लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नियुक्त किए संसदीय समितियों के अध्यक्ष, वेणुगोपाल फिर PAC प्रमुख, बैजयंत पांडा को PSU समिति
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 2 मई 2026 को संसद की चार प्रमुख समितियों में अध्यक्षों की नियुक्ति की है। एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल को वर्ष 2026-27 के लिए पुनः लोक लेखा समिति (PAC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद बैजयंत पांडा को सार्वजनिक उपक्रम समिति (PSU) का अध्यक्ष बनाया गया है।
मुख्य नियुक्तियाँ और समितियाँ
लोक लेखा समिति का कार्यकाल 1 मई 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक निर्धारित किया गया है। इस समिति में कुल 21 सदस्य नियुक्त किए गए हैं, जिनमें 15 लोकसभा सांसद और 6 राज्यसभा सांसद शामिल हैं। सार्वजनिक उपक्रम समिति में कुल 22 सदस्य हैं — 15 लोकसभा और 7 राज्यसभा सांसद।
इसके अलावा, BJP सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, तथा BJP सांसद संजय जायसवाल को प्राक्कलन समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।
लोक लेखा समिति की सदस्य-सूची
लोकसभा से इस समिति में टीआर बालू, कल्याण बनर्जी, निशिकांत दुबे, जगदंबिका पाल, जय प्रकाश, रविशंकर प्रसाद, सीएम रमेश, मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी, अपराजिता सारंगी, अमर सिंह, तेजस्वी सूर्या, अनुराग सिंह ठाकुर, बालाशोवरी वल्लभनेनी, केसी वेणुगोपाल और धर्मेंद्र यादव को चुना गया है।
राज्यसभा से अशोकराव शंकरराव चव्हाण, के. लक्ष्मण, प्रफुल्ल पटेल, सुखेंदु शेखर रे, अखिलेश प्रसाद सिंह और सुधांशु त्रिवेदी को समिति में शामिल किया गया है।
अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण और प्राक्कलन समिति
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति में कुल 30 सदस्य नियुक्त किए गए हैं — लोकसभा से 20 और राज्यसभा से 10 सांसद। इसी प्रकार, प्राक्कलन समिति में भी लोकसभा से 20 और राज्यसभा से 10 सांसदों सहित कुल 30 सदस्य नियुक्त किए गए हैं। यह समिति भी एक वर्ष के लिए गठित की गई है।
संसदीय समितियों का महत्व
गौरतलब है कि लोक लेखा समिति संसद की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय निगरानी समितियों में से एक है, जो सरकारी व्यय की जाँच करती है और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है। परंपरागत रूप से PAC की अध्यक्षता विपक्षी दल के सांसद को सौंपी जाती है, और वेणुगोपाल की पुनर्नियुक्ति इसी परंपरा को बनाए रखती है।
इन नियुक्तियों के साथ संसद की वित्तीय और कल्याणकारी निगरानी समितियाँ वर्ष 2026-27 के लिए पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं। आने वाले महीनों में ये समितियाँ बजटीय प्रावधानों, सार्वजनिक उपक्रमों के प्रदर्शन और सरकारी व्यय की गहन समीक्षा करेंगी।