यूएस-ईरान एमओयू पर ईरान-फ्रांस के विदेश मंत्रियों की फोन वार्ता, जर्मन मंत्री ने रूबियो से मिलकर समझौते का समर्थन किया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका-ईरान समझौता ज्ञापन (एमओयू) के क्रियान्वयन को लेकर मंगलवार, 30 जून 2026 को कूटनीतिक सरगर्मियाँ तेज़ हो गईं, जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने फोन पर विस्तृत बातचीत की। इसी दिन जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने वाशिंगटन डीसी में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात कर इस समझौते के प्रति बर्लिन का समर्थन दोहराया।
ईरान-फ्रांस फोन वार्ता: क्या हुई बातचीत
ईरानी मीडिया आईआरआईबी के अनुसार, अराघची और बारो के बीच हुई बातचीत में अमेरिका-ईरान एमओयू और उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन पर चर्चा हुई। ईरान की ओर से स्पष्ट किया गया कि 'इस समझौते का उद्देश्य अमेरिका और इज़रायल की ओर से उस पर थोपे गए युद्ध को समाप्त करना है।' यह वार्ता ऐसे समय में हुई जब हालिया शांति प्रयासों के बाद नए सिरे से हुई झड़पें और फिर दोनों पक्षों के बीच हमले रोकने के राजीनामे ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बना दिया था।
होर्मुज स्ट्रेट विवाद: मैक्रों के बयान पर ईरान की कड़ी आपत्ति
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पहले कहा था कि फ्रांस और ओमान मिलकर होर्मुज स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही सुरक्षित बनाने पर काम कर रहे हैं, जिसमें समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगें हटाना भी शामिल है। इस पर ईरान ने तीखी आपत्ति जताई। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'होर्मुज में समुद्र से बारूदी सुरंगें हटाने का काम सिर्फ ईरान करेगा। किसी दूसरे देश को इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी।' यह बयान होर्मुज को लेकर ईरान की संप्रभुता की दृढ़ स्थिति को रेखांकित करता है।
जर्मन विदेश मंत्री की रूबियो से मुलाकात: यूरोप का रुख़
वाशिंगटन डीसी में जर्मन विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मुलाकात के बाद एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपना बयान साझा किया। वाडेफुल ने कहा, 'यह समझौता बेहद नाज़ुक हालात में कूटनीति के लिए अवसर पैदा करता है। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता ऐसा स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है, जिससे होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही बनी रहे।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी दीर्घकालिक समाधान में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का प्रभावी निपटारा अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए, ताकि वह भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा न बने।
व्यापक संदर्भ: क्यों अहम है यह कूटनीतिक सक्रियता
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के कच्चे तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, इसलिए इस जलमार्ग की सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-ईरान के बीच हाल ही में हुए एमओयू के बाद क्षेत्र में स्थिरता को लेकर यूरोपीय देश सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज की बारूदी सुरंगों को हटाने के मुद्दे पर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना रह सकता है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी ठोस समझ तक पहुँचना भी एमओयू के दीर्घकालिक भविष्य की कुंजी होगी। फ्रांस और जर्मनी की सक्रियता यह दर्शाती है कि यूरोप इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाना चाहता है।