वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकॉक में IMF-विश्व बैंक बैठक में शामिल, 6 देशों के वित्त मंत्रियों से द्विपक्षीय वार्ता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक पहुँचीं, जहाँ वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस बहुआयामी यात्रा में वह स्विट्जरलैंड, जापान, लक्जमबर्ग, भूटान, थाईलैंड और कुराकाओ के वित्त मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगी।
स्वागत और आगमन
बैंकॉक के सुवर्णभूमि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर थाईलैंड में भारत के राजदूत पुनीत अग्रवाल ने वित्त मंत्री का औपचारिक स्वागत किया। थाईलैंड सरकार के वित्त मंत्रालय के ट्रेजरी विभाग के उप महानिदेशक रुएचा वराटोर्न ने भी उनका स्वागत किया, जो इस यात्रा के कूटनीतिक महत्व को रेखांकित करता है।
मुख्य बहुपक्षीय बैठकें
वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण G20 और G7 देशों के वित्त मंत्रियों एवं केंद्रीय बैंक गवर्नरों (FMCBG) की संयुक्त बैठक में भाग लेंगी। इसके साथ ही वह IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा और जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (JBIC) के गवर्नर से अलग-अलग मुलाकात करेंगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर IMF के अनुमानों पर व्यापक चर्चा हो रही है।
द्विपक्षीय वार्ताएँ और विशेष चर्चाएँ
थाईलैंड के उप-प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री एकनिति नितिथानप्रपास के साथ सीतारमण की द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। अटलांटिक काउंसिल द्वारा आयोजित एक 'फायरसाइड चैट' में वह 'विकसित भारत 2047', भारत-आसियान संबंधों, भारत की विकास संभावनाओं और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढाँचे में सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार साझा करेंगी।
इसके अलावा, वह जर्मनी द्वारा आयोजित 'वर्किंग टुगेदर टू मेक सिटीज इन्वेस्टेबल — मोबिलाइजिंग प्राइवेट कैपिटल फॉर अर्बन एंड वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर' विषयक कार्यक्रम में भी भाग लेंगी। गौरतलब है कि यह सत्र शहरी अवसंरचना में निजी पूँजी जुटाने की वैश्विक चुनौती पर केंद्रित है, जो भारत जैसे विकासशील देशों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है।
भारत के लिए रणनीतिक महत्व
वित्त मंत्रालय ने बताया कि इन बैठकों के माध्यम से भारत के आर्थिक प्रदर्शन, सुधार एजेंडा और निवेश के अवसरों को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकॉक में यह उपस्थिति ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और गहराई से एकीकृत करने की कोशिश कर रहा है।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निर्मला सीतारमण की यह यात्रा भारत की बहुपक्षीय कूटनीति और वित्तीय साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।