अंडमान-निकोबार कमांड ने सेवानिवृत्त हो रहे अग्निवीरों को दिया 8 सप्ताह का योग प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
अंडमान एवं निकोबार कमांड के नौसेना घटक ने श्री विजयपुरम में सेवानिवृत्त हो रहे अग्निवीरों के लिए एक विशेष योग प्रशिक्षण कार्यक्रम (योग कैप्सूल) आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अग्निवीरों को शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य और सजगता (माइंडफुलनेस) के साथ नागरिक जीवन में आत्मविश्वासपूर्वक प्रवेश करने के लिए तैयार करना था।
कार्यक्रम का स्वरूप और संचालन
यह आठ सप्ताह का सुनियोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयुष विंग, स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) और अंडमान एवं निकोबार राज्य आयुष सोसायटी के सहयोग से राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में योग के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन को बढ़ावा दिया गया, ताकि अग्निवीर सैन्य सेवा के बाद नागरिक जीवन में सहज रूप से सामंजस्य बिठा सकें।
गौरतलब है कि अग्निवीर योजना के तहत चार वर्ष की सेवा के बाद अधिकांश जवानों को नागरिक जीवन में वापस लौटना होता है, जिससे पुनर्एकीकरण एक महत्वपूर्ण चुनौती बन जाती है। यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
कमांडर-इन-चीफ का दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा
इससे पहले अंडमान एवं निकोबार कमांड के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी ने संचालन संबंधी तैयारी और क्षमता वृद्धि के उद्देश्य से अंडमान द्वीपसमूह के दूरस्थ क्षेत्रों का दौरा किया। इनमें लैंडफॉल द्वीप, ईस्ट द्वीप और आईएनएस कोहासा शामिल थे।
अपने दौरे के दौरान उन्होंने सैन्य तैयारियों का आकलन किया, क्षमता वृद्धि से जुड़ी पहलों की समीक्षा की और रसद (लॉजिस्टिक) व्यवस्था का निरीक्षण किया। वाइस एडमिरल मैकार्टी ने कठिन परिस्थितियों में तैनात सैन्य कर्मियों से मुलाकात कर उनके उच्च पेशेवर रवैये, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की प्रशंसा की।
रजत जयंती पर 'स्ट्रैटेजिक लीडर्स कॉन्क्लेव'
कमांड ने हाल ही में अपनी रजत जयंती के अवसर पर एक 'स्ट्रैटेजिक लीडर्स कॉन्क्लेव' का आयोजन किया, जिसमें पूर्व कमांडर-इन-चीफ और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन में कमांड के 25 वर्षों के सफर, प्रमुख उपलब्धियों और महत्वपूर्ण अनुभवों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री भूमिका को लेकर रणनीतिक चर्चाएँ तेज हो रही हैं। सम्मेलन में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के बढ़ते रणनीतिक महत्व, हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) की भूमिका और उभरती समुद्री चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
अगले 25 वर्षों की रणनीति और प्राथमिकताएँ
कॉन्क्लेव में अगले 25 वर्षों के लिए कमांड की भावी रणनीति और प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया। सम्मेलन में अंडमान एवं निकोबार कमांड को भारत की सामरिक सीमा और समुद्री शक्ति के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त करने का संकल्प दोहराया गया। आने वाले समय में कमांड की परिचालन क्षमताओं के विस्तार और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के समुद्री हितों की रक्षा को प्राथमिकता दिए जाने की उम्मीद है।