फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान समर्थक बयान पर BJP का पलटवार, नेताओं ने कहा — 'पाकिस्तान चले जाएं'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के उस बयान की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर का मुद्दा उठाकर वहाँ के लोगों की आवाज़ बुलंद करता है और उनकी रक्षा करता है। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से लेकर एकाधिक BJP सांसदों तक, विभिन्न नेताओं ने इस बयान को 'राष्ट्र विरोधी' करार दिया।
मुख्य विवाद क्या है
फारूक अब्दुल्ला ने हाल ही में एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर मुद्दा उठाकर कश्मीरियों की पैरवी कर रहा है। इस बयान ने तत्काल राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। गौरतलब है कि फारूक अब्दुल्ला के पुत्र उमर अब्दुल्ला इस समय जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री हैं, जिससे बयान की राजनीतिक अनुगूँज और व्यापक हो गई।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फारूक अब्दुल्ला का बयान राष्ट्र विरोधी है और भारत में रहकर भारत-विरोधी बयानबाज़ी किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
BJP नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, 'फारूक अब्दुल्ला अब ऐसी स्थिति में पहुँच गए हैं, जो देश-विरोधी बयानों से मेल खाती है। उन्हें पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) के हालात पर नज़र डालनी चाहिए, जहाँ विरोध प्रदर्शन करने या अपनी राय रखने वालों पर गोलियाँ चलाई जाती हैं। आज कश्मीर में लगभग 2 करोड़ पर्यटक आते हैं, जबकि पहले यह संख्या सिर्फ 20 लाख थी। कश्मीर में आज सड़कों का बड़ा नेटवर्क है, IIT और AIIMS जैसे संस्थान हैं और जम्मू-कश्मीर को जोड़ने वाला सबसे ऊँचा रेलवे पुल भी है।'
BJP सांसद गुलाम अली खटाना ने दावा किया कि फारूक अब्दुल्ला कश्मीर में कोई चुनाव नहीं जीते हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर में अब तक केवल दो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव हुए — एक मोरारजी देसाई के कार्यकाल में और दूसरा हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में — जिनमें लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
BJP सांसद मंजू शर्मा ने कहा, 'जब भी फारूक अब्दुल्ला सत्ता में होते हैं, पाकिस्तान के प्रति उनका लगाव साफ नज़र आने लगता है। इससे लगता है कि वे जिस देश में रहते हैं, उस पर भरोसा नहीं करते।'
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला जैसे लोगों को कश्मीर मुद्दे पर बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि धारा 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर का युवा मुख्यधारा से जुड़कर रोज़गार पा रहा है।
BJP नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक कदम उठाया और भारत अब किसी भी बुरी नज़र का जवाब उसी भाषा में देता है।
शिवसेना की माँग — 'पाकिस्तान जाएँ'
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने सबसे तीखी भाषा में कहा, 'फारूक अब्दुल्ला को देश में काफी सम्मान और प्रतिष्ठा मिली है। लेकिन पाकिस्तान के पक्ष में दिए गए उनके बयान ने उनकी अपनी छवि को धूमिल किया है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की छवि पर भी असर डाला है। यदि फारूक अब्दुल्ला को पड़ोसी देश से इतना ही लगाव है, तो पाकिस्तान चले जाएँ और बाकी की ज़िंदगी वहीं गुज़ारें।'
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव के बाद NC की सरकार नई-नई सत्ता में आई है। धारा 370 के निरस्तीकरण के बाद से यह क्षेत्र लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे बयान केंद्र-राज्य संबंधों को और जटिल बना सकते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि फारूक अब्दुल्ला ने केवल अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक वास्तविकता को रेखांकित किया।
यह पहली बार नहीं है जब फारूक अब्दुल्ला के किसी बयान ने राष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा किया हो। अतीत में भी उनके बयान केंद्र और नेशनल कॉन्फ्रेंस के बीच तनाव की वजह बनते रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि फारूक अब्दुल्ला इस बयान पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं या नहीं, और उमर अब्दुल्ला सरकार इस विवाद से खुद को किस तरह अलग करती है।