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क्या बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने एक और हिंदू की जान ले ली?

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क्या बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने एक और हिंदू की जान ले ली?

सारांश

बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की हत्या के मामले ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को उजागर किया है। क्या कट्टरपंथियों का आतंक इस बार भी रोक पाएगा कोई?

मुख्य बातें

बांग्लादेश में कट्टरपंथियों की बढ़ती हिंसा हिंदू अल्पसंख्यकों की लगातार-targeting राजनीतिक अस्थिरता का प्रभाव

ढाका, 3 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में, शरियतपुर जिले के दामुड्या उपजिला में कट्टरपंथियों की भीड़ ने एक और हिंदू व्यक्ति पर जानलेवा हमला किया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इस घटना में एक अल्पसंख्यक हिंदू युवक की दुखद मृत्यु हो गई।

मृतक का नाम खोकन चंद्र दास था, जो दामुड्या के एक व्यापारी थे। इस सप्ताह के आरंभ में कट्टरपंथियों ने खोकन पर पेट्रोल डालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया। इस घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना बुधवार रात को दामुड्या के कनेश्वर यूनियन में केउरभंगा बाजार के पास हुई।

शनिवार की सुबह, ढाका के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। बांग्लादेश के एक प्रमुख बंगाली अखबार कालबेला ने दामुड्या पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज (ओसी) मोहम्मद रबीउल हक के हवाले से कहा, "हमें जानकारी मिली है कि केउरभंगा बाजार के व्यापारी खोकन चंद्र दास की ढाका में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई है। हम शाहबाग पुलिस स्टेशन के संपर्क में हैं। पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव परिवार को सौंप दिया जाएगा, और पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है।"

बांग्लादेश के एक अन्य प्रमुख अखबार प्रोथोम आलो ने दामुड्या पुलिस स्टेशन के सूत्रों के हवाले से बताया कि खोकन केउरभंगा बाजार में दवा और मोबाइल बैंकिंग का व्यापार करते थे।

बुधवार रात, अपनी दुकान बंद करने के बाद खोकन दिनभर की कमाई लेकर सीएनजी ऑटो रिक्शा से घर लौट रहे थे। तभी बदमाशों ने दामुड्या-शरियतपुर रोड पर उनकी गाड़ी को रोका और उन पर हमला किया। हमले में खोकन घायल हो गए और फिर उनके सिर पर पेट्रोल डालकर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

उनके भतीजे प्रांत दास के अनुसार, खोकन का गुरुवार रात से ढाका के नेशनल बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी इंस्टिट्यूट में इलाज चल रहा था। सुबह उनकी स्थिति बिगड़ गई और इंटेंसिव केयर यूनिट में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में बर्न यूनिट के प्रमुख बिधान सरकार ने प्रोथोम आलो से कहा कि खोकन का शुरू में ढाका मेडिकल कॉलेज में इलाज किया गया था, जहां उनके शरीर का लगभग 30 फीसदी हिस्सा जल गया था।

बाद में उन्हें एडवांस मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए नेशनल बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी इंस्टिट्यूट में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई।

खोकन की मृत्यु के साथ ही यह एक हफ्ते में हिंदू अल्पसंख्यकों पर इस तरह की क्रूरता की दूसरी घटना है। इस हफ्ते की शुरुआत में, 40 साल के बजेंद्र बिस्वास को मैमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में उनके ही एक साथी ने गोली मार दी थी।

इससे पहले पिछले साल 24 दिसंबर को, बांग्लादेशी मीडिया ने अमृत मंडल नाम के एक और हिंदू युवक की हत्या की जानकारी दी थी। अमृत की उम्र 29 साल थी, और उन्हें बांग्लादेश में कालीमोहर यूनियन के हुसैनडांगा इलाके में भीड़ ने कथित तौर पर हत्या कर दी थी।

इससे पहले 18 दिसंबर को, मैमनसिंह में एक फैक्ट्री में काम करने वाले हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को कट्टरपंथियों की भीड़ ने झूठे ईशनिंदा के आरोप में मॉब लिंचिंग का शिकार बना दिया था।

यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में वृद्धि हुई है, जिससे विश्वभर में लोगों और कई मानवाधिकार संगठनों में गुस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा क्यों बढ़ रही है?
बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों की बढ़ती सक्रियता और राजनीतिक अस्थिरता के कारण हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है।
क्या इस तरह की घटनाएँ केवल बांग्लादेश में हो रही हैं?
हालांकि बांग्लादेश में यह घटनाएँ अधिक ध्यान खींच रही हैं, लेकिन कई अन्य देशों में भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ हो रही हैं।
क्या सरकार इस समस्या का समाधान कर रही है?
सरकार द्वारा कुछ प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अधिक प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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