लावरोव-अराघची फोन वार्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहन मंत्रणा

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लावरोव-अराघची फोन वार्ता: होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहन मंत्रणा

सारांश

रूसी विदेश मंत्री लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री अराघची की फोन वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की नौवहन स्वतंत्रता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर गहन मंत्रणा हुई। यह वार्ता 27 अप्रैल को सेंट पीटर्सबर्ग में पुतिन-अराघची बैठक के ठीक बाद हुई, जो रूस-ईरान के बढ़ते कूटनीतिक सक्रियता का संकेत है।

Key Takeaways

सर्गेई लावरोव और सैयद अब्बास अराघची के बीच 2 मई को फोन वार्ता हुई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हुई। रूस ने पश्चिम एशिया में मध्यस्थता प्रयासों के प्रति अपना समर्थन दोहराया और कूटनीतिक सहयोग की प्रतिबद्धता जताई। 27 अप्रैल को सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति पुतिन ने अराघची से मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय सहयोग और क्षेत्रीय स्थिति पर विचार-विमर्श हुआ। पुतिन को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का संदेश प्राप्त हुआ, जिसका उल्लेख बातचीत की शुरुआत में किया गया। रूसी प्रतिनिधिमंडल में लावरोव के साथ यूरी उशाकोव और खुफिया प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव भी शामिल थे।

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ 2 मई को फोन पर विस्तृत बातचीत की, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन स्वतंत्रता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। रूसी विदेश मंत्रालय ने इस वार्ता की पुष्टि की और बताया कि दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।

वार्ता के मुख्य बिंदु

मंत्रालय के अनुसार, दोनों विदेश मंत्रियों ने पश्चिम एशिया में शत्रुता की पूर्ण समाप्ति, सैन्य एवं राजनीतिक स्थिति को स्थिर करने तथा क्षेत्र में शांति बहाली की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। रूस ने जारी मध्यस्थता प्रयासों के प्रति अपना समर्थन दोहराया और कूटनीतिक प्रक्रिया में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई।

वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य से रूसी जहाजों और कार्गो के सुरक्षित आवागमन का मुद्दा भी उठाया गया, जिसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गौरतलब है कि यह जलमार्ग विश्व के कुल तेल व्यापार के एक बड़े हिस्से का प्रमुख मार्ग है, और इसमें किसी भी बाधा का वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों पर सीधा असर पड़ सकता है।

पुतिन-अराघची की सेंट पीटर्सबर्ग बैठक

इससे पहले 27 अप्रैल को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में ईरानी विदेश मंत्री अराघची से मुलाकात की थी। इस बैठक में रूस-ईरान द्विपक्षीय सहयोग और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा हुई।

रूसी पक्ष से इस बैठक में विदेश मंत्री लावरोव, राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव और रूसी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के मुख्य खुफिया निदेशालय के प्रमुख इगोर कोस्त्युकोव मौजूद थे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल में उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी और रूस में ईरान के राजदूत काजेम जलाली शामिल थे।

पुतिन का बयान और खामेनेई का संदेश

बैठक के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मास्को ईरान के साथ रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। रूसी मीडिया के अनुसार, पुतिन ने यह भी उम्मीद जताई कि ईरान मौजूदा चुनौतियों से उबरकर स्थिरता और शांति की दिशा में आगे बढ़ेगा।

पुतिन ने कहा,

Point of View

जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
NationPress
02/05/2026

Frequently Asked Questions

लावरोव और अराघची के बीच किन मुद्दों पर बातचीत हुई?
2 मई को हुई फोन वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन स्वतंत्रता, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया में शांति बहाली की संभावनाओं पर चर्चा हुई। रूस ने मध्यस्थता प्रयासों में सहयोग की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
होर्मुज जलडमरूमध्य इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है और इसमें किसी भी बाधा का अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है। रूसी जहाजों और कार्गो के सुरक्षित आवागमन का मुद्दा भी इस वार्ता में उठाया गया।
पुतिन और अराघची की बैठक कब और कहाँ हुई?
राष्ट्रपति पुतिन और ईरानी विदेश मंत्री अराघची की बैठक 27 अप्रैल को सेंट पीटर्सबर्ग में हुई। इसमें रूस-ईरान द्विपक्षीय सहयोग और पश्चिम एशिया की स्थिति पर विचार-विमर्श हुआ।
ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई का संदेश क्या था?
रूसी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई का एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसका उल्लेख पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग बैठक की शुरुआत में किया। संदेश की विस्तृत सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस कूटनीतिक सक्रियता का क्षेत्रीय शांति पर क्या असर हो सकता है?
रूस ने पश्चिम एशिया में शत्रुता की पूर्ण समाप्ति और दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रक्रिया में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। विश्लेषकों के अनुसार, रूस की यह सक्रियता क्षेत्र में उसकी मध्यस्थ भूमिका को मज़बूत करने की कोशिश है।
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