10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारतीय सेना के एयर डिफेंस को मिलेगी नई ताकत, 2130 अग्निवीर यूनिट्स में होंगे तैनात

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारतीय सेना के एयर डिफेंस को मिलेगी नई ताकत, 2130 अग्निवीर यूनिट्स में होंगे तैनात

सारांश

गोपालपुर के आर्मी एयर डिफेंस सेंटर से आठवें बैच के 2130 अग्निवीरों ने 'रॉ टू रेज़र' की यात्रा पूरी की। स्वार्म ड्रोन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर में प्रशिक्षित ये जवान अब देशभर की एयर डिफेंस यूनिट्स को नई ताकत देंगे।

मुख्य बातें

2130 अग्निवीर (आठवाँ बैच) इस सप्ताह देशभर की आर्मी एयर डिफेंस यूनिट्स में तैनात होंगे।
पासिंग आउट परेड का निरीक्षण ब्रिगेडियर हेमंत सिंह , कमांडेंट, आर्मी एयर डिफेंस सेंटर, गोपालपुर ने किया।
प्रशिक्षण में स्वार्म ड्रोन , नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और उन्नत एयर डिफेंस तकनीक शामिल।
अग्निवीरों के माता-पिता को सम्मान स्वरूप 'गौरव पदक' प्रदान किया गया।
सेंटर का आदर्श वाक्य 'रॉ टू रेज़र' — कच्चे रंगरूट से युद्ध-तैयार सैनिक तक की यात्रा।

गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस सेंटर से प्रशिक्षण पूरा कर चुके आठवें बैच के 2130 अग्निवीर इस सप्ताह देश भर की विभिन्न आर्मी एयर डिफेंस यूनिट्स में तैनात होने जा रहे हैं। यह कदम भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को युवा और तकनीकी रूप से दक्ष जनशक्ति से सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

पासिंग आउट परेड: 'रॉ टू रेज़र' का संदेश

बीते शनिवार को आर्मी एयर डिफेंस सेंटर, गोपालपुर में आयोजित पासिंग आउट परेड में अग्निवीरों ने 'अंतिम पग' — अर्थात् प्रशिक्षण का अंतिम चरण — सफलतापूर्वक पूरा किया। परेड का निरीक्षण सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर हेमंत सिंह ने किया।

परेड के दौरान अग्निवीरों ने अनुशासन, शारीरिक तालमेल और सैन्य आचरण के उच्च मानकों का प्रदर्शन किया — जो सेंटर के आदर्श वाक्य 'रॉ टू रेज़र' (कच्चे से धारदार हथियार तक) को चरितार्थ करता है।

कमांडेंट का संबोधन

ब्रिगेडियर हेमंत सिंह ने प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर अग्निवीरों को बधाई देते हुए कहा कि उनका सफर युवा रंगरूटों से आत्मविश्वास से भरे, अनुशासित और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में बदलने की यात्रा है।

उन्होंने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप पर भी ज़ोर दिया और कहा कि नई पीढ़ी के सैनिकों को स्वार्म ड्रोन, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म और उन्नत एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक प्रणालियों को संचालित करने में पारंगत होना होगा।

परिजनों को 'गौरव पदक' से सम्मान

इस समारोह की विशेष बात यह रही कि अग्निवीरों के माता-पिता भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। उनके समर्पण, प्रोत्साहन और त्याग को मान्यता देते हुए उन्हें 'गौरव पदक' भेंट किया गया — जो सेना की ओर से परिवारों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

आर्मी एयर डिफेंस पर असर

इन 2130 प्रशिक्षित अग्निवीरों के विभिन्न यूनिट्स में शामिल होने से आर्मी एयर डिफेंस विंग को युवा, प्रेरित और तकनीकी रूप से सक्षम जनशक्ति मिलेगी। गौरतलब है कि यह आठवाँ बैच है, जो दर्शाता है कि अग्निपथ योजना के तहत वायु रक्षा क्षेत्र में नियमित रूप से कुशल सैनिकों की आपूर्ति हो रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली को अत्याधुनिक तकनीक से लैस कर रहा है और सीमाओं पर हवाई खतरों का मुकाबला करने की क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित है। समीक्षा अधिकारी ने अग्निवीरों से आग्रह किया कि वे सेवाकाल के दौरान और उसके पश्चात् भी जीवन के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता का प्रयास जारी रखें।

संपादकीय दृष्टिकोण

असली प्रश्न यह है कि चार वर्षीय सेवाकाल के बाद इन प्रशिक्षित जवानों की तकनीकी दक्षता का दीर्घकालिक उपयोग कैसे होगा, क्योंकि स्वार्म ड्रोन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर जैसी विशेषज्ञता को परिपक्व होने में समय लगता है। अग्निपथ योजना के आलोचकों का तर्क रहा है कि अल्पकालिक सेवा उच्च-तकनीकी भूमिकाओं के लिए उपयुक्त नहीं है — और एयर डिफेंस ठीक ऐसी ही एक भूमिका है। सेना की यह पहल उस बहस को नए सिरे से केंद्र में लाती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपालपुर आर्मी एयर डिफेंस सेंटर से कितने अग्निवीर तैनात हो रहे हैं?
आठवें बैच के कुल 2130 अग्निवीर इस सप्ताह देशभर की विभिन्न आर्मी एयर डिफेंस यूनिट्स में तैनात होने जा रहे हैं। ये सभी गोपालपुर स्थित आर्मी एयर डिफेंस सेंटर में कड़ा प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।
अग्निवीरों को एयर डिफेंस ट्रेनिंग में क्या सिखाया गया?
प्रशिक्षण में स्वार्म ड्रोन संचालन, नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म और आधुनिक एयर डिफेंस टेक्नोलॉजी शामिल रही। इसके अलावा अनुशासन, शारीरिक तालमेल और सैन्य आचरण के उच्च मानकों पर भी ज़ोर दिया गया।
'रॉ टू रेज़र' का क्या अर्थ है?
'रॉ टू रेज़र' आर्मी एयर डिफेंस सेंटर, गोपालपुर का आदर्श वाक्य है, जिसका अर्थ है 'कच्चे से धारदार हथियार तक'। यह वाक्यांश युवा रंगरूटों को अनुशासित और युद्ध-तैयार सैनिकों में बदलने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
पासिंग आउट परेड में 'गौरव पदक' किसे दिया गया?
'गौरव पदक' अग्निवीरों के माता-पिता को प्रदान किया गया, जो इस समारोह में उपस्थित थे। यह सम्मान उनके समर्पण, प्रोत्साहन और त्याग के प्रति सेना की कृतज्ञता का प्रतीक है।
इन अग्निवीरों की तैनाती से भारतीय सेना को क्या फायदा होगा?
2130 प्रशिक्षित अग्निवीरों के यूनिट्स में शामिल होने से आर्मी एयर डिफेंस विंग को युवा, प्रेरित और तकनीकी रूप से दक्ष जनशक्ति मिलेगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत अपनी वायु रक्षा प्रणाली को अत्याधुनिक तकनीक से सुदृढ़ कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले