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नीमच में 3,850 महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', स्वयं सहायता समूहों ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था

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नीमच में 3,850 महिलाएं बनीं 'लखपति दीदी', स्वयं सहायता समूहों ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था

सारांश

नीमच विकासखंड में 1,287 स्वयं सहायता समूहों के नेटवर्क ने 3,850 महिलाओं को 'लखपति दीदी' बना दिया है। किराना दुकान से पोल्ट्री फार्म तक — ये महिलाएं अब सिर्फ बचत नहीं, बल्कि स्थायी उद्यम चला रही हैं और अपने परिवारों की आर्थिक नींव मजबूत कर रही हैं।

मुख्य बातें

नीमच विकासखंड में 3,850 महिलाएं 'लखपति दीदी' श्रेणी में पहुँच चुकी हैं।
विकासखंड में 1,287 स्वयं सहायता समूह , 118 ग्राम संगठन और 12 CLF सक्रिय हैं।
बैंक लिंकेज के तहत समूहों को ₹1.50 लाख से ₹6 लाख तक का ऋण तीन चरणों में मिलता है।
महिलाएं किराना, मनिहारी, आटा चक्की, पोल्ट्री फार्म, आरओ प्लांट और PDS दुकानें चला रही हैं।
ग्राम उगरान की कृष्णा कीर प्रतिमाह ₹15,000–₹20,000 कमा रही हैं; अन्नू बैरवा ने पति के लिए वेल्डिंग व्यवसाय भी स्थापित कराया।
नीमच जिले में NRLM का संचालन अगस्त 2018 से जारी है।

मध्य प्रदेश के नीमच विकासखंड में 3,850 ग्रामीण महिलाएं 'लखपति दीदी' श्रेणी में पहुँच चुकी हैं — यह आँकड़ा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) की जमीनी सफलता का प्रमाण माना जा रहा है। 1,287 स्वयं सहायता समूहों, 118 ग्राम संगठनों और 12 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) के नेटवर्क ने इन महिलाओं को बचत और छोटे ऋण से आगे बढ़कर उद्यमिता की राह दिखाई है।

मुख्य घटनाक्रम

नीमच जिले में NRLM का संचालन अगस्त 2018 से जारी है। जनपद पंचायत नीमच के विकास खंड प्रबंधक राजेंद्र कुमार चौहान के अनुसार, समूहों को बैंक लिंकेज के ज़रिए पहले चरण में ₹1.50 लाख, दूसरे चरण में ₹3 लाख और तीसरे चरण में ₹6 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अतिरिक्त रिवॉल्विंग फंड (RF) और सामुदायिक निवेश निधि (CIF) के माध्यम से भी वित्तीय सहयोग दिया जाता है।

महिलाएं अब किराना व मनिहारी की दुकानें, आटा चक्की, पोल्ट्री फार्म, आरओ प्लांट, 'दीदी कैफे' और उचित मूल्य की राशन (PDS) दुकानें सफलतापूर्वक चला रही हैं। धनेरिया कलां में महिलाओं द्वारा संचालित आरओ प्लांट और फोपल्या में पोल्ट्री फार्म इस बदलाव के ठोस उदाहरण हैं।

महिलाओं की आपबीती

ग्राम उगरान की कृष्णा कीर ने 2021 में जय भवानी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मनिहारी की दुकान शुरू की। 2023 में उन्हें PDS दुकान का संचालन भी मिला। आज वह दोनों स्रोतों से प्रतिमाह ₹15,000 से ₹20,000 की आय अर्जित कर रही हैं।

चंगेरा गांव की राकेश कुंवर ने 2018 में NRLM से जुड़ने के बाद किराना दुकान, PDS दुकान, मनिहारी और आटा चक्की का संचालन शुरू किया। उनका कहना है कि पहले आय का कोई स्थायी साधन नहीं था, लेकिन अब वह अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई और परवरिश की ज़िम्मेदारी स्वयं उठा रही हैं।

उसी गांव की शारदा बाई, जो जय माँ वैष्णवी स्वयं सहायता समूह की सदस्य हैं, ने समूह से मिले ऋण से छोटी दुकान शुरू की और परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया।

डुंगलावादा गांव की अन्नू बैरवा ने श्री गणेश स्वयं सहायता समूह से जुड़कर क्रमशः ₹1.50 लाख, ₹3 लाख और ₹6 लाख का ऋण प्राप्त किया। किराना दुकान से शुरुआत कर उन्होंने बाद में अपनी बचत से पति के लिए वेल्डिंग और लेथ मशीन का व्यवसाय भी स्थापित कराया। आज दोनों मिलकर परिवार की आय बढ़ा रहे हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण भारत में महिला श्रम-बल भागीदारी दर को बढ़ाने पर नीति-निर्माताओं का विशेष ध्यान है। नीमच का यह मॉडल दर्शाता है कि संस्थागत ऋण, प्रशिक्षण और बाज़ार से जुड़ाव मिलकर ग्रामीण महिलाओं को केवल बचत समूह से आगे ले जाकर स्थायी उद्यमी बना सकते हैं। गौरतलब है कि जिला कार्यालय और जनपद पंचायत परिसर के सामने संचालित 'दीदी कैफे' भी इस बदलाव का एक प्रेरक प्रतीक बन चुका है।

क्या होगा आगे

अधिकारियों के अनुसार, विकासखंड में समूहों की संख्या और लखपति दीदी का लक्ष्य आगे और बढ़ाने की योजना है। CLF स्तर पर संघीय ढाँचे को मजबूत करने से महिलाओं को बड़े व्यावसायिक अवसरों तक पहुँच मिलने की संभावना है। नीमच का यह अनुभव अन्य मध्य प्रदेश जिलों के लिए एक संदर्भ मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'लखपति दीदी' की परिभाषा — वार्षिक आय ₹1 लाख से अधिक — एक न्यूनतम सीमा है, न कि समृद्धि का प्रमाण। असली सवाल यह है कि क्या ये उद्यम तीन-पाँच साल बाद भी टिके रहते हैं, या ऋण-चक्र के बाद ठहर जाते हैं। NRLM के राष्ट्रीय डेटा में एनपीए दर और व्यवसाय की स्थिरता पर पारदर्शी रिपोर्टिंग अभी भी सीमित है। नीमच मॉडल को सच्ची सफलता तब माना जाएगा जब यह दिखाया जा सके कि ये महिलाएं ऋण-निर्भरता से आगे बढ़कर स्वतंत्र बाज़ार में टिकाऊ उद्यम चला रही हैं।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'लखपति दीदी' योजना क्या है और नीमच में इसकी स्थिति क्या है?
'लखपति दीदी' उन ग्रामीण महिलाओं को कहा जाता है जो स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से प्रतिवर्ष ₹1 लाख या उससे अधिक की आय अर्जित करती हैं। नीमच विकासखंड में अब तक 3,850 महिलाएं इस श्रेणी में पहुँच चुकी हैं।
नीमच में स्वयं सहायता समूहों को कितना ऋण मिलता है?
बैंक लिंकेज के तहत समूहों को पहले चरण में ₹1.50 लाख, दूसरे चरण में ₹3 लाख और तीसरे चरण में ₹6 लाख तक का ऋण दिया जाता है। इसके अलावा रिवॉल्विंग फंड (RF) और सामुदायिक निवेश निधि (CIF) से भी वित्तीय सहायता उपलब्ध है।
नीमच में NRLM कब से चल रहा है और इसका ढाँचा क्या है?
नीमच जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) का संचालन अगस्त 2018 से हो रहा है। विकासखंड में 1,287 स्वयं सहायता समूह, 118 ग्राम संगठन और 12 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) सक्रिय हैं।
नीमच की महिलाएं किन व्यवसायों में सफल हो रही हैं?
महिलाएं किराना व मनिहारी दुकानें, आटा चक्की, पोल्ट्री फार्म, आरओ प्लांट, 'दीदी कैफे' और PDS राशन दुकानों का संचालन कर रही हैं। धनेरिया कलां में आरओ प्लांट और फोपल्या में पोल्ट्री फार्म इसके उल्लेखनीय उदाहरण हैं।
इस मॉडल से आम ग्रामीण परिवारों पर क्या असर पड़ा है?
महिलाओं की नियमित आय से परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और बच्चों की शिक्षा पर खर्च बढ़ा है। चंगेरा की राकेश कुंवर जैसी महिलाएं अब अपनी तीन बेटियों की पढ़ाई स्वयं वहन कर रही हैं, जबकि डुंगलावादा की अन्नू बैरवा ने पति के लिए अलग व्यवसाय भी स्थापित कराया।
राष्ट्र प्रेस
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