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लखपति दीदी योजना: नीमच की ग्रामीण महिलाओं ने स्व-सहायता समूहों से पाई आर्थिक आज़ादी, हर माह ₹20-25 हज़ार की कमाई

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लखपति दीदी योजना: नीमच की ग्रामीण महिलाओं ने स्व-सहायता समूहों से पाई आर्थिक आज़ादी, हर माह ₹20-25 हज़ार की कमाई

सारांश

नीमच की दीदियाँ अब सिर्फ घर नहीं संभालतीं — वे व्यवसाय चला रही हैं। एनआरएलएम के स्व-सहायता समूहों और लखपति दीदी योजना के ज़रिए ₹6 लाख से ₹12 लाख तक के ऋण पाकर इन महिलाओं ने डेयरी, दुकान और दोना-पत्तल उद्योग खड़े किए — और मध्य प्रदेश के एक जिले में 36 सक्रिय समूहों की कहानी बन गई।

मुख्य बातें

लखपति दीदी योजना और एनआरएलएम के तहत नीमच जिले, मध्य प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
रंजना कुंवर राणावत हर माह ₹20,000-₹25,000 कमा रही हैं; दीपिका बागड़ी के समूह को ₹12 लाख तक का ऋण मिल चुका है।
ग्राम कराड़िया महाराज की एक पंचायत में 5 समूहों से बढ़कर अब 36 सक्रिय समूह संचालित हो रहे हैं।
महिलाओं ने आटा चक्की, पत्तल-दोना निर्माण, डेयरी फार्मिंग, किराना, कॉस्मेटिक और होलसेल दुकानें जैसे विविध उद्यम शुरू किए।
ओमकारी साल्वी ने एनआरएलएम से सिलाई प्रशिक्षण लेकर अतिरिक्त आय का ज़रिया बनाया।
17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर लाभार्थी महिलाओं ने योजना के प्रति आभार व्यक्त किया।

लखपति दीदी योजना के तहत मध्य प्रदेश के नीमच जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं। कभी घर की दहलीज़ तक सीमित रहने वाली ये महिलाएं आज आटा चक्की, डेयरी फार्मिंग, पत्तल-दोना निर्माण और किराना व्यवसाय जैसे उद्यमों के ज़रिए अपने परिवारों की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं। 17 सितंबर 2026 को, जब देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाया जा रहा था, नीमच की इन लाभार्थी महिलाओं ने योजना के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।

स्व-सहायता समूहों की भूमिका और ऋण की राह

नीमच जिले के गाँवों में एनआरएलएम के तहत गठित स्व-सहायता समूहों ने महिलाओं को आरएफ (रिज़र्व फंड), सीआईएफ (कस्टमर इन्फॉर्मेशन फाइल) और सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) जैसे वित्तीय साधनों से जोड़ा। इन ऋण सुविधाओं के ज़रिए महिलाओं ने छोटे-छोटे उद्यम खड़े किए और धीरे-धीरे उनका विस्तार किया। ग्राम कराड़िया महाराज की एक पंचायत में ही पहले जहाँ केवल 5 समूह सक्रिय थे, आज वहाँ 36 समूह काम कर रहे हैं — यह संख्या स्वयं इस पहल की ज़मीनी सफलता बयान करती है।

लाभार्थियों की ज़ुबानी — बदलती ज़िंदगियाँ

रागिनी कुंवर राजपूत, जो किसान सहेली स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं, ने बताया कि समूह से ऋण मिलने के बाद उन्होंने पहले कपड़े की दुकान खोली और फिर पत्तल-दोना निर्माण की मशीन लगाई। उनके अनुसार, इस रोज़गार ने न सिर्फ उनकी अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि उन्होंने गाँव में नए समूह बनाकर अन्य महिलाओं को भी इससे जोड़ा। उनके समूह को अब तक ₹6 लाख तक का ऋण स्वीकृत हो चुका है।

दीपिका बागड़ी (ग्राम पंचायत कराड़िया महाराज) ने बताया कि वे वर्ष 2020 में खाटूश्याम स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जिसमें 13 महिलाएं शामिल हैं। समूह को ₹9 लाख का ऋण मिला, जो ज़रूरतमंद महिलाओं में बाँटा गया। इसके बाद ₹1 लाख का अलग ऋण लेकर उन्होंने डेयरी फार्म शुरू किया। सीसीएल के ज़रिए उनके समूह को चरणबद्ध तरीके से ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख तक का ऋण मिल चुका है।

रंजना कुंवर राणावत, जो शिव शक्ति स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, अब हर माह ₹20,000 से ₹25,000 तक की कमाई कर रही हैं। उनके समूह में 10 सदस्य हैं और हाल ही में ₹6 लाख का ऋण मिला, जिससे उन्होंने कॉस्मेटिक, बच्चों के कपड़े, लेडीज़ सामान और जनरल स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। उनके अनुसार, पहले ₹500-1,000 खर्च करने के लिए भी सोचना पड़ता था, आज वे परिवार को आर्थिक सहारा दे रही हैं।

