30 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांग्लादेश: KUET ने तीन हिंदू प्रोफेसरों समेत 5 हिंदू कर्मचारियों को बर्खास्त किया, अल्पसंख्यकों पर हमले जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश: KUET ने तीन हिंदू प्रोफेसरों समेत 5 हिंदू कर्मचारियों को बर्खास्त किया, अल्पसंख्यकों पर हमले जारी

सारांश

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे — इस हफ्ते KUET ने 5 हिंदू कर्मचारियों को बर्खास्त किया, मयमनसिंह में एक हिंदू नाई की चाकू मारकर हत्या हुई और रंगपुर में तीन हिंदू भाइयों के घर लूटे गए। अगस्त 2024 से शुरू हुई यह त्रासदी थमती नहीं दिख रही।

मुख्य बातें

KUET ने 30 अक्टूबर 2026 को 115वीं समिति बैठक में 3 हिंदू प्रोफेसरों और 2 हिंदू कर्मचारियों सहित 7 कर्मचारियों को बर्खास्त किया।
बर्खास्त हिंदू शिक्षकों में प्रो.
पिंटू चंद्र शिल , प्रो.
सुब्रता तलपत्रा और सहायक प्रो.
निबीर मंडल शामिल हैं।
मयमनसिंह के भालुका में 43 वर्षीय हिंदू नाई रबेंद्र ऋषि की उधार पर बाल काटने से इनकार करने पर चाकू मारकर हत्या; आरोपी सद्दाम गिरफ्तार।
रंगपुर के पीरगंज में सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भड़की हिंसा में तीन हिंदू भाइयों के घरों में तोड़फोड़ और लूट।
अवामी लीग ने हमलों की निंदा की; कहा — अल्पसंख्यक अगस्त 2024 से लगातार असुरक्षा झेल रहे हैं।

बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर बढ़ते अत्याचारों के बीच खुलना इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (KUET) ने 30 अक्टूबर 2026 को कथित अनुशासनहीनता और अनियमितताओं का हवाला देते हुए तीन हिंदू प्रोफेसरों और दो अन्य हिंदू कर्मचारियों सहित कुल सात कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। यह निर्णय विश्वविद्यालय की 115वीं समिति बैठक में लिया गया, जैसा कि KUET के रजिस्ट्रार इंजीनियर अनिसुर रहमान भुइयां ने बताया।

बर्खास्त किए गए कर्मचारी कौन हैं

बर्खास्त किए गए शिक्षकों में कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (CSE) विभाग के प्रोफेसर पिंटू चंद्र शिल, औद्योगिक इंजीनियरिंग एवं प्रबंधन (IEM) विभाग के प्रोफेसर सुब्रता तलपत्रा, और ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (ESE) विभाग के सहायक प्रोफेसर निबीर मंडल शामिल हैं।

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार, शेष दो बर्खास्त हिंदू कर्मचारी उप रजिस्ट्रार निमाई चंद्र मिस्त्री और कार्यालय सहायक सत्यजीत कुमार दत्ता हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर पहले से ही गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

मयमनसिंह में हिंदू नाई की चाकू मारकर हत्या

इसी सप्ताह मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में एक हिंदू व्यक्ति की कथित तौर पर चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मृतक की पहचान 43 वर्षीय रबेंद्र ऋषि के रूप में हुई है, जो एक सैलून के मालिक थे।

बांग्लादेशी दैनिक प्रोथोम आलो ने पुलिस के हवाले से बताया कि 26 वर्षीय आरोपी सद्दाम ने उधार पर बाल काटने से इनकार करने पर रबेंद्र के सीने और गर्दन पर धारदार चाकू से वार किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। भालुका मॉडल पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी पागलों जैसा व्यवहार कर रहा है और उससे पूछताछ के लिए पाँच दिन की रिमांड माँगी गई है।

रंगपुर में हिंदू परिवारों के तीन घरों में तोड़फोड़ और लूट

सोमवार रात को रंगपुर जिले के पीरगंज उपजिला के चक करीमपुर गाँव में तीन हिंदू परिवारों के घरों पर हमला हुआ। स्थानीय मीडिया ने पुलिस के हवाले से बताया कि यह हिंसा सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद भड़की, जिसमें कथित तौर पर मुस्लिम धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची थी।

प्रभावित घर तीन भाइयों — बिशु चंद्र मोहंता (50), जगदीश चंद्र मोहंता (60) और दिनेश चंद्र मोहंता (46) — के थे। द डेली स्टार से बात करते हुए बिशु ने बताया कि हमलावरों ने उनका टेलीविजन, फर्नीचर, दीवारें और दरवाजे तोड़ दिए और घर से दो बकरियाँ भी चुरा लीं। जगदीश की पत्नी आरती रानी ने बताया कि हमले के दौरान जान बचाने के लिए वह घर छोड़कर भाग गईं — और जब उन्होंने हमलावरों से रुकने की गुहार लगाई, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

