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डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों की कठिन ऑब्सटेकल ट्रेनिंग, शत्रुजीत ब्रिगेड का हेलीबोर्न अभ्यास

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डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों की कठिन ऑब्सटेकल ट्रेनिंग, शत्रुजीत ब्रिगेड का हेलीबोर्न अभ्यास

सारांश

डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीर कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण से गुज़र रहे हैं, जबकि शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने शहरी बंधक-मुक्ति और हेलीकॉप्टर इंसर्शन का गहन अभ्यास किया। भारतीय सेना का संदेश — आधुनिक युद्धक्षेत्र के लिए तैयार, हर चुनौती के लिए सक्षम।

मुख्य बातें

डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन ऑब्सटेकल ट्रेनिंग दी जा रही है, जो सहनशक्ति, फुर्ती और मानसिक दृढ़ता विकसित करती है।
हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया युवा रंगरूटों को युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में बदलने का काम कर रहा है।
शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स (SHBO) अभ्यास में शहरी बंधक-मुक्ति परिदृश्य का अनुकरण किया।
अभ्यास में स्लिदरिंग, STIE, लो-होवर ड्रिल और क्लोज़ क्वार्टर बैटल (CQB) तकनीकें शामिल रहीं।
सेना के अनुसार मिशन-केंद्रित प्रशिक्षण से त्वरित कार्रवाई क्षमता और लड़ाकू कुशलता दोनों सुदृढ़ होती हैं।

भारतीय सेना ने 14 जुलाई 2026 को डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों के कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण (ऑब्सटेकल ट्रेनिंग) का विवरण साझा किया। सेना के अनुसार यह प्रशिक्षण युवा रंगरूटों में सहनशक्ति, फुर्ती, मानसिक दृढ़ता और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है।

अग्निवीरों का ऑब्सटेकल प्रशिक्षण

हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया के तहत संचालित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हर बाधा को पार करना ऑपरेशनल एक्सीलेंस की दिशा में एक कदम माना जाता है। सेना ने स्पष्ट किया कि यह ट्रेनिंग युद्ध के मैदान की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का वास्तविक अनुभव कराने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है।

प्रशिक्षण के दौरान तेज़ निर्णय क्षमता, टीमवर्क और विकट परिस्थितियों में अडिग रहने का जज़्बा विकसित किया जाता है। सेना के अनुसार, यह कार्यक्रम मिलिट्री ऑपरेशन के लिए अनिवार्य अनुशासन और युद्ध-भावना को भी सुदृढ़ करता है।

सेना ने कहा कि हकीकत के करीब, चरणबद्ध और मिशन-केंद्रित प्रशिक्षण के ज़रिए प्रेरित युवा रंगरूटों को ऐसे आत्मविश्वासी और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में ढाला जा रहा है जो आधुनिक युद्धक्षेत्र की चुनौतियों का साहस और दृढ़ संकल्प के साथ सामना कर सकें।

शत्रुजीत ब्रिगेड का स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स अभ्यास

इसके साथ ही शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने हाल ही में एक गहन स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स (SHBO) अभ्यास संपन्न किया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य उच्च-जोखिम वाले आतंकवाद-विरोधी मिशनों के लिए ऑपरेशनल तैयारी को और पुख्ता करना था।

अभ्यास में शहरी परिवेश में बंधक-मुक्ति जैसी जटिल परिस्थितियों का अनुकरण किया गया। टैक्टिकल हेलीकॉप्टर इंसर्शन तकनीकों — जिनमें स्लिदरिंग, STIE और लो-होवर ड्रिल शामिल हैं — के ज़रिए जमीन और हवा के बीच सटीक तालमेल का प्रदर्शन किया गया।

इसके पश्चात छत पर सटीक अवतरण और क्लोज़ क्वार्टर बैटल (CQB) यानी कमरे के भीतर तेज़ और निर्णायक कार्रवाई का अभ्यास किया गया। सेना के अनुसार, प्रत्येक चरण में वास्तविक ऑपरेशन जैसे माहौल में गति, समन्वय, सटीकता और सुदृढ़ टीमवर्क की परीक्षा ली गई।

