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अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की रूपरेखा तैयार, बड़े मुद्दे सुलझाने में लग सकते हैं दो महीने

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अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की रूपरेखा तैयार, बड़े मुद्दे सुलझाने में लग सकते हैं दो महीने

सारांश

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के नई दिल्ली दौरे के बीच वेस्ट एशिया विशेषज्ञ वाइल अव्वाद का दावा — अमेरिका-ईरान समझौते की रूपरेखा तैयार, दो महीने में होर्मुज, यूरेनियम संवर्धन और प्रतिबंधों जैसे बड़े मुद्दे सुलझाने की कोशिश होगी। Axios ने 60-दिवसीय डील की संभावना जताई।

मुख्य बातें

वेस्ट एशिया विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार अमेरिका और ईरान समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो चुके हैं।
दोनों पक्षों को लंबित मुद्दे सुलझाने के लिए दो महीने का समय मिल सकता है।
प्रमुख मुद्दों में होर्मुज जलडमरूमध्य , यूरेनियम संवर्धन, परमाणु समझौता, प्रतिबंध और फ्रीज ईरानी संपत्तियाँ शामिल हैं।
अमेरिकी वेबसाइट Axios ने सैन्य सूत्रों के हवाले से 60-दिवसीय डील की संभावना का दावा किया।
विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नई दिल्ली में एस.
जयशंकर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरान पर बड़ी घोषणा के संकेत दिए।
1979 से चले आ रहे एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों के इतिहास के कारण ईरान अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संकेत दिया कि ईरान को लेकर जल्द एक बड़ी घोषणा हो सकती है। 24 मई को अपने चार दिवसीय भारत दौरे के दूसरे दिन रूबियो का इशारा एक सकारात्मक समझौते की दिशा में था। वेस्ट एशिया मामलों के विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, दोनों देशों के बीच समझौते की बुनियादी रूपरेखा पर पहले ही सहमति बन चुकी है।

समझौते की रूपरेखा और दो महीने का समय-सीमा

विशेषज्ञ वाइल अव्वाद ने कहा, 'मुझे लगता है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की रूपरेखा पर पहले ही सहमति बन चुकी है। दोनों पक्ष किसी प्रकार के समझौता ज्ञापन तक पहुंच चुके हैं, जिसके तहत उन्हें सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए दो महीने का समय मिलेगा।' उन्होंने बताया कि इन मुद्दों में खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य, यूरेनियम संवर्धन, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और ईरानी संपत्तियों को फ्रीज किए जाने के मामले प्रमुख होंगे।

अव्वाद ने यह भी जोड़ा, 'इसके साथ ही समुद्री क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का मुद्दा भी शामिल होगा। कुल मिलाकर यह एक सकारात्मक घटनाक्रम है और उम्मीद है कि यह समझौता सफल होगा।' अमेरिकी वेबसाइट Axios ने अमेरिकी सैन्य सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि एक 60-दिवसीय समझौते की संभावना है।

ईरान की आशंकाएँ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जब अव्वाद से ईरान की आशंकाओं पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि यह स्थिति नई नहीं है। 1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाता रहा है। 2006 में यूरोपीय संघ भी इन प्रतिबंधों में शामिल हो गया था। 2018 में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में परमाणु समझौते को रद्द कर पुनः एकतरफा प्रतिबंध लगाए, जिसके कारण ईरान अब भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखता।

गौरतलब है कि 2015 का परमाणु समझौता (JCPOA) ईरान की परमाणु गतिविधियों को सीमित करने के बदले प्रतिबंध हटाने पर आधारित था। ट्रंप के उस समझौते से बाहर निकलने के बाद से दोनों देशों के बीच विश्वास की गहरी खाई बनी हुई है, जो किसी भी नए समझौते के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

रूबियो का होर्मुज पर कड़ा रुख

रूबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश की संपत्ति नहीं है। यह दुनिया का अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ता है। ईरान वहाँ से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों को नुकसान पहुँचाने की धमकी दे रहा है।' उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न करे।

भारत-अमेरिका संवाद का संदर्भ

यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूबियो अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर थे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता कर रहे थे। भारत की पश्चिम एशिया में रणनीतिक और ऊर्जा-संबंधी हितों को देखते हुए अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति नई दिल्ली के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि दो महीने में समझौता आकार लेता है, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब दोनों देश इस मुकाम तक पहुँचे हों — 2015 का JCPOA भी इसी तरह की उम्मीदों के साथ आया था और 2018 में एकतरफा निर्णय से ढह गया। असली परीक्षा यह है कि क्या इस बार कोई सत्यापन-योग्य और बाध्यकारी तंत्र होगा, या यह फिर एक अस्थायी राजनयिक विराम बनकर रह जाएगा। ईरान की आशंकाएँ महज़ बयानबाज़ी नहीं हैं — वे दशकों के एकतरफा प्रतिबंधों की ठोस विरासत हैं। होर्मुज पर रूबियो का कड़ा रुख और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के बीच की खाई को पाटना अभी भी बड़ी चुनौती है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-ईरान समझौते की रूपरेखा क्या है?
विशेषज्ञ वाइल अव्वाद के अनुसार, दोनों देश एक समझौता ज्ञापन तक पहुँच चुके हैं जिसके तहत होर्मुज, यूरेनियम संवर्धन, परमाणु समझौते, प्रतिबंध और फ्रीज संपत्तियों जैसे मुद्दे दो महीने में सुलझाए जाएंगे। Axios ने इसे 60-दिवसीय डील की संभावना बताया है।
मार्को रूबियो ने भारत दौरे पर ईरान को लेकर क्या कहा?
रूबियो ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ घंटों में ईरान को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ सकती है। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न करे।
ईरान अमेरिकी समझौते को लेकर आशंकित क्यों है?
1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से अमेरिका ईरान पर एकतरफा प्रतिबंध लगाता रहा है। 2018 में राष्ट्रपति ट्रंप ने 2015 के परमाणु समझौते को रद्द कर पुनः प्रतिबंध लगाए, जिससे ईरान का भरोसा कमज़ोर हुआ है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद क्या है?
होर्मुज विश्व का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग है। रूबियो के अनुसार, ईरान इस मार्ग से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों को नुकसान पहुँचाने की धमकी दे रहा है, जो किसी भी समझौते में एक प्रमुख विवादास्पद मुद्दा है।
क्या यह नया समझौता 2015 के JCPOA से अलग होगा?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार की रूपरेखा में समुद्री क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और ईरानी संपत्तियों को अनफ्रीज करने जैसे नए पहलू शामिल हैं। हालांकि, सत्यापन तंत्र और बाध्यकारी प्रावधानों का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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