ओमकारी साल्वी (ग्राम कराड़िया महाराज) ने बताया कि समूह से शुरू में ₹30,000, फिर ₹60,000 की सहायता मिली और अब ₹6 लाख स्वीकृत हो रहे हैं। उन्होंने किराना, मनिहारी (चूड़ियाँ), कपड़े और जूते-चप्पल की होलसेल दुकान खोली है और एनआरएलएम के ज़रिए सिलाई का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य भी कर रही हैं।

मोनिका कुंवर की कहानी — परिवर्तन की मिसाल

मोनिका कुंवर, जो नीमच जिले के ग्राम सरवानियाबोर की रहने वाली हैं और नर्मदा स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं, ने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वे एक सामान्य गृहिणी थीं। रोज़गार मिलने के बाद उनकी पारिवारिक और आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

व्यापक असर और आगे की राह

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण महिला रोज़गार के आँकड़े राष्ट्रीय बहस का केंद्र बने हुए हैं। नीमच जैसे छोटे जिलों में स्व-सहायता समूह मॉडल की सफलता यह दर्शाती है कि वित्तीय समावेशन और कौशल प्रशिक्षण को एक साथ जोड़ा जाए तो ग्रामीण महिलाओं की आय में ठोस बदलाव संभव है। गौरतलब है कि एनआरएलएम के तहत स्व-सहायता समूहों की यह संरचना न सिर्फ ऋण उपलब्ध कराती है, बल्कि समूह की सामूहिक ज़िम्मेदारी महिलाओं को व्यावसायिक अनुशासन भी सिखाती है। आने वाले समय में इन समूहों का विस्तार और ऋण सीमा में वृद्धि इस मॉडल को और सुदृढ़ करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन नीति के नज़रिए से एक ज़रूरी सवाल उठता है — क्या ये सफलताएं अपवाद हैं या प्रतिनिधि नमूना? एनआरएलएम देशभर में करोड़ों महिलाओं को जोड़ने का दावा करता है, मगर राष्ट्रीय स्तर पर औसत आय वृद्धि के स्वतंत्र आँकड़े सीमित हैं। जिन जिलों में एनआरएलएम अधिकारियों की सक्रियता अधिक है, वहाँ समूह फलते-फूलते हैं — जहाँ नहीं, वहाँ ऋण लेकर समूह निष्क्रिय भी हो जाते हैं। असली परीक्षा यह है कि लखपति दीदी योजना के तहत 'लखपति' बनने की परिभाषा, सत्यापन तंत्र और क्षेत्रीय असमानताओं को सरकार किस पारदर्शिता से सार्वजनिक करती है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखपति दीदी योजना क्या है और इससे कैसे जुड़ा जा सकता है?
लखपति दीदी योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक करना है। इससे जुड़ने के लिए महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्व-सहायता समूह में शामिल होना होता है, जहाँ उन्हें ऋण, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़ने की सुविधा मिलती है।
नीमच जिले में स्व-सहायता समूहों को कितना ऋण मिल रहा है?
नीमच जिले में एनआरएलएम के तहत समूहों को चरणबद्ध तरीके से ऋण मिलता है — शुरुआत में आरएफ और सीआईएफ राशि, फिर सीसीएल के ज़रिए ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹12 लाख तक का ऋण स्वीकृत किया गया है। कुछ समूहों को ₹6 लाख और ₹9 लाख तक की राशि भी मिली है।
स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं कितनी कमाई कर रही हैं?
नीमच की लाभार्थी महिलाओं के अनुसार, व्यवसाय शुरू करने के बाद उनकी मासिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रंजना कुंवर राणावत जैसी महिलाएं प्रतिमाह ₹20,000 से ₹25,000 तक कमा रही हैं, जबकि पहले उनके पास कोई स्वतंत्र आय नहीं थी।
ग्राम कराड़िया महाराज में स्व-सहायता समूहों की क्या स्थिति है?
ग्राम कराड़िया महाराज में वर्ष 2020 के आसपास केवल 4-5 समूह सक्रिय थे। आज पूरी पंचायत में 36 स्व-सहायता समूह कार्यरत हैं, जो एनआरएलएम की पहुँच और ज़मीनी विस्तार को दर्शाता है।
महिलाएं इन ऋणों से कौन-से व्यवसाय शुरू कर रही हैं?
नीमच की महिलाओं ने इन ऋणों से आटा चक्की, पत्तल-दोना निर्माण, डेयरी फार्मिंग, सिलाई, किराना दुकान, जनरल स्टोर, कॉस्मेटिक, लेडीज़ सामान, बच्चों के कपड़े और होलसेल व्यवसाय जैसे विविध उद्यम शुरू किए हैं। कुछ महिलाओं ने पशु आहार का व्यवसाय भी किया है।
राष्ट्र प्रेस
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