यूएनजीए में ईरान से मुलाकात को अमेरिका तैयार: विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बयान
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 22 सितंबर 2026 को एक टीवी साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के दौरान ईरान के साथ सार्थक वार्ता के लिए अमेरिका पूरी तरह तैयार है। हालाँकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी अनुमति नहीं दी जाएगी।
रूबियो का बयान: क्या कहा विदेश मंत्री ने
एनबीसी न्यूज़ के कार्यक्रम 'टुडे शो' में रूबियो ने कहा, 'हम इसके लिए तैयार हैं। मुझे नहीं लगता कि अभी कोई बैठक तय हुई है, लेकिन हम निश्चित रूप से ऐसी किसी चीज़ के लिए तैयार हैं, खासकर अगर इससे कुछ सकारात्मक नतीजा निकलने की उम्मीद हो और आखिरकार उस लक्ष्य को हासिल किया जा सके जिसके लिए यह सब हो रहा है।' यह बयान उस समय आया जब एंकर ने उनसे ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से संभावित मुलाकात के बारे में सवाल पूछा।
अमेरिका की अटल शर्त: परमाणु हथियार नहीं
रूबियो ने पिछले सात महीनों से अमेरिका की अपरिवर्तित स्थिति एक बार फिर दोहराई। उन्होंने कहा, 'ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते — वे ऐसा बिल्कुल नहीं कर सकते। यह एक कट्टरपंथी धार्मिक शासन है। उनका अपने ही लोगों के साथ बर्ताव ठीक नहीं रहता; उनके प्रॉक्सी (हूती) को देखें — उन्होंने कितना नुकसान पहुँचाया है और कितनी तबाही मचाई है। ऐसे समूह के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकते।' यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि कूटनीतिक खुलेपन के बावजूद वाशिंगटन की बुनियादी माँग में कोई बदलाव नहीं है।
ईरानी प्रतिनिधिमंडल का न्यूयॉर्क आगमन
यूएनजीए बैठक में भाग लेने के लिए ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुँचे। रिपोर्टों के अनुसार एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने मंगलवार को ही यह भी कहा कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव कम करे और ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी हटाए, तो ईरान सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को तैयार है।
कूटनीति बहाल करने का अधिकार
रिपोर्टों के अनुसार उसी ईरानी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में मौजूद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के पास अमेरिकी अधिकारियों के साथ कूटनीतिक संवाद पुनर्जीवित करने का पूरा अधिकार है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान संबंधों में महीनों की तनातनी के बाद वार्ता की एक संभावित खिड़की दिखती है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यूएनजीए का मंच पारंपरिक रूप से अनौपचारिक द्विपक्षीय वार्ताओं के लिए इस्तेमाल होता रहा है, और इस बार दोनों पक्षों के वरिष्ठ प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में एक साथ मौजूद हैं। यदि यह बैठक होती है, तो यह ट्रंप प्रशासन और तेहरान के बीच पहले सीधे उच्च-स्तरीय संपर्कों में से एक होगी। परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख और अमेरिका की अटल शर्त — दोनों के बीच की खाई को पाटना ही किसी भी सफल वार्ता की असली कसौटी होगी।