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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा का खतरा बढ़ रहा है? 24 घंटे में दो हिंदुओं की हत्या

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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा का खतरा बढ़ रहा है? 24 घंटे में दो हिंदुओं की हत्या

सारांश

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती हिंसा की घटनाओं ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 24 घंटों में दो हिंदू लोगों की हत्या ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। जानें क्या है इस हिंसा के पीछे का कारण और इससे प्रभावित समुदाय की आवाज़।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है।
हाल ही में दो हिंदुओं की हत्या ने चिंता को बढ़ा दिया है।
स्थानीय प्रशासन मामले की जांच कर रहा है।

ढाका, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महज 24 घंटे के भीतर दो हिंदुओं की अलग-अलग घटनाओं में हत्या कर दी गई।

पहली घटना ढाका के पास नरसिंदी जिले की है। यहां सोमवार रात 40 वर्षीय सरत चक्रवर्ती मणि की बेरहमी से हत्या कर दी गई। बताया गया है कि वह नरसिंदी के पलाश उपजिला स्थित चारसिंदूर बाजार में किराने की दुकान चलाते थे।

स्थानीय लोगों और चश्मदीदों के हवाले से बांग्लादेशी साप्ताहिक पत्रिका ब्लिट्ज ने बताया कि सोमवार रात अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से अचानक हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई। आरोप है कि इस हमले के पीछे एक कट्टरपंथी धार्मिक समूह का हाथ हो सकता है।

दूसरी घटना देश के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से जशोर जिले के मोनिरामपुर उपजिला में हुई। यहां 38 वर्षीय हिंदू कारोबारी राणा प्रताप बैरागी की सार्वजनिक तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई। राणा प्रताप बैरागी कपालिया बाजार में बर्फ बनाने की फैक्ट्री के मालिक थे और साथ ही नारायल से प्रकाशित बांग्लादेशी अखबार 'दैनिक बीडी खबर' के कार्यकारी संपादक भी थे।

बांग्लादेशी बंगाली दैनिक प्रथम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार शाम करीब 5:45 बजे तीन हमलावर मोटरसाइकिल से आए। उन्होंने राणा को उनकी फैक्ट्री से बाहर बुलाया, पास की एक गली में ले गए और बेहद नजदीक से उनके सिर में गोली मार दी। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।

मोनिरामपुर थाने के प्रभारी अधिकारी (ओसी) मोहम्मद रजिउल्लाह खान ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शव को बरामद कर लिया गया है और पोस्टमार्टम के लिए जशोर अस्पताल भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि हत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है, आरोपियों की पहचान की जा रही है, और कानूनी कार्रवाई जारी है।

इन दो हत्याओं से पहले भी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर कई जानलेवा हमले हो चुके हैं। शनिवार को शरियतपुर जिले के दमूद्या उपजिला में खोकन चंद्र दास नामक एक हिंदू व्यक्ति की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पिछले सप्ताह मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में 40 वर्षीय बजेंद्र बिस्वास की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

इसके अलावा, 24 दिसंबर को 29 वर्षीय अमृत मंडल की भीड़ द्वारा कथित रूप से पीट-पीटकर हत्या की खबर सामने आई थी। वहीं 18 दिसंबर को 25 वर्षीय दीपु चंद्र दास को झूठे ईशनिंदा आरोप में भीड़ ने मार डाला, उसके शव को पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं यह कहना चाहता हूँ कि बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा केवल एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। हमें सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होना होगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले बढ़ रहे हैं?
हां, हाल के मामलों से पता चलता है कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हमले बढ़ रहे हैं।
क्या सरकार इस समस्या को हल करने के लिए कदम उठा रही है?
सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक है।
राष्ट्र प्रेस
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