खड़गे के बयान पर NDA का पलटवार: 'इस भाषा से कांग्रेस का ही नुकसान होगा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी पर नई दिल्ली में राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने 26 अक्टूबर 2026 को खड़गे के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कांग्रेस से सार्वजनिक माफी की माँग की। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, जीतन राम मांझी, ललन सिंह, सांसद संजय झा और सांसद नरेश बंसल ने एक सुर में कहा कि कांग्रेस की भाषा न केवल संसदीय मर्यादाओं का उल्लंघन है, बल्कि पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से भी घातक साबित हो सकती है।
प्रह्लाद जोशी की तीखी आलोचना
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में हम सोचते थे कि राहुल गांधी समझदार हैं, लेकिन संगत के कारण वो भी खराब हो गए हैं।
जोशी ने यह भी कहा कि जिन नेताओं के माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके बारे में इस तरह की भाषा का उपयोग करना राजनीतिक संस्कृति को नुकसान पहुँचाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस को आगामी चुनाव जीतने हैं तो उसे यह भाषा तत्काल बंद करनी होगी।
ललन सिंह ने याद दिलाया 1974 का आंदोलन
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री ललन सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने 1974 के आंदोलन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जमकर विरोध किया था, परंतु उस दौरान भी उनके विरुद्ध अभद्र भाषा का कोई इस्तेमाल नहीं हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने दरभंगा की एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी की माता के विरुद्ध अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था।
ललन सिंह ने यह भी स्मरण कराया कि एक अन्य अवसर पर जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को 'चोर' कहा था, तब सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर उन्हें माफी माँगनी पड़ी थी। उनके अनुसार, कांग्रेस ने राजनीतिक शालीनता के सभी मानदंडों का उल्लंघन किया है।
जीतन राम मांझी और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने खड़गे के बयान को 'निराशाजनक' करार देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस इसी तरह बोलती रही तो आने वाले चुनावों में उसे एक बार फिर करारी हार का सामना करना पड़ेगा और धीरे-धीरे पार्टी का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
सांसद संजय झा ने कहा कि इस प्रकार की भाषा से पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं में भी गलत संदेश जाता है, और देश की जनता सब कुछ देख रही है। भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कांग्रेस पर प्रधानमंत्री को अतीत में 'मौत का सौदागर', 'चाय वाला' और 'चौकीदार चोर है' जैसे संबोधन देने का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता इन बयानों का जवाब चुनावों में देती आई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और व्यापक असर
यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस कई राज्यों में चुनावी तैयारियों में जुटी है और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को बनाए रखने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि भाषाई विवाद पहले भी BJP और कांग्रेस के बीच तनाव का कारण बनते रहे हैं — दोनों दलों पर समय-समय पर आलोचकों द्वारा आरोप लगाए जाते रहे हैं।
NDA नेताओं की एकजुट प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि सत्तारूढ़ गठबंधन इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।