अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की रूपरेखा तैयार, बड़े मुद्दे सुलझाने में लग सकते हैं दो महीने
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संकेत दिया कि ईरान को लेकर जल्द एक बड़ी घोषणा हो सकती है। 24 मई को अपने चार दिवसीय भारत दौरे के दूसरे दिन रूबियो का इशारा एक सकारात्मक समझौते की दिशा में था। वेस्ट एशिया मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, दोनों देशों के बीच समझौते की बुनियादी रूपरेखा पर पहले ही सहमति बन चुकी है।
समझौते की रूपरेखा और दो महीने का समय-सीमा
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, 'मुझे लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की रूपरेखा पर पहले ही सहमति बन चुकी है। दोनों पक्ष किसी प्रकार के समझौता ज्ञापन तक पहुंच चुके हैं, जिसके तहत उन्हें सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए दो महीने का समय मिलेगा।' उन्होंने बताया कि इन मुद्दों में खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, यूरेनियम संवर्धन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और ईरानी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने के मामले प्रमुख होंगे।
अव्वाद ने यह भी जोड़ा, 'इसके साथ ही समुद्री क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का मुद्दा भी शामिल होगा। कुल मिलाकर यह एक सकारात्मक घटनाक्रम है और उम्मीद है कि यह समझौता सफल होगा।' अमेरिकी वेबसाइट Axios ने अमेरिकी सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि एक 60-दिवसीय समझौते की संभावना है।
ईरान की आशंकाएँ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जब अव्वाद से ईरान की आशंकाओं पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह स्थिति नई नहीं है। 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाता रहा है। 2006 में यूरोपीय संघ भी इन प्रतिबंधों में शामिल हो गया था। 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में परमाणु समझौते को रद्द कर पुनः एकतरफा प्रतिबंध लगाए, जिसके कारण ईरान अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखता।
गौरतलब है कि 2015 का परमाणु समझौता (JCPOA) ईरान की परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के बदले प्रतिबंध हटाने पर आधारित था। ट्रंप के उस समझौते से बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच विश्वास की गहरी खाई बनी हुई है, जो किसी भी नए समझौते के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
रूबियो का होर्मुज पर कड़ा रुख
रूबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश की संपत्ति नहीं है। यह दुनिया का अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। ईरान वहाँ से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों को नुकसान पहुँचाने की धमकी दे रहा है।' उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न करे।
भारत-अमेरिका संवाद का संदर्भ
यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूबियो अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर थे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहे थे। भारत की पश्चिम एशिया में रणनीतिक और ऊर्जा-संबंधी हितों को देखते हुए अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति नई दिल्ली के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि दो महीने में समझौता आकार लेता है, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।