ग्रेटर नोएडा PNB बैंक में ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी, CBI ने दर्ज की FIR; तीन साल तक चलती रही गड़बड़ी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर ₹10.24 करोड़ की अनधिकृत निकासी के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। सूत्रों के अनुसार, CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने गुरुवार, 30 अक्टूबर 2026 को यह मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि यह गड़बड़ी करीब तीन वर्षों तक अनवरत चलती रही।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
पीएनबी की शुरुआती जांच में एक महिला कर्मचारी दीपांशी समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि दीपांशी ने अन्य अधिकारियों की यूज़र आईडी और पासवर्ड का अनधिकृत उपयोग कर ग्राहकों के खातों से बिना किसी अनुमति के राशि निकाली और उसे सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित कराया।
बैंक की शिकायत के मुताबिक, यह रकम कथित तौर पर दीपांशी ने अशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर निकाली।
FIR में दर्ज धाराएँ
एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 316, 318 और 344, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के साथ 43, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें बैंक कर्मचारी दीपांशी, अशुतोष पाठक तथा अन्य निजी एवं अज्ञात सरकारी कर्मचारियों को नामज़द किया गया है।
FD से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियाँ
बैंक की शिकायत के साथ 49 सावधि जमाओं (FD) का ब्यौरा भी दिया गया है, जिनके बंद होने के बाद स्थानांतरित की गई राशि का कुल आंकड़ा ₹7,023.77 लाख बताया गया है। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा शिकायत में उल्लिखित ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी से अलग है, और दोनों का आपसी संबंध जांच का विषय है।
जांच की स्थिति और आगे की संभावनाएँ
बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित ग्राहकों के सभी लेनदेन का मिलान अभी किया जा रहा है। जांच के दौरान प्रभावित खातों और लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे कुल धोखाधड़ी की राशि में भी बदलाव की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अंदरूनी वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाओं पर राष्ट्रव्यापी बहस जारी है। गौरतलब है कि यह मामला किसी बाहरी साइबर हमले का नहीं, बल्कि कथित तौर पर बैंक के ही कर्मचारियों द्वारा किए गए अंदरूनी षड्यंत्र का है, जो इसे और अधिक गंभीर बनाता है। CBI की जांच से यह स्पष्ट होगा कि तीन वर्षों तक यह गड़बड़ी आंतरिक ऑडिट और निगरानी तंत्र की नज़र से कैसे बची रही।