30 अक्टूबर 2026
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ग्रेटर नोएडा PNB बैंक में ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी, CBI ने दर्ज की FIR; तीन साल तक चलती रही गड़बड़ी

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ग्रेटर नोएडा PNB बैंक में ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी, CBI ने दर्ज की FIR; तीन साल तक चलती रही गड़बड़ी

सारांश

ग्रेटर नोएडा की PNB शाखा में कथित तौर पर तीन साल तक चले ₹10.24 करोड़ के घोटाले में CBI ने FIR दर्ज की है। एक महिला बैंक कर्मचारी पर आरोप है कि उसने सहयोगियों की लॉगिन आईडी से ग्राहकों के खाते खाली कर दिए — और आंतरिक ऑडिट तंत्र को सालों तक खबर नहीं हुई।

मुख्य बातें

CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने 30 अक्टूबर 2026 को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित PNB शाखा में ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी पर FIR दर्ज की।
बैंक कर्मचारी दीपांशी पर आरोप है कि उसने सहयोगियों की यूज़र आईडी और पासवर्ड का उपयोग कर ग्राहकों के खाते से अनधिकृत निकासी की।
कथित गड़बड़ी करीब तीन वर्षों तक चलती रही; 49 FD से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में ₹7,023.77 लाख का उल्लेख है।
FIR में BNS , IT अधिनियम और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं के तहत दीपांशी , अशुतोष पाठक समेत अन्य नामज़द।
जांच जारी रहने पर प्रभावित खातों की संख्या और कुल धोखाधड़ी की राशि बढ़ने की संभावना है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर ₹10.24 करोड़ की अनधिकृत निकासी के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। सूत्रों के अनुसार, CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने गुरुवार, 30 अक्टूबर 2026 को यह मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि यह गड़बड़ी करीब तीन वर्षों तक अनवरत चलती रही।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

पीएनबी की शुरुआती जांच में एक महिला कर्मचारी दीपांशी समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि दीपांशी ने अन्य अधिकारियों की यूज़र आईडी और पासवर्ड का अनधिकृत उपयोग कर ग्राहकों के खातों से बिना किसी अनुमति के राशि निकाली और उसे सहयोगियों के खातों में स्थानांतरित कराया।

बैंक की शिकायत के मुताबिक, यह रकम कथित तौर पर दीपांशी ने अशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के साथ मिलकर निकाली।

FIR में दर्ज धाराएँ

एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 316, 318 और 344, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के साथ 43, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसमें बैंक कर्मचारी दीपांशी, अशुतोष पाठक तथा अन्य निजी एवं अज्ञात सरकारी कर्मचारियों को नामज़द किया गया है।

FD से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियाँ

बैंक की शिकायत के साथ 49 सावधि जमाओं (FD) का ब्यौरा भी दिया गया है, जिनके बंद होने के बाद स्थानांतरित की गई राशि का कुल आंकड़ा ₹7,023.77 लाख बताया गया है। हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह आंकड़ा शिकायत में उल्लिखित ₹10.24 करोड़ की धोखाधड़ी से अलग है, और दोनों का आपसी संबंध जांच का विषय है।

जांच की स्थिति और आगे की संभावनाएँ

बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित ग्राहकों के सभी लेनदेन का मिलान अभी किया जा रहा है। जांच के दौरान प्रभावित खातों और लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे कुल धोखाधड़ी की राशि में भी बदलाव की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अंदरूनी वित्तीय धोखाधड़ी की घटनाओं पर राष्ट्रव्यापी बहस जारी है। गौरतलब है कि यह मामला किसी बाहरी साइबर हमले का नहीं, बल्कि कथित तौर पर बैंक के ही कर्मचारियों द्वारा किए गए अंदरूनी षड्यंत्र का है, जो इसे और अधिक गंभीर बनाता है। CBI की जांच से यह स्पष्ट होगा कि तीन वर्षों तक यह गड़बड़ी आंतरिक ऑडिट और निगरानी तंत्र की नज़र से कैसे बची रही।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आंतरिक निगरानी तंत्र की गहरी विफलता का प्रमाण है। तीन साल तक अन्य अधिकारियों की लॉगिन क्रेडेंशियल का दुरुपयोग होता रहा और नियमित ऑडिट इसे पकड़ने में नाकाम रहा — यह सवाल उठाता है कि PNB के भीतर 'चेकर-मेकर' जैसी बुनियादी द्विस्तरीय सुरक्षा प्रणाली कहाँ थी। 49 FD की संदिग्ध गतिविधियों और ₹7,023.77 लाख की अलग सूची यह संकेत देती है कि जांच का दायरा अभी और बड़ा हो सकता है। RBI के दिशानिर्देशों के बावजूद अंदरूनी साइबर धोखाधड़ी की पुनरावृत्ति यह दर्शाती है कि तकनीकी सुरक्षा उपायों का वास्तविक अनुपालन अभी भी अधूरा है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रेटर नोएडा PNB बैंक धोखाधड़ी मामला क्या है?
ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई स्थित PNB शाखा में कथित तौर पर ग्राहकों के खातों से ₹10.24 करोड़ की अनधिकृत निकासी की गई। आरोप है कि बैंक कर्मचारी दीपांशी ने अन्य अधिकारियों की यूज़र आईडी और पासवर्ड का उपयोग कर यह राशि सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कराई, और यह क्रम करीब तीन साल तक चलता रहा।
CBI ने इस मामले में FIR कब दर्ज की?
CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, गाजियाबाद ने 30 अक्टूबर 2026 को यह FIR दर्ज की। जांच बैंक की आधिकारिक शिकायत के आधार पर शुरू की गई है।
FIR में किन-किन लोगों के नाम हैं?
FIR में बैंक कर्मचारी दीपांशी, अशुतोष पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी, सरोज देवी और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को नामज़द किया गया है।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धाराएँ लगाई गई हैं?
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2), 316, 318 और 344, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 के साथ 43, तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ 13(1)(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
क्या इस मामले में धोखाधड़ी की राशि और बढ़ सकती है?
हाँ, PNB ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित खातों के सभी लेनदेन का मिलान अभी जारी है। जांच के दौरान प्रभावित खातों और लाभार्थियों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे कुल धोखाधड़ी की राशि भी बदल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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