वित्त मंत्री सीतारमण की रूसी राजदूत अलीपोव से मुलाकात, भारत रूस व्यापार और निवेश पर बड़ी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस बैठक में दोनों देशों के बीच वित्तीय आर्थिक सहयोग, द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाने और निवेश प्रवाह बढ़ाने पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ।
बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक का मुख्य एजेंडा भारत रूस के बीच वित्तीय और आर्थिक सहयोग को और सुदृढ़ करना था। इसमें द्विपक्षीय व्यापार को सुगम बनाने, निवेश प्रवाह में वृद्धि और बेहतर वित्तीय कनेक्टिविटी के नए अवसरों की तलाश पर ज़ोर दिया गया। दोनों पक्षों ने भारत रूस दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत ईएईयू एफटीए की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय पर हुई है जब भारत, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत कर रहा है। ईएईयू में आर्मेनिया, बेलारूस, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस शामिल हैं। गौरतलब है कि रूस इस ब्लॉक का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली सदस्य है, इसलिए सीतारमण की यह मुलाकात एफटीए वार्ता की व्यापक कूटनीतिक तस्वीर से जुड़ी हुई है।
गोयल की स्लेपनेव से बैठक का संदर्भ
बीते महीने केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के व्यापार मंत्री आंद्रेई स्लेपनेव के साथ भारत ईएईयू एफटीए वार्ता को गति देने पर विचार विमर्श किया था। उस बैठक के बाद गोयल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था, "भारत यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) एफटीए वार्ता को तेज करने, द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने और बाजार पहुंच का विस्तार करने के तरीकों पर चर्चा की।" उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स, प्रौद्योगिकी और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों को इस चर्चा के केंद्र में बताया था।
व्यापक रणनीतिक महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत पश्चिमी देशों के साथ संबंध बनाए रखते हुए रूस के साथ अपनी ऐतिहासिक साझेदारी को भी संतुलित कर रहा है। रूस फिलहाल भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बन चुका है और दोनों देशों के बीच रुपये रूबल भुगतान तंत्र पर काम जारी है। इस संदर्भ में वित्त मंत्री स्तर की यह बैठक केवल औपचारिक नहीं, बल्कि आर्थिक कूटनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
भारत ईएईयू एफटीए वार्ता के अगले दौर की दिशा इन उच्च स्तरीय बैठकों के नतीजों से तय होने की संभावना है। वित्तीय कनेक्टिविटी और निवेश प्रवाह पर हुई चर्चा के आधार पर दोनों देशों के बीच ठोस प्रस्ताव सामने आ सकते हैं।