अमेरिका-ईरान समझौते के करीब: 60 दिन का युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा और परमाणु वार्ता होगी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस की 23 मई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान एक अहम समझौते के करीब पहुँच गए हैं। इस कथित समझौते में 60 दिनों के लिए युद्धविराम का विस्तार, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर द्विपक्षीय वार्ता शामिल है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो यह पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
समझौते की मुख्य शर्तें
रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि दोनों देश एक 60 दिवसीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के करीब हैं, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है। इस अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य 'बिना किसी शुल्क के खुला' रहेगा।
कथित तौर पर ईरान जलडमरूमध्य में बिछाई गई अपनी खदानें हटाने और जहाजों के लिए निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने पर सहमत हो गया है — यह एक महत्वपूर्ण सामरिक रियायत मानी जा रही है।
अमेरिका की ओर से क्या मिलेगा ईरान को
रिपोर्ट के अनुसार, बदले में अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी हटाएगा, कुछ प्रमुख प्रतिबंधों में छूट देगा और ईरान को स्वतंत्र रूप से तेल बेचने की अनुमति प्रदान करेगा। यह रियायत ईरानी अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जो वर्षों से कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बोझ तले दबी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है — वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने या अवरुद्ध होने से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में भारी उथल-पुथल मच सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें पहले से ही अस्थिर बनी हुई हैं।
परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, 60 दिनों की अवधि के दौरान दोनों पक्ष ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत भी करेंगे। गौरतलब है कि 2015 के JCPOA समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद से परमाणु वार्ता कई बार टूटती-जुड़ती रही है। यह नया ढाँचा उस अधूरी कूटनीति को पुनर्जीवित करने का प्रयास माना जा रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि दोनों में से किसी भी सरकार ने नहीं की है। एक्सियोस की रिपोर्ट अनाम अमेरिकी अधिकारियों के हवाले पर आधारित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में एक निर्णायक कदम हो सकता है।