प्रशिक्षण का महत्व और व्यापक संदर्भ

गौरतलब है कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों को नियमित सैनिकों के समान ही परिचालन मानकों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह ट्रेनिंग ऐसे समय में आई है जब भारतीय सेना अपनी युद्ध-तैयारी को आधुनिक और बहु-आयामी खतरों के अनुरूप ढाल रही है।

सेना ने स्पष्ट किया कि मिशन-केंद्रित प्रशिक्षण से त्वरित कार्रवाई क्षमता मज़बूत होती है और यह सुनिश्चित होता है कि पैराट्रूपर्स किसी भी आपात स्थिति में तत्परता और प्रभावशीलता के साथ प्रतिक्रिया दे सकें।

आगे क्या

भारतीय सेना के इस प्रशिक्षण अभियान का विस्तार अन्य रेजिमेंटल केंद्रों में भी अपेक्षित है। सेना का यह संदेश स्पष्ट है — कड़ी ट्रेनिंग, सटीक हमला, मिशन पूरा करना

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अग्निपथ योजना को लेकर उठे सवालों के बीच एक सुविचारित संदेश है। अग्निवीरों की परिचालन तैयारी पर लगातार प्रश्न उठते रहे हैं — यह प्रशिक्षण-प्रदर्शन उसी संशय को संबोधित करने का प्रयास जान पड़ता है। शत्रुजीत ब्रिगेड का SHBO अभ्यास यह भी रेखांकित करता है कि सेना शहरी आतंकवाद-विरोधी क्षमताओं को प्राथमिकता दे रही है। असली कसौटी तब होगी जब ये प्रशिक्षित अग्निवीर चार वर्षों के बाद वास्तविक ऑपरेशनल परिनियोजन में अपनी क्षमता साबित करें।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कैसी ट्रेनिंग दी जाती है?
डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण (ऑब्सटेकल ट्रेनिंग) से गुज़ारा जाता है, जो सहनशक्ति, फुर्ती, मानसिक दृढ़ता और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता विकसित करती है। यह ट्रेनिंग युद्धक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों का अनुकरण करते हुए अनुशासन और युद्ध-भावना को भी सुदृढ़ करती है।
शत्रुजीत ब्रिगेड का स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स अभ्यास क्या है?
शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने हाल ही में एक गहन SHBO अभ्यास किया, जिसमें शहरी परिवेश में बंधक-मुक्ति जैसे उच्च-जोखिम वाले आतंकवाद-विरोधी परिदृश्यों का अनुकरण किया गया। इसमें टैक्टिकल हेलीकॉप्टर इंसर्शन, छत पर सटीक अवतरण और क्लोज़ क्वार्टर बैटल (CQB) तकनीकें शामिल थीं।
अग्निवीर प्रशिक्षण में किन तकनीकों का अभ्यास होता है?
अग्निवीर प्रशिक्षण में ऑब्सटेकल कोर्स के साथ-साथ तेज़ निर्णय क्षमता, टीमवर्क और विकट परिस्थितियों में अडिग रहने का अभ्यास कराया जाता है। SHBO अभ्यास में स्लिदरिंग, STIE, लो-होवर ड्रिल और CQB जैसी उन्नत तकनीकें भी शामिल हैं।
हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया की अग्निवीर प्रशिक्षण में क्या भूमिका है?
हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया हकीकत के करीब, चरणबद्ध और मिशन-केंद्रित प्रशिक्षण के ज़रिए युवा रंगरूटों को आत्मविश्वासी और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में बदलने का काम कर रहा है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि अग्निवीर आधुनिक युद्धक्षेत्र की हर चुनौती का सामना कर सकें।
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों को क्या नियमित सैनिकों जैसी ट्रेनिंग मिलती है?
भारतीय सेना के अनुसार अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों को नियमित सैनिकों के समान ऑपरेशनल मानकों पर प्रशिक्षित किया जा रहा है। डोगरा रेजिमेंटल सेंटर की ट्रेनिंग इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की युद्ध-तैयारी पर ज़ोर दिया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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