अवामी लीग की निंदा, व्यापक संदर्भ

रंगपुर में हिंदू परिवारों पर हुए हमले की निंदा करते हुए बांग्लादेश अवामी लीग ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय अगस्त 2024 से देश में लगातार असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया कि धार्मिक अपमान के आरोप कभी भी भीड़ हिंसा, लूटपाट या सामूहिक दंड का बहाना नहीं बन सकते। पार्टी के अनुसार, 'हर आरोपी को उचित कानूनी प्रक्रिया का अधिकार है; हर पीड़ित को कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए।'

गौरतलब है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों की यह श्रृंखला अगस्त 2024 की राजनीतिक उथल-पुथल के बाद से जारी है, और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस पर गहरी चिंता जता चुके हैं। KUET की बर्खास्तगी की घटना और इस हफ्ते की हिंसा मिलकर उस व्यापक चिंता को और गहरा करती हैं जो भारत सहित कई देशों में महसूस की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ही बड़े संकट की कड़ियाँ हैं — बांग्लादेश में अगस्त 2024 के बाद से हिंदू अल्पसंख्यकों पर दबाव की एक सुसंगत और चिंताजनक श्रृंखला। विश्वविद्यालय का तर्क 'अनुशासनहीनता' है, लेकिन जब बर्खास्त किए गए सभी पाँच हिंदू हों तो यह संयोग नहीं, पैटर्न बनता है — और इसे केवल प्रशासनिक मामला मानकर नज़रअंदाज करना उचित नहीं। रंगपुर में सोशल मीडिया पोस्ट को 'भावना आहत' का बहाना बनाकर घरों पर हमला करना और मयमनसिंह में मामूली विवाद पर हत्या — दोनों उस माहौल को दर्शाते हैं जहाँ अल्पसंख्यकों को कानून की जगह भीड़ का सामना करना पड़ता है। भारत के लिए यह केवल पड़ोसी देश का आंतरिक मामला नहीं है — यह एक कूटनीतिक और मानवाधिकार प्राथमिकता है जिस पर स्पष्ट और सार्वजनिक रुख ज़रूरी है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

KUET ने किन हिंदू कर्मचारियों को बर्खास्त किया है?
खुलना इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (KUET) ने CSE विभाग के प्रो. पिंटू चंद्र शिल, IEM विभाग के प्रो. सुब्रता तलपत्रा, ESE विभाग के सहायक प्रो. निबीर मंडल, उप रजिस्ट्रार निमाई चंद्र मिस्त्री और कार्यालय सहायक सत्यजीत कुमार दत्ता को बर्खास्त किया है। यह निर्णय विश्वविद्यालय की 115वीं समिति बैठक में लिया गया।
मयमनसिंह में हिंदू नाई की हत्या कैसे हुई?
43 वर्षीय रबेंद्र ऋषि ने उधार पर बाल काटने से इनकार किया, जिसके बाद 26 वर्षीय सद्दाम नामक व्यक्ति ने उनके सीने और गर्दन पर चाकू से वार किया। रबेंद्र की घटनास्थल पर ही मौत हो गई; सद्दाम गिरफ्तार है और पाँच दिन की पुलिस रिमांड माँगी गई है।
रंगपुर में हिंदू परिवारों पर हमला क्यों हुआ?
पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के बाद भीड़ ने पीरगंज उपजिला के चक करीमपुर गाँव में बिशु, जगदीश और दिनेश चंद्र मोहंता के घरों पर हमला किया। उस पोस्ट में कथित तौर पर मुस्लिम धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप था।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों का यह सिलसिला कब से चल रहा है?
अवामी लीग के अनुसार, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय अगस्त 2024 से लगातार असुरक्षा का सामना कर रहा है। तभी से देश में राजनीतिक उथल-पुथल और अल्पसंख्यकों पर हिंसा की घटनाओं में वृद्धि दर्ज की गई है।
क्या बांग्लादेश सरकार या किसी पार्टी ने इन हमलों की निंदा की है?
अवामी लीग ने रंगपुर हमले की निंदा करते हुए कहा कि धार्मिक अपमान के आरोप भीड़ हिंसा, लूट या सामूहिक दंड का बहाना नहीं बन सकते। पार्टी ने माँग की कि हर पीड़ित को कानून के तहत समान सुरक्षा मिलनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 9 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले