जम्मू-कश्मीर में NRLM से 8.5 लाख महिलाएं बनीं उद्यमी, अवंतीपोरा में फूड एंटरप्राइज़ बना मिसाल
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत महिलाओं के नेतृत्व में स्थापित एक फूड-प्रोसेसिंग उद्यम ने ग्रामीण सशक्तिकरण की नई इबारत लिखी है। 8 अगस्त को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, पुलवामा जिले में शुरू हुए इस उद्यम ने आजीविका के एक साधारण प्रयास को एक सफल व्यावसायिक मॉडल में तब्दील कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में NRLM को जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन (JKRLM) — जिसे 'उम्मीद' के नाम से भी जाना जाता है — के रूप में लागू किया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एजाज असद ने बताया कि JKRLM ने पुलवामा सहित 12 जिलों में फूड सर्विस एंटरप्राइज़ स्थापित किए जा चुके हैं। इस काम के लिए राष्ट्रीय संसाधन संगठन 'कुडुम्बश्री' के साथ एक एमओयू (MOU) किया गया है, जो फूड सर्विस उद्यमों को स्थापित करने में विशेषज्ञता रखता है। असद ने कहा, 'हमारी कोशिश है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं सीमित न रहें, बल्कि वे लखपति दीदी भी बनें।'
विस्तार की योजना
सरकार का लक्ष्य है कि ये उद्यम जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में स्थापित किए जाएं, जहाँ स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इन्हें स्वयं संचालित करेंगी। NRLM की अधिकारी शाबरा शर्मा ने बताया कि अवंतीपोरा में राष्ट्रीय संसाधन संगठन की सहायता से फूड सर्विस एंटरप्राइज़ को सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है, जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ठोस कदम है।
परिवहन की बाधा भी दूर
शर्मा ने यह भी बताया कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की सुविधा न होने की समस्या को देखते हुए, योजना के तहत महिलाओं को वाहन भी उपलब्ध कराए गए हैं। इससे उन महिलाओं को विशेष राहत मिली है जो बुनियादी आवागमन सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रहती हैं।
आम जनता पर असर
वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में लगभग 96,000 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे करीब 8.5 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। यह पहल न केवल इन महिलाओं को सम्मानजनक आय का अवसर दे रही है, बल्कि उनके परिवारों और समुदायों में भी रोजगार के नए द्वार खोल रही है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में केंद्र और स्थानीय प्रशासन दोनों सक्रिय हैं।
क्या होगा आगे
JKRLM के विस्तार कार्यक्रम के अनुसार, शेष जिलों में भी इसी मॉडल को दोहराने की तैयारी है। 'कुडुम्बश्री' जैसे सिद्ध राष्ट्रीय संसाधन संगठनों की साझेदारी से यह उम्मीद जताई जा रही है कि यह उद्यम-मॉडल कश्मीर की ग्रामीण महिलाओं के लिए दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता का आधार बन सकता है।