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होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर ईरान से परमाणु वार्ता को तैयार अमेरिका — रुबियो का बड़ा बयान

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होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर ईरान से परमाणु वार्ता को तैयार अमेरिका — रुबियो का बड़ा बयान

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने नई दिल्ली से साफ संदेश दिया — होर्मुज स्ट्रेट खोलो, तब परमाणु वार्ता होगी। 60 दिन की अनकही समयसीमा और सैन्य विकल्प की चेतावनी के साथ, यह बयान अमेरिका-ईरान तनाव में एक नई कूटनीतिक शर्त जोड़ता है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गंभीर बातचीत होगी।
रुबियो ने स्वीकार किया कि ' 72 घंटों में परमाणु समझौता संभव नहीं', लेकिन प्रक्रिया में वर्षों नहीं लगने चाहिए।
यदि 60 दिनों में वार्ता नतीजे पर नहीं पहुँची तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास 'सभी विकल्प' खुले रहेंगे — सैन्य कार्रवाई सहित।
अमेरिका और खाड़ी सहयोगी होर्मुज स्ट्रेट पर टोल-मुक्त व्यवस्था के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि चरणबद्ध समझौता आगे की वार्ता में अमेरिकी दबाव कमज़ोर कर सकता है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने 25 मई 2026 को स्पष्ट किया कि यदि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से पुनः खोल देता है, तो वाशिंगटन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 'बहुत गंभीर बातचीत' के लिए तैयार है। रुबियो ने नई दिल्ली की यात्रा के दौरान एक अखबार को दिए साक्षात्कार में यह बात कही, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिका एक चरणबद्ध अंतरिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने को राज़ी हो सकता है।

रुबियो की शर्त: पहले होर्मुज, फिर परमाणु वार्ता

रुबियो ने साक्षात्कार में कहा, 'सबसे पहले होर्मुज स्ट्रेट तुरंत खोला जाना चाहिए। उसके बाद तय नियमों के तहत हम यूरेनियम संवर्धन, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम और ईरान के इस वादे पर गंभीर बातचीत करेंगे कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रक्रिया में वर्षों नहीं लगने चाहिए, परंतु तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए कुछ समय अवश्य लगेगा।

रुबियो ने यह भी स्वीकार किया कि '72 घंटों में किसी कागज पर जल्दी-जल्दी परमाणु समझौता नहीं किया जा सकता।' यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिनमें कहा जा रहा था कि दोनों पक्ष किसी त्वरित समझौते के करीब हैं।

60 दिन की समयसीमा और सैन्य विकल्प की चेतावनी

विदेश मंत्री ने संकेत दिया कि यदि बातचीत अगले दो महीनों में किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुँची, तो अमेरिका फिर से ईरान पर हमले का विकल्प खुला रख सकता है। उनके शब्दों में, 'अगर ऐसा नहीं होता, तो राष्ट्रपति के पास 60 दिनों बाद भी वही सभी विकल्प होंगे जो आज उनके पास हैं।' यह बयान कूटनीतिक दबाव की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने की बात बार-बार दोहराई है। रुबियो ने भी पुष्टि की कि 'जब तक डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति हैं, ईरान परमाणु हथियार नहीं रख पाएगा।'

होर्मुज स्ट्रेट पर टोल-मुक्त व्यवस्था का प्रस्ताव

रुबियो ने बताया कि अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र के उसके सहयोगी एक ऐसे प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं जिससे होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहे और वहाँ किसी प्रकार का टोल न लिया जाए। हालाँकि, इसके लिए ईरान की पूर्ण स्वीकृति और क्रियान्वयन अनिवार्य शर्त बताई गई है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है और इस जलमार्ग पर किसी भी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर पड़ता है।

समझौते पर आलोचकों की चिंता

अब तक न तो अमेरिका और न ही ईरान ने सार्वजनिक रूप से किसी संभावित समझौते का पूरा ब्यौरा दिया है। कई आलोचकों का कहना है कि इस तरह का चरणबद्ध अंतरिम समझौता आगे की बातचीत में ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक पकड़ कमज़ोर कर सकता है, क्योंकि ईरान को बिना पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के राहत मिल सकती है।

रुबियो ने संकेत दिया कि कुछ 'महत्वपूर्ण प्रगति' हुई है, हालाँकि अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है और आगे की कोई भी घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं करेंगे। यह कूटनीतिक प्रक्रिया आने वाले हफ्तों में और निर्णायक मोड़ ले सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ट्रंप के पारंपरिक 'अधिकतम दबाव' सिद्धांत से विचलन है। 60 दिन की अनकही समयसीमा कूटनीतिक दबाव का औज़ार है, लेकिन इतिहास बताता है कि ईरान ऐसी समयसीमाओं को प्रायः अपने पक्ष में इस्तेमाल करता है। सबसे बड़ा अनुत्तरित सवाल यह है कि होर्मुज खुलने के बाद यूरेनियम संवर्धन पर ईरान की 'स्वीकार्य सीमा' क्या होगी — और क्या अमेरिका इज़राइल की आपत्तियों के बावजूद किसी अंतरिम व्यवस्था पर मुहर लगा सकता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मार्को रुबियो ने ईरान परमाणु वार्ता पर क्या शर्त रखी है?
रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरान को पहले होर्मुज स्ट्रेट तत्काल खोलना होगा, उसके बाद ही अमेरिका यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियार न बनाने के वादे पर गंभीर बातचीत करेगा। यह शर्त उन्होंने नई दिल्ली यात्रा के दौरान दिए साक्षात्कार में रखी।
होर्मुज स्ट्रेट का ईरान-अमेरिका विवाद से क्या संबंध है?
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख जलमार्ग है और ईरान ने इसे बंद करने या टोल लगाने की धमकी दी थी। अमेरिका और उसके खाड़ी सहयोगी इसे टोल-मुक्त और पूरी तरह खुला रखने के प्रस्ताव पर काम कर रहे हैं, जिसके लिए ईरान की स्वीकृति ज़रूरी है।
क्या अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु समझौता हो गया है?
नहीं, अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। रुबियो ने कहा कि कुछ 'महत्वपूर्ण प्रगति' हुई है, लेकिन आगे की घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं करेंगे। दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से किसी समझौते का पूरा ब्यौरा नहीं दिया है।
60 दिन की समयसीमा का क्या मतलब है?
रुबियो ने संकेत दिया कि यदि वार्ता 60 दिनों में नतीजे पर नहीं पहुँची, तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई सहित 'सभी विकल्प' खुले रहेंगे। यह कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
आलोचक इस चरणबद्ध समझौते पर आपत्ति क्यों जता रहे हैं?
कई आलोचकों का कहना है कि एक अंतरिम समझौता — जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम तुरंत पूरी तरह हल न हो — आगे की बातचीत में अमेरिका की कूटनीतिक पकड़ कमज़ोर कर सकता है। उनका तर्क है कि ईरान बिना पूर्ण निरस्त्रीकरण के राहत पा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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