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क्या बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या हुई?

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क्या बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या हुई?

सारांश

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के जीवन की सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हाल ही में एक और हिंदू व्यक्ति की हत्या की गई, जिसका कारण चौंकाने वाला है। इस घटना ने फिर से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को उजागर किया है।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ी है।
हालिया हत्या ने सुरक्षा की स्थिति को उजागर किया है।
सरकार द्वारा जांच की जा रही है।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।

ढाका, 30 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के जीवन को लेकर कोई खास महत्व नहीं रह गया है; यह एक बार फिर स्पष्ट हो गया है। एक और हिंदू व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद उनकी अस्पताल में मौत हो गई। जांच में सामने आया कि 40 वर्षीय बजेंद्र बिश्वास पर उनके सहकर्मी ने बिना किसी कारण के गोली चलाई थी।

यह घटना मैमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में हुई। स्थानीय मीडिया ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। बताया गया कि भालुका उपजिला में स्थित एक गारमेंट फैक्ट्री में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान हिंदू समुदाय से संबंधित अंसार सदस्य बजेंद्र बिश्वास को गोली लग गई। आरोपी का नाम नोमान मिया है।

बांग्लादेश अंसार और विलेज डिफेंस फोर्स, जिसे 'अंसार बाहिनी' कहा जाता है, गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत एक अर्धसैनिक सहायक बल है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा और कानून प्रवर्तन के लिए जिम्मेदार है।

यह घटना सोमवार शाम को उपजिला के मेहरबाड़ी क्षेत्र में सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री में हुई। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट आरटीवी ऑनलाइन ने बताया कि सुल्ताना स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री में कुल 20 अंसार सदस्य कार्यरत थे।

रिपोर्टों के अनुसार, जब यह वारदात हुई, तब अंसार सदस्य नोमान और बजेंद्र एक साथ बैठे थे। नोमान की शॉटगन से निकली गोली बजेंद्र की बाईं जांघ में जाकर लगी। बाद में बजेंद्र को उपजिला स्वास्थ्य परिसर में ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना के चश्मदीद, लैबिब ग्रुप के इंचार्ज और अंसार सदस्य एपीसी अजहर अली ने कहा, "घटना के समय अंसार सदस्य नोमान मिया और बजेंद्र मेरे कमरे में एक साथ बैठे थे। अचानक, नोमान ने बजेंद्र की जांघ पर बंदूक तान दी और पूछा, 'क्या मैं गोली चला सकता हूँ?' और फिर गोली चला दी। इसके बाद, नोमान भाग गया।"

उन्होंने यह भी कहा कि घटना से पहले दोनों के बीच कोई बहस नहीं हुई थी।

इस बात की पुष्टि करते हुए, मैमनसिंह जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (वित्त एवं प्रशासन) अब्दुल्ला अल मामून ने कहा कि मंगलवार सुबह तुरंत एक ऑपरेशन शुरू किया गया, जिससे नोमान को गिरफ्तार कर लिया गया। उन्होंने कहा कि हमले के पीछे का उद्देश्य पता लगाने के लिए पूरी जांच प्रारंभ की गई है। पीड़ित के शरीर को ऑटोप्सी के लिए मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के मुर्दाघर में भेज दिया गया है, जबकि कानूनी कार्रवाई जारी है।

यह हत्या एक हफ्ते से भी कम समय में ऐसी तीसरी घटना है और मैमनसिंह में दूसरी घटना है।

24 दिसंबर को, बांग्लादेशी मीडिया ने एक हिंदू युवक की हत्या की खबर दी थी, जिसकी पहचान 29 वर्षीय अमृत मंडल के तौर पर हुई थी। बांग्लादेश में कालीमोहर यूनियन के हुसैन डांगा क्षेत्र में भीड़ ने कथित तौर पर उसे मार डाला था।

इससे पहले 18 दिसंबर को, 25 वर्षीय एक हिंदू युवक, दीपू चंद्र दास को मैमनसिंह के भालुका उपजिला में उसके कारखाने में एक साथी ने झूठे ईशनिंदा के आरोप में लिंच कर दिया था।

यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है, जिससे दुनिया भर में कई मानवाधिकार संगठनों में गुस्सा है।

पिछले हफ्ते, भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों—जिसमें हिंदू, ईसाई और बौद्ध शामिल हैं—के खिलाफ "लगातार अत्याचार" पर गहरी चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि वह अपने पड़ोस में चल रही गतिविधियों को लेकर बेहद निराश हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा एक गंभीर चिंता का विषय है। हमें इस मुद्दे को समझने और इसकी गहराई में जाने की आवश्यकता है। यह राष्ट्र की एकता और सहिष्णुता के लिए खतरा है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा क्यों बढ़ रही है?
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के कई कारण हैं, जिसमें धार्मिक कट्टरता, राजनीतिक अस्थिरता और सामाजिक पूर्वाग्रह शामिल हैं।
क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी चिंताजनक है।
राष्ट्र प्रेस
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