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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही?

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क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही?

सारांश

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का सिलसिला जारी है। हाल ही में एक हिंदू शिक्षक के घर को आग के हवाले कर दिया गया है। यह घटना बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के लिए बढ़ती चुनौतियों को दर्शाती है। क्या स्थिति और भी गंभीर होगी? जानिए इस रिपोर्ट में।

मुख्य बातें

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है।
कट्टरपंथियों का कानून का भय खत्म हो चुका है।
बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।
भारत ने इस स्थिति पर चिंता जताई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है।

ढाका, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार में कट्टरपंथियों के मन से कानून का भय पूरी तरह से समाप्त हो गया है। हाल के एक मामले में, सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला में एक हिंदू शिक्षक बीरेंद्र कुमार डे के घर में आग लगा दी गई।

इस घटना के बाद पीड़ित के परिवार और आसपास के लोगों में डर और घबराहट फैल गई है। हमले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि घर में आग की लपटें तेजी से बढ़ रही थीं और परिवार के सदस्य अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिलहट जिले के गोवाईघाट उपजिला के नंदिरगांव यूनियन के बहोर गांव में एक इस्लामी समूह ने एक स्कूल टीचर के घर में आग लगाई।

एक अन्य मामले में, इस हफ्ते की शुरुआत में फेनी जिले के दगनभुइयां उपजिला में बदमाशों ने एक हिंदू व्यक्ति की चाकू मारकर हत्या कर दी थी। 27 साल के ऑटो रिक्शा ड्राइवर समीर दास की लाश सोमवार को बांग्लादेश के जगतपुर गांव के खेत में मिली।

परिवार और पुलिस के अनुसार, बांग्लादेश के अखबार डेली मनोबकांठा ने बताया कि समीर रविवार शाम को अपने ऑटो रिक्शा से निकला था। जब वह देर रात तक घर वापस नहीं आया, तो उसके रिश्तेदारों ने उसे अलग-अलग जगहों पर खोजने का प्रयास किया।

बाद में, स्थानीय लोगों को उपजिला के सदर यूनियन के तहत जगतपुर गांव के एक खेत में समीर की बॉडी मिली। खबर मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद किया।

यह 24 दिनों में नौवीं घटना है, जिसमें बांग्लादेश में हिंदू समुदायों को निशाना बनाकर हिंसा की गई। इस स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चिंता जाहिर की जा रही है।

9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर बार-बार होने वाले हमलों के परेशान करने वाले पैटर्न पर गहरी चिंता व्यक्त की थी।

भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश में स्थिति पर निगरानी रख रहा है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा की ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा एक गंभीर चिंता का विषय है। यह केवल एक समुदाय की समस्या नहीं है, बल्कि यह समग्र मानवता के लिए खतरा है। हमें ऐसे मामलों पर गहरी नज़र रखनी होगी और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के कारण क्या हैं?
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के कई कारण हैं, जिनमें धार्मिक कट्टरता और राजनीतिक अस्थिरता शामिल हैं।
क्या भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कुछ कर रहा है?
हां, भारत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए चिंता व्यक्त की है और स्थिति पर नजर रख रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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