यह भी दर्शाता है कि विश्वविद्यालय के आंतरिक संवाद तंत्र ने पहले विफलता दिखाई। अब निगाहें इस पर होनी चाहिए कि क्या छात्र प्रतिनिधियों की भूमिका संविधान-निर्माण में वास्तविक होगी या महज प्रतीकात्मक।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जामिया में भूख हड़ताल क्यों की जा रही थी?
छात्र एबिन बेसिल और रेहान गनी जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली सहित अन्य मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। विश्वविद्यालय में लंबे समय से चुनी हुई छात्र प्रतिनिधि संस्था सक्रिय नहीं थी, जिसके चलते छात्रों में असंतोष था।
जामिया प्रशासन ने छात्रों की कौन-सी मांगें मानीं?
प्रशासन ने 15 मई 2027 तक छात्र संघ का ड्राफ्ट संविधान तैयार करने की समय-सीमा पर सहमति दी। साथ ही यह भी स्वीकार किया कि संविधान निर्माण समिति में प्रत्येक फैकल्टी से छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे और संविधान बनने के बाद लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार चुनाव कराए जाएंगे।
भूख हड़ताल खत्म कराने में किसने मध्यस्थता की?
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के राज्यसभा सांसद हारिस बीरन ने कुलपति और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच कई दौर की बातचीत कराई। उनकी मध्यस्थता के बाद ही आधिकारिक सहमति और प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, जिसके बाद अनशन समाप्त हुआ।
लिंगदोह समिति की सिफारिशें क्या हैं?
लिंगदोह समिति ने विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों के संचालन के लिए दिशानिर्देश तय किए थे, जिनमें उम्मीदवारों की पात्रता, चुनाव प्रक्रिया और संगठन की संरचना शामिल है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर इन सिफारिशों को देश भर के विश्वविद्यालयों में लागू करने को कहा गया था।
जामिया में कक्षाएं कब से सामान्य होंगी?
रजिस्ट्रार महताब आलम के अनुसार, 8 नवंबर 2026 तक दीपावली की छुट्टियाँ हैं। छात्रों के वापस लौटने के तुरंत बाद ऑफलाइन कक्षाएं फिर से शुरू करने का प्रयास किया जाएगा। हड़ताल के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही थीं।
राष्ट्र प्रेस
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